“Board of Peace” पर किए साइन, कई देशों ने किया था विरोध, “Board of Peace” में शामिल होने से काटी कन्नी
नई दिल्ली/दाबोस। ग्रीनलैंड पर आखिरकार अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप को बैकफुट पर आना ही पड़ा। दरअसल यूरोप के कई देशें ने उन्हें धमकी जो दे दी थी। इसके अलावा अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने “Board of Peace” का चार्टर साइन किया है, लेकिन कई देशों ने फीस की बात कहकर इससे कन्नी काट ली है।प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान अपने नए और विवादास्पद पहल “Board of Peace” काे उन्होंने साइन किया है।
गाजा व यूक्रेन वार सुलझाने का दावा
बकौल डोनाल्ड ट्रंप “Board of Peace” दुनिया के झगड़ों को सुलझाने का काम करेगा। हालांकि कई देश ऐसा नहीं मानते हें। हालांकि ट्रंप की मानें तो दुनिया के तमाम झगड़ों जिसमें गाजा और रूस यूक्रेन जंग भी शामिल है, को सुलझाने के लिए बनाया गया है, लेकिन इसमें परमानेंट मेंबरशिप के लिए 1 बिलियन डॉलर (लगभग 8,300 करोड़ रुपये) की भारी भरकम फीस है। ट्रंप ने इसे “युद्ध खत्म करने का बड़ा कदम” बताया है, लेकिन कई देशों ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है, जैसे फ्रांस ने कहा कि ये UN रेजोल्यूशन से मेल नहीं खाता।
ग्रीनलैंड पर ट्रंप का यूटर्न
दुनिया के लिए सबसे राहत भरी बात यह है कि ट्रंप जो ग्रीनलैंड को लेकर जिद्द पर अड़े थे, उन्होंने अब ग्रीनलैंड पर यूटर्न ले लिया है। बताया जाता है कि NATO सेक्रेटरी जनरल के साथ मीटिंग के बाद टैरिफ वापस ले लिया और “फ्यूचर डील का फ्रेमवर्क” तैयार होने की बात कही। ग्रीनलैंड और डेनमार्क वाले अभी भी संशय में हैं कि ये डील आखिर क्या है। इससे पहले यूरोपीय देशों पर टैरिफ की धमकी दी थी और “मालिकाना हक” की बात की, लेकिन अब उनका रवैया बदला है।
जेलेंस्की से मिटिंग
ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी मीटिंग की, जहां जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन-रूस युद्ध खत्म करने के डॉक्यूमेंट्स “लगभग तैयार” हैं, और ट्रंप ने बोला “सब चाहते हैं कि वॉर खत्म हो”।ये खबरें ग्लोबल मार्केट्स, यूरोप-अमेरिका रिलेशंस और मिडिल ईस्ट-यूक्रेन पर सीधा असर डाल रही हैं – स्टॉक मार्केट में रिकवरी आई है टैरिफ हटने से, लेकिन क्रिटिक्स इसे ट्रंप की “पैसे से शांति” वाली पॉलिसी कह रहे हैं।