सदर जैन मंदिर का घोटाला, दो सौ करोड़ के घोटाले में FIR, करीब दर्जन भर पदाधिकारी हैं आरोपी, फर्जी दस्तावेज बनाने का गंभीर मामला
मेरठ। सदर दुर्गाबाड़ी स्थित प्राचीन जैन मंदिर में फर्जी दस्तावेज व करीब दो सौ करोड़ के घोटाले के मामले में पुलिस ने बयान दर्ज कराने के लिए मंदिर जी के कथित स्वयं भू पदाधिकारियाें रंजीत जैन अध्यक्ष, मृदुल जैन कोषाध्यक्ष और दिनेश जैन मंत्री को नोटिस भेजे हैं। पुलिस लगातार नोटिस भेज रही है, लेकिन कथित आरोपी बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस के पास नहीं जा रहे हैं। मंदिर जी के प्रति अपराध के इस मामले को लेकर ऋषभ एकाडेमी के सचिव डा. संजय जैन की तहरीर पर थाना सदर बाजार पुलिस मुकदमा दर्ज किया हुआ है।
इनके खिलाफ है मुकदमा
सदर दुर्गाबाड़ी स्थित जैन मंदिर में फर्जी दस्तावेज तैयार कर उस पर कथित अवैध प्रबंध समिति बनाकर काविज होने के इस मामले में जिन पर मुकदमा दर्ज है उनमें रंजीत जैन, मृदुल जैन, विजय जैन, दिनेश जैन, अनिल जैन बंटी, प्रेम मामा और सीए सिद्धार्थ गुप्ता शामिल हैं। इन सभी पर मंदिर जी के प्रति अपराध की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
अकूत धन संपदा और संपत्ति के घपले का है मामला
मंदिर जी के प्रति अपराध की यदि बात की जाए तो अकूत धन संपदा करीब सौ किलो सौना, एक हजार किलो चांदी, करोड़ों की नकदी और मंदिर जी को जो संपत्तियां दान दी गयी थीं उनको भी खुदबुर्द कर दिया गया।। इस सारे मामले में सबसे हैरानी की बात यह है कि मंदिर जी में लूट की इसनी बड़ी घटना के बाद भी सदर जैन समाज चुप बैठा रहा और तमाश देखता रहा। ईश्वर का नियम है कि अन्याय करने वाले से ज्यादा अन्याय को सहने वाला जिम्मेदार होता है। सब कुछ सदर जैन समाज ने किया। ऋषभ के सचिव डा. संजय जैन ही एक मात्र अकेले ऐसे शख्स हैं जिन्हाेंने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठायीं। लेकिन यह काम सदर जैन समाज का भी है कि जिन्होंने मंदिर जी के प्रति अपराध किया है। उनके खिलाफ आवाज उठाते। वहां पर नए सिरे से चुनाव कराए जाते। यह अभी भी हो सकता है, बस करना इतना है कि सदर जैन समाज को आगे आना होगा। मंदिर के चुनाव कराए जाने होंगे, लेकिन ये चुनाव फर्जी दस्तावेजों से नहीं जैसे कि रंजीत, मृदुल, दिनेश जैन व अनिल बंटी सरीखों ने कराए थे। जैसे इनके सलाखों के पीछे जाने की आाशंका है वैसे फर्जी चुनाव कराने वाले भी सलाखों के पीछे जा सकते हैं। चुनाव होने चाहिए नियमानुसार जिला प्रशासन के प्रतिनिधि की मौजूदगी में। फिर उस चुनाव में कोई भी भाग ले सकता है, लेकिन सदर जैन समाज का यह दायित्व भी बनता है कि जिन्होंने मंदिर जी के प्रति अपराध और पाप किया है, चुनाव में भी उन्हें मंदिर जी से दूर ही रखा जाए। अब यह सदर जैन समाज को तय करना है कि मंदिर जी को वो कैसे चलाना चाहते हैं। गवन या घोटालों से या फिर ईमानदारी से जैसे कि डा. संजय जैन का प्रयास है।