टीजी-2 रामगोपाल राणा की मौत , विरोध स्वरूप प्रदर्शन पर किए बड़े स्तर पर तवादले, सदर कोतवाली का किया घेराव
नई दिल्ली/नोएडा/लखीमपुर खीरी। गढ़ी पावर हाउस पर तैनात टीजी-2 रामगोपाल राणा की हार्ट अटैक से हुई मौत ने पूरे बिजली विभाग को झकझोर दिया। सहकर्मियों का आरोप है कि अधीक्षण अभियंता ब्रह्मपाल की कथित प्रताड़ना इस दुखद घटना की बड़ी वजह बनी। इसी आरोप को लेकर बिजली कर्मियों ने सदर कोतवाली का घेराव किया और नई बस्ती पावर हाउस पर धरने पर बैठकर कार्रवाई व बर्खास्तगी की मांग उठाई। मृतक के बहनोई महादेव के अनुसार, “शुक्रवार देर रात बंद कमरे में हुई बैठक में रामगोपाल राणा को कड़ी फटकार लगाई गई। वे देर रात घर पहुंचे, पूरी रात सो नहीं सके। सुबह तड़के उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।”
अधीक्षण अभियंता को करो अरेस्ट
घटना के बाद कर्मचारियों में भारी आक्रोश दिखा। उन्होंने अधीक्षण अभियंता की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि इस विरोध से नाराज़ प्रबंधन ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय सख्त प्रशासनिक कदम उठाए।
जबरन स्थानांतरण का आरोप
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड द्वारा जारी कार्यालय आदेशों में प्रदर्शन में शामिल बताए जा रहे टीजी-2 कर्मियों और कार्यालय सहायकों का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर दिया गया। आदेश में उन्हें वर्तमान तैनाती से कार्यमुक्त कर नई इकाइयों में जॉइन करने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह कार्रवाई “आवाज़ उठाने की सज़ा” के रूप में की गई है। आदेश के मुताबिक कई कर्मचारियों को लखीमपुर से सैकड़ों किलोमीटर दूर अन्य जनपदों/क्षेत्रों में भेजा गया है। साथ ही ईआरपी पर कार्यमुक्त करने के निर्देश भी तत्काल प्रभाव से लागू किए गए।
कर्मचारियों में रोष
बिजली कर्मियों का कहना है कि वे अपने साथी की मौत के लिए न्याय की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रबंधन ने उनकी मांग सुनने के बजाय उन्हें ही दंडित कर दिया। कर्मचारियों के बीच यह संदेश गया है कि यदि वे किसी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएंगे तो उन्हें भी ऐसी ही कार्रवाई झेलनी पड़ सकती है। इस पूरे मामले में विभागीय उच्चाधिकारियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, कर्मचारियों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषी पर कार्रवाई हो और स्थानांतरण आदेश वापस लिए जाएं।
कार्यालय आदेशों ने बढ़ाया विवाद
यूपीपीसीएल मीडिया के हाथ लगे मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के दो अलग-अलग कार्यालय आदेश (दिनांक 27.01.2026) इस पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ देते हैं। इन आदेशों में स्पष्ट रूप से उन टीजी-2 कर्मचारियों व कार्यालय सहायकों के नाम दर्ज हैं, जो लखीमपुर खीरी में तैनात थे और कथित तौर पर प्रदर्शन में शामिल रहे। आदेश में लिखा है कि “प्रशासनिक आवश्यकता के दृष्टिगत” उन्हें उनकी वर्तमान तैनाती इकाई से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करते हुए अन्य इकाइयों में स्थानांतरित किया जाता है।
आदेशों में कहा गया है कि कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से वर्तमान तैनाती से कार्यमुक्त किया गया। ईआरपी पर कार्यमुक्त करने के स्पष्ट निर्देश।कई कर्मचारियों को लखीमपुर खीरी से हटाकर बरेली, रायबरेली, अयोध्या, सीतापुर जैसे दूरस्थ जनपदों में भेजा गया। आदेश में यह भी अंकित है कि यदि कोई कर्मचारी निर्धारित समय पर नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण नहीं करता, तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।Relieving/Joining की सूचना नियत तिथि तक मुख्यालय को भेजने के निर्देश। इन दस्तावेजों से कर्मचारियों का यह आरोप मजबूत होता दिख रहा है कि यह स्थानांतरण सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि विरोध प्रदर्शन का परिणाम है। रामगोपाल राणा की मौत ने जहां विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं विरोध करने वाले कर्मचारियों के तबादले ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या प्रबंधन संवेदनशीलता दिखाते हुए कर्मचारियों की मांगों पर विचार करेगा, या यह विवाद और गहराएगा।