सीएम ग्रिड योजना शहर को ना दे टापू, नाले-नालियां कर दीं तिरछीं, बारिश के मौसम में तिरछे नाले साबित होंगे मुसीबत, पार्षद कई बार कर चुके हैं आपत्ति
मेरठ। मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट शहरी (सीएम ग्रिड) योजना के तहत महानगर में चल रहे कार्यों में नाले नालियों का निर्माण भी शामिल है, लेकिन ज्यादातर स्थानों पर कार्यदायी संस्था यानी ठेकेदार ने नालों और नालियों को तिरछा कर दिया है। दरअसल हुआ यह कि पूरे महानगर में सरकारी जमीन पर लोगों ने कब्जे कर पक्के निर्माण कर लिए हैं। इतना ही नहीं ऐसा करने वालों ने सरकारी नाले और नालियों को भी कब्जा लिया है। उम्मीद थी कि सीएम ग्रिड योजना के तहत जब काम शुरू होगा तो अवैध कब्जों से नाले नालियों को मुक्त करा दिया जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। बजाए अवैध कब्जे हटाकर नाले नालियां सीधी बनाने के ठेकेदार के स्टाफ ने अवैध कब्जे करने वालों से ही हाथ मिला लिया। नतीजा यह हुआ कि सीधे बनाने के बजाए नाले नालियां तिरछी कर दी गयी हैं।
विकास कार्यों में गंभीर खामियां
निगम के तमाम पार्षद बार-बार कह रहे हैं कि सीएम ग्रिड योजना के तहत चल रहे विकास कार्यों में गंभीर खामियां सामने आई हैं। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों की शिकायत है कि पूरे महानगर में नालियां तिरछी-टेढ़ी बनाई जा रही हैं, जिससे जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। बारिश के मौसम में पानी का बहाव सही दिशा में नहीं हो पा रहा, जिससे सड़कों पर पानी जमा हो रहा है और कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन रही है। इसको लेकर पार्षदों ने हंगामा भी किया, लेकिन ठेकेदार और निगम के अफसरों पर पार्षदों के विरोध का कोई असर नहीं हुआ।
नालों के डिजाइन में लापरवाही।
इस योजना के तहत कई सड़कों पर 47 करोड़ से लेकर 152 करोड़ तक की लागत से काम चल रहा है, लेकिन नालों की डिजाइन में लापरवाही के कारण समस्या बढ़ गई है। सीएम ग्रिड योजना के तहत मेरठ में गढ़ रोड (गांधी आश्रम से तेजगढ़ी चौराहे तक), कमिश्नरी चौराहा से बच्चा पार्क, सर्किट हाउस और अन्य प्रमुख मार्गों पर सड़क चौड़ीकरण, भूमिगत बिजली केबल, नालों को ढककर फुटपाथ निर्माण जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
लगातार दर्ज कराई जा रहीं आपत्ति
बच्चापार्क शिव चौक के आसपास के लोगों का कहना है कि नालियां तिरछी बनने से पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित हो रहा है। कई जगहों पर नाले सिल्ट से भरे पड़े हैं, गंदगी जमा है और निर्माण कार्य के दौरान सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। इससे न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि मच्छर-मक्खियों से बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। कुछ इलाकों में दुकानदारों को गंदा पानी दुकानों में घुसने से नुकसान हो रहा है।
अफसरों के निरीक्षण के बाद भी खामियां बा-दस्तूर जारी
पार्षदों व अन्य की लगातार आपत्तियों के बाद अफसरों ने निरीक्षण किया, लेकिन जो खामियां हैं जो मुस्तैदी से कायम हैं। नगर निगम और यूरिडा (URIDA) की टीमों ने कई बार निरीक्षण किया है, लेकिन खामियां दूर करने में देरी हो रही है। व्यापारियों और निवासियों ने मांग की है कि नालियों की डिजाइन को तुरंत सुधारा जाए, सही ढलान और दिशा में निर्माण हो और गुणवत्ता जांच की जाए। अगर ये खामियां समय रहते ठीक नहीं हुईं तो योजना का उद्देश्य ही प्रभावित हो सकता है।मेरठवासियों की उम्मीद है कि प्रशासन जल्द कार्रवाई करेगा और शहर की जल निकासी व्यवस्था को मजबूत बनाएगा, ताकि विकास कार्य वाकई शहर के लिए फायदेमंद साबित हो, लेकिन जो रवैया दिखाई दे रहा है उससे नहीं लगता कि कुछ होगा।