तारीख पे तारीख और कुछ नहीं, NCRTC नहीं उतरी मेरठ वालों से किए वादे पर खरी, भाजपाई भी कर रहे देरी की वजह से NCRTC की आलोचना
मेरठ। मेरठ से दिल्ली के बीच रैपिड ट्रेन की मेरठ में आखिरी स्टेशन से कनेक्टिविटी को लेकर जो दावे NCRTC ने किए थे वो हवाई साबित हो रहे हैं। साल 2024 में कनेक्टिविटी वादा था। उसके बाद लगातार तारीख पर तारीख दी जाती रहीं। इस साल दावा था कि कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले अंतिम स्टेशन से कनेक्टिविटी कर दी जाएगी, लेकिन NCRTC दावे पर खरी नहीं उतरी। हैरानी तो इस बात की है कि NCRTC के अफसर इसकी कोई वजह भी नहीं बता पा रहे हैं। मेरठ वालों में इसको लेकर NCRTC के प्रति जबरदस्त गुस्सा है।
इंतजार में विदा हो गया साल
साल 2025 विदा हो रहा है लेकिन मेरठ वालों से किया गया NCRTC का संपूर्ण कनैक्टिविटी का वादा पूरा नहीं हो सका। 82 किलोमीटर का दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर अभी भी पूरी तरह ऑपरेशनल नहीं हो सका। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) ने बार-बार जून 2025 तक पूरा प्रोजेक्ट चालू करने का वादा किया था, लेकिन इसके अफसरों के दावे और वादे लगातार खोखले साबित हुए। हैरानी तो इस बात की है कि अभी भी इंतजार ही करना पड़ रहा है।
साउथ से आगे बढ़े तो बने बात
दिल्ली के न्यू अशोक नगर स्टेशन से मेरठ साउथ स्टेशन तक करीब 55 किलोमीटर का हिस्सा चल रहा है, जिसमें 11 स्टेशन शामिल हैं। जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यू अशोक नगर तक का उद्घाटन किया था। सराय काले खान (दिल्ली का मुख्य टर्मिनल) से न्यू अशोक नगर और मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक के बाकी 27 किलोमीटर हिस्से का इंतजार अभी भी जारी है। देरी से तमाम मेरठ के तमाम लोगों में जबरदस्त नाराजगी है। बेगमपुल व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष पुनीत शर्मा का कहना है कि देरी से NCRTC की साख पर बुरा असर पड़ रहा है। पीएल शर्मा रोड पंचमुखी मंदिर के पुजारी व ज्योतिषी विवेक शर्मा व कारोबारी अंकुर बंसल का कहना है कि यदि अंतिम स्टेशन तक कनेक्टिविटी हो जाए तो मेरठ वालों को सुविधाजनक हो जाएगा। कारोबारी अंकुर गोयल व अंकित मनु का कहना है कि इस काम को जितना शीघ्र हो सके निपटाया जाना चाहिए। देरी की वजह से लोगों में जबरदस्त नाराजगी है। इस बात को NCRTC के अफसरों को समझना होगा। ट्रायल रन के नाम पर खाली ट्रेन दौड़ाने का खेल खत्म होना चाहिए। कई बार सितंबर या अक्टूबर में उद्घाटन की उम्मीद जताई गई, लेकिन वो भी टल गया। NCRTC ने लगातार डिले की वजह स्पष्ट नहीं की है, जिससे मेरठ के commuters में निराशा है।
अधूरा है 55 मिनट वाला सपना
मेरठ वालों का अंतिम स्टेशन से ्रैरपिड रेल से दिल्ली तक का सफर सिर्फ 55 मिनट में पूरा होने का सपना अधूरा सिर्फ NCRCT अफसरों की कार्यप्रणाली की वजह से है। लोग साल भर बसों, निजी वाहनों या साधारण ट्रेनों पर निर्भर हैं। ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से जूझते दैनिक यात्री कहते हैं कि आधी सुविधा से पूरा फायदा नहीं मिल रहा। हालांकि, चल रहे हिस्से पर रोजाना 55-60 हजार यात्री सफर कर रहे हैं और कुल राइडरशिप 2 करोड़ पार कर चुकी है। इतनी अच्छी कमाई के बाद भी NCRTC अफसर अंतिम छोर तक रैपिड नहीं ला पा रहे हैं।