काला मोतिया यानि ग्लूकोमा, नेत्र ज्योति का सबसे शातिर चोर, एक बार रोशनी गयी तो फिर हमेशा के लिए गयी।
मेरठ। ग्लूकोमा (काला मोतिया) दुनिया भर में अपरिवर्तनीय अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक है। दुर्भाग्यवश, इस बीमारी के बारे में बहुत से लोगों को तब तक पता नहीं चलता जब तक दृष्टि को गंभीर नुकसान नहीं हो जाता। इसी कारण इस गंभीर नेत्र रोग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए डॉ. कृति नौसरान MBBS (LHMC) MS (MAMC) Gold Medalist Senior Resident 8 मार्च से 14 मार्च तक विश्व ग्लूकोमा सप्ताह मनाया जाता है।
“दृष्टि का मूक चोर”
ग्लूकोमा को अक्सर “दृष्टि का मूक चोर” कहा जाता है, क्योंकि इसके प्रारम्भिक चरण में आमतौर पर *कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। यह धीरे-धीरे *ऑप्टिक नर्व (दृष्टि तंत्रिका) को नुकसान पहुँचाता है, जो आंख से मस्तिष्क तक दृश्य संकेत पहुँचाने का कार्य करती है। यदि समय रहते इसका पता न लगाया जाए और उपचार न किया जाए तो यह स्थायी दृष्टि हानि का कारण बन सकता है।
एक बार रोशनी गई तो फिर गई
ग्लूकोमा की सबसे चिंताजनक बात यह है कि *एक बार दृष्टि चली जाए तो उसे वापस नहीं लाया जा सकता। इसलिए *समय पर जांच और नियमित नेत्र परीक्षण अत्यंत आवश्यक है। नियमित जांच के माध्यम से इस रोग का प्रारम्भिक अवस्था में पता लगाया जा सकता है और समय पर उपचार करके दृष्टि हानि को रोका जा सकता है।
चालिस साल के ऊपर की आयु वाले रखे ध्यान
कुछ लोगों में ग्लूकोमा होने का जोखिम अधिक होता है, जैसे *40 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, जिनके परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास हो, मधुमेह या उच्च रक्तचाप के रोगी, तथा लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का उपयोग करने वाले लोग। ऐसे व्यक्तियों को विशेष रूप से *नियमित नेत्र परीक्षण कराते रहना चाहिए।
डा. कृति नौसरान व सीनियर डा. अनिल नौसरान का मानना है कि नियमित नेत्र जांच ही ग्लूकोमा से होने वाले अंधेपन से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। समय पर निदान होने पर दवाओं, लेजर उपचार या सर्जरी के माध्यम से रोग की प्रगति को रोका जा सकता है। विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के अवसर पर सभी लोगों से अपील है कि वे अपने परिवार, मित्रों और समाज में आंखों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाएं। डा. कृति नौसरान की सभी को सलाह है कि आज अपनी आंखों का ध्यान रखें, ताकि कल की दुनिया साफ दिखाई दे।*