अजीब रिवाज बड़ों को छोड़ छोटाें को तोड़

kabir Sharma
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बड़ी अवैध कालोनियां केवल छोड़ी ही नहीं जा रही हैं बल्कि करोड़ों रुपए कीमत की सरकारी जमीनों पर कब्जों की भी अनदेखी है कि जा रही

मेरठ। मेरठ विकास प्राधिकरण में इन दिनों अजीव रिवाज है, अफसर कोई भी आए जाए लेकिन रिवाज है कि खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। रही कानून की तो कानून के जाल में छोटी मछली यानि छोटे कसूरवार तो फंस जाते हैं लेकिन बड़ी मछली या कहें बड़े कसूरवार तो उस जाल को तोड़कर निकल जाते हैं। है ना यह अजीत रिवाज। मेरठ विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन विभाग की जेसीबी केवल उन साफ्ट टारेगट यानि छोटी कालोनियों पर गरजती है जहां से कुछ मिलना नहीं है। या उन कालोनियों पर कार्रवाई की जा रही है, जिन पर कार्रवाई कर अपनी नौकरी बची रहे और बड़ी अवैध कालोनियों से मिलने वाली मलाई लगातार मिलती रहे। ऐसा नहीं है कि महानगर में केवल बड़ी कालोनियों को ही छोड़ा जा रहा है, कई ऐसी छोटी कालोनियों की ओर भी नहीं देखा जा रहा है जहां भारी भरकम सेटिंग है या फिर काेई प्रभावशाली ऐसी कालोनियों के पीछ होता है। अवैध कालोनियों की यदि बात की जाए तो इनकी लंबी फेरिस्त है। जानकारों की मानें तो इस वक्त पूरे महानगर में छोटी बड़ी कुल मिलाकर सात सौ से लेकर आठ सौ अवैध कालोनियां है, ये वो कालाेनियां है जिन पर कार्रवाई इसलिए नहीं की जाती है क्योंकि वहां से कुछ ना कुछ मिलता रहता है। मेरठ विकास प्राधिकरण का कोई ऐसा जाेन नहीं जिसमें अवैध कालोनियां नहीं आबाद की गयीं या फिर अवैध निर्माण नहीं कराए गए हैं।

