ईरान को रूस चीन की मदद

kabir Sharma
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मिडिल ईस्ट से भीषण जंग, दुनिया भर में गैस के दामों में भारी उलछाल, फिलहाल जंग रूकने के नहीं आसार, जंग के तेज होने से अमेरिका भी परेशान

नई दिल्ली/मास्को/बीजिंग/तेहरान/न्यूयॉर्क/तेलअबीब। मिडिल ईस्ट में भीषण जंग के बीच चीन और रूस की मदद ईरान को पहुंची है। यह अमेरिका और इजरायल के अलावा गल्फ में अमेरिका के मित्र देशों के लिए बुरी खबर है। इस बीच यह भी खबर है कि ईरान परमाणु टेस्ट के लिए तेलअबीब को चुन सकता है। यदि वाकई ऐसा हो गया तो इजरायल का नामोनिशान मिट जाएगा। वहीं दूसरी ओर लड़ाई के भीषण होने से अमेरिका के प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप भी परेशान हैं। केवल ट्रंप ही नहीं दुनिया के तमाम देश परेशान हैं। ट्रंप भले ही कुछ भी बयान दें, लेकिन अंदर से वह भी बुरी तरह से डरे हुए हैं। ईरानियों के बारे में कहा जा रहा है कि वो मौत से डरते नहीं बल्कि मौत को तलाशते हैं। जो हालात बने हुए हैं उससे लगता है कि दूसरा करबला बनना तय है।

सैन्य कार्रवाइयां

अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर 900 से अधिक हमले किए, जिसमें टॉमहॉक मिसाइलें, F-35 जेट्स और ड्रोन शामिल हैं। ईरान के नौसेना, मिसाइल लॉन्चर और परमाणु साइट्स (जैसे फोर्डो, इस्फहान और नतांज) को निशाना बनाया गया। अमेरिका ने ईरान के ड्रोन कैरियर को डुबोया और उसके सैन्य कमांडरों को मार गिराया। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इज़राइल, अमेरिकी ठिकानों (जैसे बहरीन, कुवैत, कतर और यूएई में) और गल्फ देशों पर मिसाइलें दागीं। दुबई और कुवैत के पर्यटन स्थलों पर हमले हुए, जिसमें सिविलियन मौतें हुईं। ईरान ने नई मिसाइलों का प्रदर्शन किया, जिससे इज़राइल और अमेरिका में चिंता बढ़ी जायज है।

अमेरिका में ट्रंप की आलोचना

केवल अमेरिका ही नहीं उसके तमाम मित्र देशों की संसद में डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी आलोचना की जा रही है। अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट ट्रंप को जीने नहीं दे रहे हैं। पूर्व अमेरिकी अधिकारी कहते हैं कि ट्रंप के पास “कोई स्पष्ट प्लान” नहीं है। कांग्रेस ने युद्ध को “अवैध” बताया, क्योंकि ट्रंप ने अनुमति नहीं ली। अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स ने इसे “झूठ पर आधारित” बताया और अमेरिकी हस्तक्षेपवाद की आलोचना की। ट्रंप ने DHS चीफ क्रिस्टी नोएम को निकाला और ओक्लाहोमा सीनेटर को नियुक्त किया।

अमेरिका के पतन की शुरूआत

दुनिया के तमाम ऐसे विशेषज्ञ व पूर्व अफसर हैं जो ईरान के साथ जंग को ट्रंप की गलती और खामेनेई की हत्या को अमेरिका के पतन की शुरूआत बता रहे हैं। विश्लेषक कहते हैं कि यह युद्ध अमेरिका की वैश्विक प्रभुत्व को मजबूत कर रहा है, खासकर तेल नियंत्रण और चीन पर दबाव से। लेकिन आलोचक इसे “अमेरिकी पतन” की शुरुआत मानते हैं। वहीं दूसरी ओर अमेरिका नो रूल्स अप्रेज के साथ इस जंग को लड़ रहा है, लेकिन जो हालात हैं उससे नहीं लगता कि अमेरिका ज्यादा दिन तक लड़ाई लड़ेगा, लेकिन इतना भी तय है कि ईरान से तमाम विकल्प खुले रखे हैं। जब मौत सिर पर हो तो सारे विकल्प आजमाना कोई गलत नहीं

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