संघ जैसा नहीं कोई दूसरा संगठन

kabir Sharma
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मेरठ व ब्रज प्रांत के जनों से संवाद तथा गोष्ठी, डा. मोहन भागवत बोले दुनिया में संघ जैसा नहीं कोई दूसरा संगठन, संघ की स्थापना क्यों थी जरूरी बताया

मेरठ। दुनिया में राष्ट्रीय स्वयं संवक संघ सरीखा कोई दूसरा संगठन नहीं है। यह बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख डा. मोहन भागवत ने कही। डा. भागवत मेरठ प्रवास के दूसरे दिन प्रमुख जन गोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि संघ की तुलना किसी से नहीं हो सकती क्योंकि संघ जैसा कोई दूसरा है ही नहीं। संघ की शाखा एवं संचलन को देखकर कोई सोचता है कि संघ कोई पैरा मिलिट्री संगठन है लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि संघ व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है और शाखा में व्यक्ति के हर पक्ष के विकास और निर्माण की प्रक्रिया को मूर्त रूप दिया जाता है। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना से पूर्व देश की परिस्थिति हसे आप सब परिचित ही हैं। डॉ. हेडगेवार के सम्बन्ध एवं सम्पर्क बाल गंगाधर तिलक, मदन मोहन मालवीय, सुभाष चन्द्र बोस, वीर सावरकर, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद अर्थात ऐसे सभी लोगों से थे जो उस समय देश की आजादी के आन्दोलन के साथ-साथ देश में व्याप्त कुरीतियों से लड़ रहे थे और देश के भविष्य की चिन्ता कर रहे थे।

डा. हेडगेवार का विचार भी था समान

ऐसे में इन सबका जो विचार था वही डॉ. हेडगेवार का विचार था। अक्सर चिन्तन का विषय होता था कि हम बार-बार पराधीन क्यों हो रहे हैं। सभी के विचारों का एक मात्र आशय रहता था कि हम अपरे स्व को भूल गए जिस कारण हम बंट गए, अनेक कुरीतियां आयीं, कई असमानताएं समाज में व्याप्त हुईं इसलिए डॉ. हेडगेवार ने विचार किया कि समरस, संगठित, अनुशासित हिन्दू समाज का संगठन ही सभी समस्याओं का समाधान है।

भारत में निवास करने वाले सभी हिंदू

उन्होंने कहा कि भारत में जो भी निवास करता है वह हिन्दू है। हमारे मत, पन्थ, पूजा पद्धति अलग हो सकती है लेकिन हम सब हैं हिन्दू ही। हिन्दू का मतलब जोड़ना, सबके हित के विषय में विचार करना, सबके कल्याण की कामना करना इतना ही नही ंहम सम्पूर्ण धरती पर जीव-जन्तु, चर-अचर तथा ब्रहमांड के कल्याण की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो सौ वर्षों में भारत में इतने महापुरूष हुए हैं उतने दुनिया के किसी भी देश में नहीं हुए। यह हमारे लिए प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि विविधता हमारे देश का स्वभाव रहा है लेकिन हम इतिहास को देखें तो इन सबके बावजूद भी हम एक साथ मिलकर एक राष्ट्र में रह रहे हैं। हमारे पूर्वज जानते थे कि बाहर सुख मिलता नहीं, अन्दर किसी ने खोजा नहीं, इसीलिए आध्यात्मिक रूप से उन्होंने इस तत्व को समझा और अपने देश के विषय में कहा कि विविधता मिथ्या है और एकता सत्य है।

स्वयंसेवकों की दृढ़ संकल्प शक्ति

उन्होंने कहा कि संघ को सौ वर्ष पूर्ण हो गए। इन सौ वर्षों में संघ ने प्रतिबन्ध भी झेला, झूठी हत्याओं के आरोप भी लगे, राजनीतिक विरोध भी झेलना पड़ा, स्वयंसेवकों की हत्याएं भी हुईं, अत्यंत अभाव भी देखा लेकिन स्वयंसेवकों की दृढ़ संकल्प शक्ति, असीम इच्छा शक्ति के चलते अपने आप को बचाते हुए आज अनुकूलता के काल में हम आए हैं और स्वयंसेवक समाज जीवन के अनेक क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। शताब्दी वर्ष में हमने सोचा कि समाज के पास जाएं और संघ के विषय में उनकों बताएं। उन्होंने आवहान किया कि संघ तो कार्य कर ही रहा है आप सब समाज की सज्जन शक्ति हैं आप भी राष्ट्र उत्थान के लिए प्रयत्नशील रहें।

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दूसरे सत्र में जिज्ञासा समाधान

दूसरे सत्र में जिज्ञासा समाधान करते हुए डॉ. भागवत ने अनेक प्रश्नों के उत्तर दिए, शिक्षा पर बजट बहुत कम है, शिक्षा सबके लिए सुलभ कैसे हो सकती है, इस प्रश्न का उत्तर देते हुए डॉ भागवत ने कहा बजट बढ़ाने का काम सरकार का है, लेकिन संघ का मत है कि शिक्षा सभी के लिए सुलभ हो। प्राचीन काल में भी आप देखते हैं कि समाज के सहयोग से अनेक विद्यालय चलते थे, आज भी हमें वैसे ही परस्पर सहयोग और संस्कार की आवश्यकता है कि समाज बिना सरकारी सहायता के वंचितों को शिक्षित करे।

