
नई दिल्ली/मेरठ। यात्रीगण कृपा ध्यान दें दिल्ली के आनंद बिहार से चलकर मेरठ के दौराला स्टेशन पर पहुंचने वाली नमो ट्रेन चलाने वाली कंपनी आरआरटीएस के उच्च पदस्थ अफसरों के द्वारा बार-बार झूठी घोषणाओं के चलते अभी भी अपनी निर्धारित पूर्व घोषित समय सीमा से करीब तीन माह की देरी से चल रही है। हालांकि जिस गति से काम चल रहा है, उसको देखते हुए हो सकता है कि तीन माह की समय सीमा एक माह और आगे बढ़ जाए। यह इसलिए कहा जा रहा है कि अभी भैसाली स्टेशन और बेगमपुल स्टेशन पर काम की जो स्थित है, उसको देखते हुए यह आसानी से कहा जा सकता है कि आनंद बिहार स्टेशन से चलकर वाया गाजियाबाद व परतापुर होकर दौराला स्टेशन तक रैपिड ट्रेन को पहुंचने में करीब तीन माह का समय लगेगा। रैपिड को लेकर इसके टॉप अफसर आए दिन दावा करते हैं कि दस दिन में पंद्रह दिन में दौराला तक रैपिड पहुंच जाएगी, लेकिन स्टेशनों पर खासतौर से बेगमपुल, भैसाली, एमईएस व दौराला तक पहुंचने वाले जितने भी स्टेशन बीच में पड़ते हैं वहां काम की गति को देखते हुए रैपिड से सफर का इंतजार करने वाले यात्रियों को अभी लंबा इंतजार करना होगा। कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले सुनने में आ रहा था यात्रा से पहले ही काम निपटा लिया जाएगा, लेकिन कांवड़ यात्रा खत्म हुए भी कई दिन बीत चुके है, ट्रेन का संचालन होना तो दूर की बात अभी तो स्टेशनों का ही काम अधूरा पड़ा हुआ है, जब तक स्टेशनों का काम पूरा नहीं होगा तक तक रैपिड की बाट जोहते रहिए। बेगमपुल स्टेशन का अधूरा काम देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह काम तीन माह से पहले निपट जाएगा, भले ही और भी ज्यादा वक्त इसमें लग जाए। रही बात घोषणाओं की तो इसमें कुछ खर्च नहीं होता, घोषणा करने वाले अफसरों को सिर्फ जुवान हिलानी पड़ती है। इसी वजह से कहा जा रहा है कि इंतजार अभी लंबा है। मगर उम्मीद ना छोड़िए। हाँ, मेरठ में रैपिड रेल स्टेशनों का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर पर 24 स्टेशन हैं, जिनमें से 13 मेरठ में हैं। कुछ स्टेशनों पर काम अभी भी जारी है, जबकि कुछ चालू हो चुके हैं।