पावर कॉर्पोरेशन को आउटसोर्स सेवा निगम के प्राविधानों में शामिल करने की मांग, आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण पर जताई कड़ी आपत्ति, शासन को पत्र का विरोध
नई दिल्ली/लखनऊ/नोएडा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि उ0प्र0 पावर कॉर्पोरेशन लि0 तथा उसके डिस्कॉमों को नवगठित उप्र आउटसोर्स सेवा निगम के प्राविधानों के अंतर्गत तत्काल शामिल किया जाए, ताकि आउटसोर्स एवं संविदा कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। संघर्ष समिति ने इस सम्बन्ध में पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा शासन को भेजे गये पत्र का विरोध किया है जिसमें पॉवर कार्पोरेशन को आउटसोर्स सेवा निगम से अलग रखने की बात की गई है।
आउटसोर्स का शोषण व भेदभाव
संघर्ष समिति ने कहा है कि वर्तमान में पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ व्यापक स्तर पर भेदभाव और शोषण किया जा रहा है। लंबे समय से कार्यरत हजारों कर्मचारियों को नियमितीकरण या समायोजन का लाभ नहीं दिया जा रहा है तथा समान कार्य के बावजूद वेतन भुगतान में भारी असमानता है।
श्रम कानूनों का उल्लंघन
संघर्ष समिति ने यह भी बताया कि कई मामलों में श्रम कानूनों का उल्लंघन करते हुए आउटसोर्स कर्मचारियों को बोनस, अवकाश तथा अन्य वैधानिक सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। इसके विपरीत ठेकेदारों को अनावश्यक वित्तीय लाभ पहुंचाया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों का आर्थिक और सामाजिक शोषण हो रहा है। संघर्ष समिति के अनुसार पावर कॉर्पोरेशन में आउटसोर्स कर्मचारियों से लाइनमैन, उपकेंद्र संचालन, कंप्यूटर ऑपरेशन जैसे अत्यंत तकनीकी एवं जोखिमपूर्ण कार्य कराए जा रहे हैं, जबकि उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण एवं सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। इसके परिणामस्वरूप दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है तथा अनेक कर्मचारी असमय मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता का शिकार हो रहे हैं।
संघर्ष समिति ने बताया कि पिछले कई वर्षों से कार्य कर रहे हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को मनमाने तरीके से सेवा से हटाया गया है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण एवं श्रम कानूनों के विरुद्ध है। साथ ही जांच रिपोर्टों के बावजूद ईपीएफ आदि मदों में अनियमितता करने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। संघर्ष समिति ने कहा है कि सैन्य कल्याण निगम के माध्यम से तैनात कर्मचारियों और अन्य संविदा कर्मचारियों के वेतन में भी भारी अंतर है, जो समान कार्य के सिद्धांत का उल्लंघन है।
संघर्ष समिति की मांग
संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताय कि संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि— पावर कॉर्पोरेशन एवं सभी डिस्कॉमों को आउटसोर्स सेवा निगम के अंतर्गत लाया जाए, सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को निर्धारित मानकों के अनुसार वेतन एवं सुविधाएं दी जाएं, श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ठेकेदारों की अनियमितताओं की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर समायोजित किया जाए।
चेतावनी
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि आउटसोर्स एवं संविदा कर्मचारियों के हितों की रक्षा हेतु शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो इसकी तीखी प्रतिक्रिया होगी और बिजली कर्मियों को आंदोलन हेतु बाध्य होना पड़ेगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन एवं सरकार की होगी। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 448 दिन पूरे होने पर आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।