


विकलांगों के साथ निर्ममता पर उतारू अफसर, विकलांगों से अन्याय के नाम पर विकास, होश में आए विकलांग पार्क उजाड़ने वाले अफसर
नई दिल्ली/गाजियाबाद। विकलांगों का पार्क बचाने के लिए इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन ने हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर विकलांगों पर कहर बरपाने वाले अफसर बाज आएं वो शायद ये नहीं जानते कि विकलांग दुआ देते हैं तो खुशियों से घर भर जाता है, लेकिन इनकी बददुआ कहीं का नहीं छोड़ती। इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन ने प्रदेश के पहले “दिव्यांग पार्क” को वोटिंग पार्क को वोटिंग पार्क में बदलने के प्रस्ताव के विरोध में अभिभावकों और इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन का आंदोलन तेज हो गया है।
सभी वर्ग और संप्रदाय के लोग आए साथ
इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन के इस अभियान के समर्थन में सभी वर्ग और संप्रदाय के लोग साथ आए हैं। सबसे ज्यादा साथ स्कूली बच्चों का मिल रहा है।दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों ने पार्क को बचाने की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया तथा पोस्टर व बैनर के साथ जागरूकता मार्च निकालकर प्रशासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की गुहार लगाई।
अफसरों को नहीं एनजीटी का खौफ
इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा त्यागी और महासचिव महिपाल सिंह ने बताया कि 19 दिसंबर की रात, अभिभावकों के विरोध और ग्रेप-4 की पाबंदियों के बावजूद पार्क में अवैध रूप से खुदाई कराई गई थी। अफसरों को शायद एनजीटी का भी खौफ नहीं। अभिभावकों और आईपीए के कड़े विरोध के बाद कार्य को रोकना पड़ा, लेकिन आज तक पार्क को पहले जैसी अवस्था में बहाल नहीं किया गया है। इस कारण अभिभावकों और दिव्यांग बच्चों में यह आशंका बनी हुई है कि किसी भी समय पुनः कार्य प्रारंभ किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह पार्क केवल मनोरंजन स्थल नहीं, बल्कि दिव्यांग बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में इसे व्यावसायिक गतिविधियों के लिए वोटिंग पार्क में बदलना मानवता और संवेदनशील शासन के सिद्धांतों के विपरीत है “हम किसी भी स्थिति में इस पार्क को दिव्यांग बच्चों के अधिकारों से छीनने नहीं देंगे।
राष्ट्रपति पीएम व सीएम से गुहार
इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा त्यागी ने बताया कि आवश्यकता पड़ी तो हम महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी मुलाकात कर अपनी बात रखेंगे।” अफसरों को मनमानी बंद करनी होगी। जब प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री स्वयं दिव्यांगजनों के हितों को लेकर संवेदनशील हैं, तो प्रशासन को भी उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए इस निर्णय को रोकना चाहिए। यह आंदोलन दिव्यांग बच्चों के अधिकार, सम्मान और समान अवसरों की रक्षा के लिए है और अभिभावकों का संकल्प है कि वे अपने बच्चों का यह हक हर हाल में सुरक्षित रखेंगे।