“बरसाने की राधा गोरी रे रसिया”, श्याम के हाथ कनक पिचकारी, राधा के हाथ कमोरी रे रसिया। घर-घर से ब्रज बनिता आई, कोई श्यामल कोई गोरी रे रसिया। उड़त गुलाल लाल भए बादल, मारत भर-भर झोरी रे रसिया।
आज बिरज में होरी रे रसिया…
श्रीधाम वृंदावन में होली खेल रहे बांके बिहारी, देश और दुनिया से पहुंच रहे लाखों, ब्रज की होली देखने वालों के आगे इंतजाम हुए धड़ाम
नई दिल्ली/श्रीधाम वृंदावन। ब्रज की होली की यदि बात करें तो होली का रंग सबसे ज्यादा वृंदावन में ही चढ़ता है। यूं तो बरसाना, नंदगाव, मथुरा सभी जगह होली के रंग की इन दिनों धूम है, लेकिन जहां तक बांके बिहारी के भक्तों और श्री लाडली जी के चरणों की रज चाहने वालों की बात है तो उनका मेला तेा इन दिनों श्रीधाम वृंदावन में ही लगा है। श्रीधाम में बीते 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा, जिसे वृंदावन में होली उत्सव की औपचारिक शुरुआत माना जाता है। इस दिन बांके बिहारी मंदिर के समेत पूरे बृंदावन में विशेष आयोजन होते हैं।
अखिल विश्व बृंदावन में
होली उत्सव का रंग देखने और खुद को उसमें सराबोर करने के लिए लाखों लोग देश और दुनिया से श्रीधाम पहुंचते हैं। हाल यह हो जाता है कि सभी होटल व धर्मशाला तथा आश्रमों पर हाउस फुल का बोर्ड लग जाता है, लेकिन रंग रसिया के भक्त सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे ही डेरा डाल लेते हैं, उन्हें बृंदावन की होली में जो शामिल होना होता है। वृंदावन की होली का मुख्य स्थल तो बांके बिहारी का मंदिर है। वहां की होली सात जन्मों के पुण्य को देने तथा पापों क्लेश विशाद को हरने वाली है।
यहां भी होली की धुम
बांके बिहारी मंदिर के अलावा इस्कॉन मंदिर, गोविंद मंदिर, निधिबन समेत पूरे वृंदावन में जितने भी आश्रम हैं उन सभी में तथा अन्य सभी मंदिरों के अलावा बृंदावन के बाजारों में भी होली की धूम नजर आती है। इसीलिए देश और दुनिया से लोग सारे काम धंधे छोड़कर होली के मौके पर वृंदावन आने का प्रयास करते हैं।
तमाम इंतजाम धड़ाम
होली के मौके पर प्रशासन और पुलिस की ओर से तमाम इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन रंग रसिया के साथ वृंदावन में होली खेलने के लिए जब भक्तों का महासमुद्र उमड़ना शुरू होता है तो तमाम इंतजाम धरे के धरे रह जाते हैं। हालांकि अधिकारियों का प्रयास होता है कि किसी को कोई असुविधा ना हो, लेकिन रंग शुरू होने के साथ ही पूरा वृंदावन रंग बिरंगा हो जाता है। इसलिए प्रशासन की ओर से ताकिद की जाती है कि बच्चों और बुजुर्गों का खास ख्याल रखें। उनके साथ बने रहें और वृंदावन की होली का आनंद लें।