तो क्या बगैर फायर एनओसी हुआ था नक्शा पास

kabir Sharma
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मेरठ/ साल 2013 में पीएल शर्मा रोड स्थित किंग बेकरी के अवैध कांप्लैक्स का नक्शा प्राधिकरण के अफसरों ने कायदे कानून ताक पर रखकर बगैर फायर एनओसी के ही पास कर दिया था, यह कारगुजारी सामने आने और प्राधिकरण के कुछ खासे बदनाम अफसरों ने जब कंपाउंडिंग का खेल शुरू किया तो फायर एनओसी की दरकार हुई। किसी भी मानचित्र को पास करने के लिए फायर एनओसी का पुर्जा फाइल में एक ही बार लगता है। साल 2013 में इस अवैध इमारत का नक्शा जिसको इस अवैध इमारत का नक्शे को स्वीकृत करने वाले अफसर फायर एनओसी का पुर्जा फाइल में लगाना भूल गए। अब जब कंपाउंडिंग का खेल शुरू हुआ तो उन्हें फायर एनओसी की याद आ गयी। कंपाउंडिंग की बात भी अवैध कांप्लैक्स बनाने वाले ही जोरशोर से प्रचारित कर रहे हैं, लेकिन फायर एनओसी को लेकर न तो सीएफओ संतोष राय हालांकि तीन दिन पहले उनका तवादला यहां से गोरखपुर कर दिया गया है वो कुछ बोलने को तैयार थे और ना ही प्राधिकरण के वो अफसर जो इस अवैध इमारत को बचाने में लगे हैं वो कुछ बोलने को तैयार हैं। प्राधिकरण के इस जोन के जेई ने इतना जरूर साफ किया है कि अवैध कांप्लैक्स बनाने वालों ने कंपाउंडिंग के लिए अर्जी दायर की है, इस पर अंतिम निर्णय वीसी को लेना हैं। कंपाउंडिंग का स्टेट उन्होंने भी स्पष्ट नहीं किया।
बनने थे आवास बना दीं दुकान
साल 2013 में पीएल शर्मा रोड स्थित इन पुराने मकानों में नए सिरे से निर्माण के लिए जो ले-आउटप्लान संख्या-941/13 दाखिल किया गया था उसमें छह मानचित्र आवासीय व एक व्यवसायिक निर्माण स्वीकृत कराए थे। इनमें एक भूखंड व्यवसायिक मानचित्र संख्या-171/14 व आवसीय भूखंडों पर अलग-अलग मानचित्र संख्या-172/14, 173/14 व 175/14 स्वीकृत कराए गए थे।
सील कर ध्वस्त करना भूला प्राधिकरण
आरटीआई के जवाब में प्राधिकरण प्रशासन ने माना कि व्यवसायिक भूखंड के साथ-साथ आवासीय भूखंडों का भी व्यवसायिक प्रयोग किया गया। जिस पर प्राधिकरण द्वारा भू-उपयोग के विरुद्ध निर्माण करने पर उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा-1973 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत ध्वस्तीकरण के आदेश पारित किए गए। किंग के अवैध कांप्लैक्स को सील व ध्वस्तीकरण के आदेश ते प्राधिकरण अफसरों ने किए लेकिन अवैध इमारत पर बुल्डोजर चलाना की हिम्मत नहीं जुटा पाए। फाइलों में सील इस इमारत में लगातार अवैध निर्माण जारी रहा। इतना ही नहीं मानचित्र में कहीं उल्लेख ना होते हुए भी बेसमेंट बना दिया गया। किंग के अवैध कांप्लैक्स को ध्वस्त करने का आदेश देने वाले अफसरों ने एक दिन भी मौके पर जाकर झांक कर नहीं देखा। वर्ना कोई वजह नहीं कि अवैध कांपलैक्स का अब तक कार्रवाई कर दी जाती। प्राधिकरण् की ओर से अब आरटीआई में बताया गया है कि वर्तमान में स्वामी द्वारा व्यवसायिक व आवासीय को मिलाकर कांप्लैक्स हेतु शमन मानचित्र प्राधिकरण में जमा किए गए हैं।
सील की परवाह नहीं
प्राधिकरण प्रशासन किंग के जिस अवैध कांप्लेक्स के सील किए जाने का दावा कर रहा है उस कांप्लैक्स में यदि वाकई सील गली है तो उसमें फिर दुकानों में व्यवसायिक कार्य कैसे किया जा रहा है या फिर यह मान लिया जाए कि आरटीआई एक्टिविस्ट मनोज चौधरी को प्राधिकरण की ओर से भेजी गई जानकारी सत्य पर आधारित नहीं है। आरटीआई के तहत जानकारी देने वाले अफसर ने मौके पर जाकर पड़ताल की जरूरत नहीं समझी। याद रहे कि पीएल शर्मा रोड स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के सामने स्थित किंग के इव अवैध कांप्लैक्स में जब फ्रोजन मीट की सप्लाई करने वाली फूड सप्लाई चैन के दो आउटलेट खुलने की जानकारी सार्वजनिक हुई तो हिन्दू संगठनों ने वहां हंगामा शुरू कर दिया। जिसके बाद आनन-फानन में वहां क्लोज का बोर्ड टांग दिया गया।

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