कार्रवाई के बजाए बजाए कार्रवाई के अफसरों ने मिला लिया हाथ, नियमानुसार किराएदार को बेदखल कर किया जाना था खुली नीलामी, जिसको जमीन बेची उसने बोर्ड की जमीन पर अवैध निर्माण कर बना बना ली पक्की दुकान, नहीं की ध्वस्त
मेरठ। हनुमान चौक से सटे सरकुलर रोड पर कैंट बोर्ड के किराएदार जाकिर ने जो ओपल लैंड रोडी बदरपुर के काम के लिए उसको अलाट की गई थी उसका आधा हिस्सा किसी अन्य को बेच डाला। वो भी उस दशा में जब कोर्ट से उस पर कैंट बोर्ड के पक्ष में यथास्थित के का स्टे थे, लेकिन इस मामले में बजाए बेदखली की कार्रवाई के कैंट बोर्ड ने उससे हाथ मिला दिया, इतना ही नहीं, जिस को जमीन बेची उसकी किराएदारी की रसीद भी बोर्ड ने काट दी। जबकि होना यह था कि जिस कि जिस जगह को बेचा गया, नियमानुसार उस जगह को खाली कराकर उसकी खुली निलामी कराई जाती और जो भी अधिकतम बोली आती, उसको जगह अलाट कर रसीद काटी जाती, लेकिन ऐसा नहीं किया। इस मामले में पूरा खेल किया गया और जो नहीं हो सकता तमाम कायदे कानून ताक कर रखकर वो कर दिया गया। यह पूरा खेल साल 2022 में जब कैंट बोर्ड के सीईओ ज्योति कुमार थे, तब अंजाम दिया गया। इस मामले में रेवेन्यू सेक्शन के एक कर्मचारी का नाम सामने आ रहा है, यह बात अलग है कि नए सीईओ के आने के बाद भी यह फाइल गुमानी में दफन है। इस बीच सूत्रों ने जानकारी दी है कि इस मामले को लेकर किसी शख्स ने रक्षा मंत्रालय में कैंट बोर्ड की इस कारगुजारी की शिकायत की है। वहीं दूसरी ओर इस संबंध में कैंट बोर्ड कुछ भी बोलने को तैयार नहीं, केवल इतनी जानकारी मिली है कि जिस शख्स को यह जमीन बेची गयी है, उसकी एक डीड तैयार करायी गई जिसको जाकिर का पार्टनर बताया गया। जबकि कैंट एक्ट में इस प्रकार की डीड का कोई प्रावधान नहीं है।