एक राष्ट्र एक शिक्षा एक स्वास्थ्य नीति हो

एक अन्य प्रश्न समानता लाने के लिए एक राष्ट्र-एक शिक्षा तथा एक राष्ट्र-एक स्वास्थ्य नीति की आवश्यकता है इस पर संघ का क्या विचार है, इस प्रश्न का उत्तर देते हुए सर संघचालक ने कहा कि एक शिक्षा नीति है, एक स्वास्थ्य नीति भी है और इसमें क्षेत्रीय आवश्कताओं को दृष्टिगत् रखते हुए कुछ विषय जोड़ने की भी छूट है, लेकिन इसे लागू करना राज्यों का विषय है। इसलिए संघ का प्रयास है कि ऐसी विषयों पर एक राय बने और समाज में एकरूपता आए। एक अन्य प्रश्नकर्ता द्वारा पूछा गया कि आदर्श मूल्यों के क्षरण का क्या कारण है और संघ पर इसका क्या मत है। डॉ. भागवत ने इसका उत्तर देते हुए कहा कि सबसे पहले मूल्य आधारित शिक्षा लागू करनी होगी। समाज को संस्कारयुक्त वातावरण देना होगा। समृद्धि होना अच्छी बात है किन्तु वेदों में कहा गया है आप भरपूर कमाएं, लेेकिन अपनी जरूरत के हिसाब से रखते हुए शेष समाज हित में प्रयोग करें।

समाज का विघटित करने वालों से रहे सावधान

एक अन्य प्रश्न में पूछा गया कि संघ सामाजिक समरसता पर कार्य कर रहा है लेकिन आज भी राजनीतिक दल जाति देखकर टिकट देते हैं, ऐसे में संघ का क्या मत है, इस पर उत्तर देते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि संघ इस क्षेत्र में अत्यंत गहनता से कार्य कर रहा है, जो भी तत्व समाज को विघटित करने वाले हैं उनसे सावधान होना होगा और वह यह तभी करते हैं जब समाज ऐसा होता है। इसलिए हमें अपने व्यवहार में समरसता लानी होगी। समाज का वतावरण बदलना होगा और यह भाषण नहीं वरन् करने से होगा। यदि आप संघ को समझते हैं तो देखेंगे कि संघ में जाति विस्मरण होता है।

विषय वस्तु विवेक पर निर्भर

प्रश्नकर्ता द्वारा पूछा गया कि ओटीटी प्लेटफार्म पर अश्लील विषय वस्तु समाज को संस्कार रहित करने का प्रयास कर रही है इसका उत्तर देते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि विषय वस्तु देखना हमारे विवेक पर निर्भर करता है। ओटीटी पर रामायण एवं हनुमान चालीसा भी है।

डा. प्रमोद कुमार ने रखी प्रस्तावना

इससे पूर्व कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए क्षेत्र कार्यवाह डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि यह प्रमुख जन गोष्ठी समाज जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों मे नेतृत्व करने वाले लोगों केे बीच हमारा विषय जाए इस हेतु रखी गयी है। आप सामाजिक चेतना के विषयों से जुड़े और भारत को पुर्नवैभव पर पहुंचाने का कार्य करें।

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कार्यक्रम अध्यक्ष पदम्श्री भारत भूषण त्यागी जो कि जैविक खेती करने वाले कृषक हैं ने कहा कि संघ की पंच परिवर्तन की संकल्पन समाज में परिवर्तन ला रही है। यह विषय इतने गम्भीर हैं जो जन-जन से जुड़े हैं। उन्होंने खेती में रासायनिक पदार्थो के प्रयोग पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्वास्थ्य एवं पर्यावरण दोनों के लिए अत्यंत हानिकारक है। इसलिए हमें इसके प्रयोग को वर्जित करना होगा उन्होंने संघ कार्य की सरहाना करते हुए कहा कि मैं अपना शेष जीवन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ को समर्पित करता हूॅ।

भौतिक उन्नति पर्याप्त नहीं

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि चोटीपुरा गुरूकुल की संस्थापिका डॉ.उ सुमेधा आचार्य ने कहा कि मुझे प्रसन्नता है आज हम विकसित राष्ट्र बनने की संकल्पना को साकार की ओर हैं लेकिन हमें ध्यान रखना होगा केवल भौतिक उन्नति किसी भी राष्ट्र के लिए अच्छी नहीं होती इसलिए भौतिक विकास के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति भी उतनी ही आवश्यक है। आज समूचा विश्व बहुत चुनौतियों से जूझ रहा है। जिसमें पर्यावरण, नैतिकता का पतन, मानसिक अवसाद और सामाजिक विघटन प्रमुख हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इन सब मुद्दों पर काम कर रहा है। यह अत्यंत ही सराहनीय है।
कार्यक्रम में एकल गीत का वाचन शिरीश कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन बृज प्रान्त के सम्पर्क प्रमुख प्रमोद कुमार द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन मेरठ के विभाग सम्पर्क प्रमुख निपुण अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम में कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, सामाजिक संगठनों के प्रमुख व अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।

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