जांच और पेमाइश के बाद भी हालत जस के तस, एतमादपुर में सरकारी जमीन पर कर लिया कब्जा, हाईकोर्ट में रिट के बाद भी अफसर नींद में
मेरठ। जनपद की तहसील मवाना के ब्लॉक माछरा गांव ऐतमादपुर में सरकारी जमीन पर कब्जा कर प्राइवेट स्कूल के मामले में प्रशासन के स्तर से तमाम पैमाइश एसडीएम के निर्देश पर तहसीलदार की जांच के बाद भी बदला कुछ नहीं। पूरा प्रशासन व पुलिस मिलकर भी श्री संस्कृत इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति के कुछ पदाधिकारियों के द्वारा सकारी जमीन पर किए गए कथित कब्जे को नहीं हटवा सके हैं। हैरानी तो इस बात की है कि सरकारी जमीन पर कब्जा कर प्राइवेट स्कूल चलाए जाने का यह मामला शिक्षा विभाग के तमाम आला अधिकारियों के अलावा प्रशासन के भी सभी अधिकारियों की जानकारी में लाया जा चुका है, लेकिन उसके बाद भी सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जे को हटाने की हिम्मत सिस्टम का कोई भी अफसर नहीं दिखा पा रहा है। अफसरों की हालत कब्जा करने के कथित आरोपियों के सामने लाचारियों सरीखी है। इस मामले में अब हाईकोर्ट ने मेरठ प्रशासन को कार्रवाई कर सरकारी जमीन खाली कराने के आदेश दिए हैं।
अफसरों की नाकामी-मामला हाईकोर्ट में
एतमादपुर की सरकारी जमीन पर अवेध कब्जे के इस मामले में प्रशासन व शिक्षा विभाग के अफसरों की नाकामी से निराश होकर मामले को उजागर करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट ने अब हाईकोर्ट की शरण ली है ताकि सरकारी जमीन कब्जा मुक्त करायी जा सके। हैरानी तो इस बात की है कि सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए प्रशासन के अधिकारी गंभीर नहीं और जो आरटीआई एक्टिवस्त विनोद कुमार इसके लिए प्रयास कर रहे हैं उन्हें ना तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों का साथ मिल रहा है और ना प्रशासन का साथ मिल रहा है। आरोप है कि कब्जा करने वालों की खुली मुठमर्दी चल रही है।
ये है पूरा मामला
गांव ऐतमादपुर में सरकारी जमीन पर कब्जे के इस मामले को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट विनोद कुमार ने बताया कि ग्राम ऐतमादपुर स्थित श्री संस्कृत इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति के कुछ पदाधिकारियों ने ग्राम प्रधान के साथ मिलकर पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत इंटर कॉलेज की कृषि भूमि से प्राप्त आय का दुरुपयोग करते हुए इंटर कॉलेज के सामने स्थित ग्राम पंचायत की सरकारी भूमि (जो राजस्व अभिलेखों में बंजर, खेड़ा, गोहरा एवं आबादी श्रेणी में दर्ज है) पर अवैध निर्माण कराया। सरकारी भूमि पर स्थायी कब्जे की मंशा से, उसी अवैध निर्माण में “श्री संस्कृत पब्लिक स्कूल, ऐतमादपुर का संचालन कथित अवैध रूप से किया जा रहा है। राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) के अनुरूप भवन वैध U-DISE कोड, स्वच्छ पेयजल, बालक/बालिकाओं हेतु पृथक शौचालय, मानक अनुसार कक्षा-कक्ष, अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC), जैसी अनिवार्य शैक्षणिक एवं सुरक्षा आवश्यकताएं आदि प्रशासनिक निरीक्षण के समय उपलब्ध नहीं पाई गईं। विनोद कुमार बताते हैं कि इस मामले को लेकर वह बीएसए, जिविनि के अलावा संयुक्त शिक्षा निदेशक (प्रथम), मेरठ मंडल से भी मिल चुके हैं। हालांकि इस संबंध में जब इस संवाददाता ने जिविनि राजेश कुमार से बात की तो बताया गया कि मामले को प्रशासन देख रहा है। यह भी जानकारी मिली है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से कई नोटिस जारी हो चुके हैं, लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि इस मामले में विद्यालय की मान्यता खत्म की जानी चाहिए। प्रशासन की कार्रवाई की बात करें तो एसडीएम के निर्देश पर तहसीलदार, कानूनगो व नायब तहसीलदार की टीम इसकी पैमाइश भी करा चुकी हैं, लेकिन कब्जा जस का तस है। यह मामला संविधान के अनुच्छेद 21-A की भावना का उल्लंघन भी है। यह मामला केवल एक विद्यालय या एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के राज से सीधे जुड़ा हुआ प्रश्न है, जिस पर त्वरित और निष्पक्ष हस्तक्षेप अब अपरिहार्य हो चुका है।
हाईकोर्ट में रिट
विनोद कुमार ने बताया कि प्रशासन व शिक्षा विभाग के अधिकारियों के रवैये से हताश होकर उन्होंनें अब हाईकोर्ट की शरण ली है। इसको लेकर एक जनहित याचिका संख्या 3626/2025 दाखिल की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने 3 दिसंबर 2025 को तहसीलदार मवाना को धारा 67 के तहत चल रहे मुकदमे का निस्तारण कर जमीन खाली कराए जाने के आदेश दिए हैं।