
ईरानी में जारी है दमन, नहीं थम रहा है मुल्ला हुकूमत का विरोध, इंटरनेट पर रोक के चलते नहीं मिल रहे अपडेट, ईरानियों को चाहिए 1925 का दौर
नई दिल्ली/न्यूयार्क/तेहरान। ईरानी अब मुल्ला हुकूमत से आजादी के लिए छटपटा रह हैं। वो साल 1925 वाला ईरान चाहते हैं। जहां खुलेपन का दौर था। वहीं दूसरी ओर कहा जा रहा है कि यदि सब कुछ रजा पहलवी के प्लान के मुताबिक हुआ तो वो दिन दूर नहीं जब ईरानी खासतौर से महिलाएं आजाद ख्याल होंगी। हालांकि ऐसा वहां साल 1925 के दौर में हुआ करता था। तेहरान दुनिया का सबसे शानदार शहर हुआ करता था। वहां के लोग आजाद ख्याल थे। उन्हें अपनी मर्जी से रहने और जीने की आजादी थी। वो कुछ पहन सकते थे। लेकिन वक्त के साथ ईरानियों से यह आजादी छीन ली गयी। यह “खुलेपन का युग” और “आजाद ख्याल महिलाओं का युग” रजा पहलवी के विजन से जुड़ा है, जो पहलवी दौर (1925-1979) की याद दिलाता है—जब महिलाओं को वोट, शिक्षा, काम की आजादी मिली, हिजाब बैन था, और ईरान आधुनिक/सेक्युलर था। हालांकि खबरों की मानें तो ईरानियों का दमन जारी है लेकिन ईरान के अंदर प्रदर्शन जारी हैं, इंटरनेट ब्लैकआउट और दमन के कारण सीधे अपडेट्स मुश्किल हैं। महिलाएं अभी भी हिजाब विरोध और आजादी की मांग कर रही हैं।
चर्चा में रजा पहलवी की पहल
इन दिनों पूरे ईरान ही नहीं बल्कि दुनिया में रजा पहलवी (Reza Pahlavi, पूर्व शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे और निर्वासित क्राउन प्रिंस) की पहल और हालिया घटनाक्रम से जुड़ी खबरें काफी चर्चा में हैं। मुल्ला हुकूमत की यदि बात करें तो देश व्यापी प्रदर्शनों के बाद वह कमजोर हुई हे। 2025-2026 में ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन (Woman, Life, Freedom आंदोलन का नया दौर, आर्थिक संकट और दमन के खिलाफ) चल रहे हैं, जहां रजा पहलवी को कई प्रदर्शनकारी और डायस्पोरा (विदेश में रहने वाले ईरानी) ट्रांजिशन लीडर के रूप में देख रहे हैं। ईरानी अब मुल्ला हुकूमत से निजात चाहते हैं। इससे निकलने के लिए वो छटपटा रहे हें।
“ग्लोबल डे ऑफ एक्शन”
रजा पहलवी ने “ग्लोबल डे ऑफ एक्शन” का एलान किया है।जिसके तहत म्यूनिख (Munich Security Conference के साइडलाइन पर), लॉस एंजिल्स, टोरंटो, लंदन आदि शहरों में लाखों ईरानी डायस्पोरा ने रैली की। म्यूनिख में 2-2.5 लाख लोगों ने रेजीम चेंज की मांग की, Lion and Sun फ्लैग लहराए और “Change, Change, Regime Change” के नारे लगाए। हालांकि यह इतना आसान नहीं है। अभी ईरानियों का काफी खून बहना बाकि है।
दुनिया से ईरानियों की मदद का आग्रह
रजा पहलवी ने पूरी दुनिया से ईरानियों की मदद का आग्रह किया है। रजा पहलवी ने म्यूनिख में स्पीच दी, जहां उन्होंने अमेरिका (ट्रंप प्रशासन) से ईरानी लोगों का साथ देने, सख्त सैंक्शंस, संभावित मिलिट्री एक्शन और ट्रांजिशन में मदद की अपील की। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक ट्रांजिशन में फ्री इलेक्शन, सेक्युलर डेमोक्रेसी और महिलाओं की आजादी होगी—पहलवी दौर की तरह “खुलेपन का युग” (open era) जहां महिलाएं बिना हिजाब के शिक्षा, काम और सामाजिक जीवन जी सकें। ईरानी चाहते हैं कि उन्हें 1925 वाली आजादी का दौर देखने को मिले। रजा पहलवी ने ईरान को “सेक्युलर, डेमोक्रेटिक” बनाने का रोडमैप पेश किया, जिसमें रेफरेंडम, इंटरनेशनल वॉच और ट्रांजिशनल गवर्नमेंट शामिल है। कई प्रदर्शनकारियों ने उन्हें ट्रांजिशन लीडर मानते हुए “King Reza Pahlavi” या “Lion and Sun Revolution” के नारे लगाए।
ताजा अपडेट (15 फरवरी 2026 तक):
- रजा पहलवी ने 14 फरवरी को “ग्लोबल डे ऑफ एक्शन” घोषित किया था,
- हालांकि, कुछ एक्टिविस्ट्स (खासकर Woman, Life, Freedom के मूल समर्थक) आलोचना कर रहे हैं कि रजा पहलवी ने जनवरी में अपना “Woman, Life, Freedom” स्लोगन हटा लिया, और कुछ इसे “मोनार्की रिटर्न” के रूप में देखते हैं। लेकिन उनके समर्थक कहते हैं कि वह सेक्युलर डेमोक्रेसी चाहते हैं, न कि राजशाही की बहाली।
यह “खुलेपन का युग” और “आजाद ख्याल महिलाओं का युग” रजा पहलवी के विजन से जुड़ा है, जो पहलवी दौर (1925-1979) की याद दिलाता है—जब महिलाओं को वोट, शिक्षा, काम की आजादी मिली, हिजाब बैन था, और ईरान आधुनिक/सेक्युलर था।