किसी भी कीमत पर चाहते हैं लड़ाई खत्म हो, अपने ही देश में हो रही है किरकिरी, बुर्ज खलीफा तक पहुंची ईरानी मिसाइलें
नई दिल्ली। ईरान से लड़ाई छेड़कर अमेरिका के प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप फंस गए हैं। वह घड़ी की चौथाई में लड़ाई खत्म करना चाहते हैं। इस बीच खबर है कि बुर्ज खलीफ के बिलकुल समीप ईरानी मिसाइल आकर गिरी है। जी सेवन देशों का अब ट्रंप पर एकतरफ युद्ध विराम का दबाव है। ईरानी कमांडर इस वक्त लीड लिए हुए हैं। यदि ट्रंप पीछे हटते हैं तो फिर इजरायल की उनसे ठननी तय है। यह युद्ध फरवरी के अंत में शुरू हुआ (28 फरवरी को सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या के साथ), और अब 14वें दिन में प्रवेश कर चुका है। ट्रंप प्रशासन इसे “शॉर्ट-टर्म एक्सक्यूशन” या “फिनिश द जॉब” बता रहा है, लेकिन ग्राउंड रियलिटी अलग है।अमेरिका क्यों फंसा हुआ लग रहा है? और ईरान इस लड़ाई को अपनी शर्तों पर खत्म करने पर अड़ा हुआ है। सबसे बड़ी शर्त परमाणु संवर्धन से जुड़ी है। इसी के चलते अमेरिका ईरान के साथ चल रही जंग में काफी हद तक फंस गया दिख रहा है,लेकिन ग्राउंड रियलिटी अलग है। केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि इजरायल और गल्फ में जिन देशों ने अमेरिका को सैन्य ठिकानों के लिए जगह दी है वो भी बेइंतहा परेशान हैं। उनकाे समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें।
ट्रंप की परेशानी की वजह
ईरान के साथ चल रही लड़ाई की असली वजह वो तेल है जिसके लिए लड़ाई छेड़ी दूसरी वजह ईरान में सत्ता परिवर्तन ये दोनों ही काम खुद को सुपर पावर मानने वाले ट्रंप नहीं कर पाए। उल्टेयुद्ध से तेल की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं (Brent $100+ के ऊपर), ग्लोबल मार्केट्स प्रभावित हैं। ट्रंप ने स्ट्रैटेजिक रिजर्व से लाखों बैरल तेल रिलीज किया है, लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था और पोल नंबर्स पर असर पड़ रहा है। इन तमाम बातों ने अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की नींद उड़ा कर रख दी है। सबसे बड़ी मुसीबत अमेरिकन फौज की सही और सटीक लाेकेशन की जानकारी ईरान तक पहुंच रही है और ईरान सटीक मार मार रहा है।
अमेरिकन में बढ़ रही नाराजगी
इस लड़ाई में अब तक करीब दर्जन भर अमेरिकी फौजी मारे गए और डेढ सौ के घायल होने की खबर है। इससे आम अमेरिकन में ट्रंप को लेकर जबरदस्त नाराजगी है। ट्रंप की पॉपुलैरिटी गिर रही है, और कई एडवाइजर्स उन्हें जल्द एग्जिट रैंप (बाहर निकलने का रास्ता) ढूंढने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन मुश्किल यह है कि ईरान नहीं चाहता कि जब तक उसकी शर्तें ना मानी जाए तब तक लड़ाई खत्म हो। हालात यह है कि अमेरिका अब गिड़गिड़ाने की स्थिति में है। दरअसल में ईरान इसे अस्तित्व की लड़ाई मानता है। नए सुप्रीम लीडर (मोजतबा खामेनेई) और प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन ने 3 शर्तें रखी हैं—न्यूक्लियर राइट्स, कोई फ्यूचर अटैक की गारंटी, और रिपेयरेशन (मुआवजा)। ट्रंप अगर नहीं मानते तो युद्ध नहीं रुकेगा। इस वक्त केवल ट्रंप ही नहीं पूरी दुनिया इस लड़ाई और ईरानियों के हौसलों से परेशान है।
बदला लेने पर उतारू ईरानी कमांडर
ईरानी कमांडर देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत का बदला लेने पर उतारू हैं। वो बार-बार कहते हैं कि वो तो खुद मौत को ढूंढ रहे हैं, लेकिन मौत उनसे डरकर भाग रही है। खामेनेई की मौत के बाद IRGC के 31 प्रॉविंशियल कमांड्स ऑटोनॉमस हैं—कोई सिंगल लीडर आसानी से रोक नहीं सकता। ईरान इन्हीं के बूते दस साल तक लड़ाई की बात कर रहा है। ऐसी बातें ट्रंप की नींद उड़ा रही हैं।