होलिका दहन की तिथि को लेकर भ्रम, बुरे ग्रहों की शांति के लिए पूजा अर्चना अनिवार्य, होलिका तैयार करने में बरतें सावधानी
नई दिल्ली। होली पर इस बार बेदह दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह दुलर्भ संयोग इस साल फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण और भद्रा काल की वजह से बन रहा है, जिससे तिथि पर कन्फ्यूजन का माहौल है। होलिका दहन सोमवार 2 या 3 मार्च को संभव है यदि तीन मार्च को दहन होता है तो फिर रंग 4 मार्च को खेला जाएगा। इस बार भद्रा की वजह से दहन की तिथि को लेकर कन्फ्यूजन है। वहीं दूसरी ओर ज्योतिषियों का कहना है कि पूजन के दौरान कुछ सावधानियां बरतें उससे बुरे ग्रह शांत होंगे।
उदयकालीन पूर्णिमा और प्रदोष काल के बाद दहन संभव
3 मार्च को चंद्र ग्रहण के बावजूद, उदयकालीन पूर्णिमा और प्रदोष काल के बाद दहन संभव है। ग्रहण समाप्ति के बाद सूतक प्रभाव कम होने पर होलिका दहन किया जाएगा। भद्रा काल 2 मार्च शाम से शुरू होकर 3 मार्च सुबह तक रहेगा, इसलिए 2 मार्च की रात दहन शास्त्र-सम्मत नहीं माना जा रहा। रंग वाली होली (धुलेंडी): 4 मार्च 2026 (बुधवार) को पूरे जोश के साथ खेली जाएगी।
पूजन के दौरान यह ध्यान रखें
होलिका दहन पर किए जाने वाले पूजन को लेकर ज्योतिषियों ने कुछ खास टिप्स बताए हैं। साथ ही राय जाहिर की है कि यदि इनको लेकर सावधानी बरती जाए तो शुभ ही शुभ होगा। ज्योतिषिविद पंड़ित विवेक शर्मा पंचमुखी मंदिर बताते हैं कि शाम को लकड़ियां, गोबर के उपले, गाय का गोबर और अनाज से चिता तैयार करें। प्रह्लाद-होलिका की कथा पढ़ें, परिवार के साथ पूजा करें। दहन के बाद राख से तिलक लगाएं – यह बुराई से सुरक्षा का प्रतीक है। विपरीत या कहें अशुभ ग्रहों का प्रभाव खत्म करने के लिए मंत्र जाप और पूजा अर्चना करें। पूजा अर्चना से पहले किसी काबिल ब्राह्मण से सलाह जरूर लें।