अवैध कालोनियों वाले जोन

यूं तो महानगर के सभी जाेन में अवैध कालोनिया हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी जोन हैं जहां बीस से तीस तक अवैध कालोनियां आबाद हैं। इनमें जोन सी-2 एनएच-58 बाईपास के बागपत फ्लाई ओवर से जानी तक करीब दो दर्जन अवैध कालोनियां आबाद हैं। इस जोन के जोनल अधिकारी निकिता सिंह व जेई राकेश राणा को ये अवैध कालोनी ना जाने क्यों नहीं नजर आतीं। ये तो वहीं बता सकते हैं कि उन्होंने कौन सा चश्मा पहना हुआ है जो जोन की अवैध कालोनियां नजर नहीं आ रही हैं। इन सभी अवैध कालोनियों में मकान व प्लाट तेजी से बेचे जा रहे हैं। ज्यादातर में मकान बना भी लिए गए हैं। अवैध कालोनी जितनी पुरानी हो जाती है उस पर कार्रवाई का विकल्प फिर बाकि नहीं रहता। कंकरखेड़ा सरधना रोड जोन बी-3 इस जोन में जेई धीरज यादव व जोनल अधिकारी निकिता सिंह हैं। इस जोन में बाईपास से शुरू होकर खिर्वा जलालपुर नहर तक अवैध कालोनियां आबाद हैं। यहां अवैध कालोनियां काटने वालों ने चक रोड और सरकारी नालियां तक कब्जा ली हैं। किसी भी मामले में ऐसा करने वालों के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी और ना ही किसी के खिलाफ एफआईआर ही दर्ज की गयी है। गढ़ रोड जोन डी-3 यहां जेई महादेव शरण और जेई उद्यान इंस्पेक्टर जितेन्द्र सिंह हैं। गढ रोड पर भी सिसौली तक का इलाका अवैध कालोनियों से घिरा हुआ है। हापुड़ रोड़ जहां जेई महादेव शरण और जोन अधिकारी अर्पित यादव हैं यह जोन भी अवैध कालोनियों के लिए खासा बदनाम है। जोन बी-3 में किला रोड तक करीब बाइस अवैध कालोनियां हैं। पता चला है कि गंगानगर जोन में दो अवैध कालोनियों श्याम वाटिका व एक अन्य में तो आज तक प्राधिकरण के किसी कारिंदे ने जाकर झांकने की भी हिम्मत नहीं जुटायी। माना जा रह है कि ऐसा बड़ी पहुंच व बड़ी थैली की वजह से ही संभव हो सका है। अन्यथा कोई भी कालोनी है उस पर कार्रवाई की गयी हो या छोड़ दिया गया हो वहां पर एक बार तो एमडीए का स्टाफ जाता जरूर है। शहर का घनी आबादी वालला इलाका यहां जोन ए-3 इस जोन में भी करीब दो दर्जन अवैध कालोनियां हैं। कुछ अवैध कालोनियां तो इस जोन में ऐसी भी हैं जिन्हें काटे हुए कई साल हो गए लेकिन जब बात नहीं बनी तो वहां जेसीबी चला दी गई। करीब छह माह पूर्व ऐसी ही एक कालोनी में प्राधिकारण प्रवर्तन दस्ता ध्वस्तीकरण करने जा पहुंचा, लोहे की ट्राली पर चढकर जब कार्रवाई की जा रही थी उसी वक्त अचानक ट्राली हाईटेशन तार से टच हो गयी। नतीजा यह हुआ कि एक कर्मचारी की मौत हो गयी तीन बुरी तरह से झुलस गए। इस हादसे के बाद मौके पर मौजूद एमडीए के अधिकारी व कर्मचारी वहां से भाग निकले। बाद में पुलिस आयी और मामला रफादफा हो गया। एक कर्मचारी की मौत हो जाती है तीन झुलस जाते हैं इसके बाद भी किसी पर कार्रवाई नहीं की जाती। इतना बड़ा कांड केवल सेटिंग के बूते ही दफन किया जा सकता है। दिल्ली रोड जोन ए-4 मंगतपुरम में भी अवैध कालोनी आबाद कर दी गई है, लेकिन यहां भी किसी की हिम्मत नहीं जो जाकर झांक सके। जोन ए-4 में ही बिजली बंबा इलाके में मल्टीस्टोरी फ्लैट बनने वालों ने नाली और चकरोड कब्जा ली है, लेकिन इसके बाद भी प्राधिकरण का प्रवर्तन का स्टाफ उठने को तैयार नहीं। इसी इलाके में बाग के सामने कालोनी काटी जा रही है, लेकिन कोई रोकटोक नहीं।

कार्रवाई केवल छोटी कालोनियों पर

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एक पुरानी कहावत है कि कानून के जाल में केवल छोटी मछलियां फंसती हैं, बड़ी मछलियां तो कानून का जाल काट देती हैं। यह कहावत प्राधिकरण के कुछ अफसरों खासकर प्रवर्तन स्टाफ पर स्टीक लागू होती है। प्रवर्तन विभाग का जोर भी केवल छोटी अवैध कालोनियों पर चलता है। इन्हीं कालोनियों पर जोर दिखाकर वहां खडे होकर फोटो खिचवाकर और ऐसी कालोनियों का खडंजा उखाडती जेसीबी के फोटो मीडिया व शासन को भेज दी जाती है, लेकिन किसी भी बड़ी कालोनी जो सौ डेढ सौ या दो सौ बीधा में काटी गयी हो उन पर कभी भी प्राधिकरण की जेसीबी नजर नहीं आती। लावड रोड का शिव कुंज जिसका पहले नाम राधा गार्डन था इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। राधा गार्डन ही नहीं इस इलाके में ऐसी कई कालोनियों का काम चल रहा है जो बड़े रकबे में काटी जा रही हैं।

राठी जी उठा लो श्री दिनकर जी के घ्यानार्थ

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