बढ़ रही हैं ट्रंप की मुश्किलें

kabir Sharma
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ट्र्रंप प्रशासन के शीर्ष अफसर का इस्तीफा, बोला ईरान “कोई खतरा नहीं है”, कई पूर्व अफसरों ने भी की निंदा, मित्र देशों ने भी ईरान पर हमला बताया गैर जरूरी

नई दिल्ली। शांति और समझौता वार्ता के बावजूद ईरान पर एयर स्ट्राइक करने वाले यूएस के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का खराब वक्त खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। यूरोपीयन यूनियन और नॉटो देशों के बाद अब उनके खुद अपने देश में उन पर भारी दबाव हैं। दरअसल में  अमेरिका के शीर्ष आतंकवाद विरोधी अधिकारी जो केंट ने यह कहते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया कि ईरान “कोई खतरा नहीं है”।यह कोई पहला इस्तीफा नहीं है। इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन के कई अफसर ईरान नीतियों को लेकर इस्तीफा देकर ट्रंप को कठघरे में खड़ा कर चुके हैं। अमेरिका प्रशासन के कई पूर्व अफसर भी ईरान नीति को लेकर ट्रंप की कठोर शब्दों में नींदा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर ईरान ने अपने दो शीर्ष कमांडरों अली लारीजानी और गुलाम रेजा सलमानी की मौत का बदला लेने की कसम खाई है। इसके बाद इजराइल ने तेहरान और बेरूत पर हमले तेज कर दिए हैं।

दोस्तों को धमका रहे हैं ट्रंप

ईरान के साथ चल रही लड़ाई में कमजोर पड़ रहे अमेरिका की मदद से यूरोपीयन यूनियन और नॉटो देशों द्वारा साथ आने से इंकार कर देने के बाद ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने संघर्ष में सैन्य सहायता देने में अनिच्छा दिखाने के लिए नाटो सहयोगियों के साथ-साथ जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया पर भी जमकर निशाना साधा है। उन्होंने यहां तक कह दिया है कि नॉटो खत्म हो जाएगा। इस बीच अब ट्रंप के तमाम सहयोगी ईरान नीति को लेकर उनकी कड़े लहजे में नींदा कर रहे हैं।

यूएस दूतावासों की चिंता

ईराक की राजधानी बगदाद में यूएस दूतावास पर ईरानी मिसाइलों के बड़े हमले के बाद अब ट्रंप के सामने विदेशाें में मौजूद अमेरिकी दूतावासों की चिंता बड़ा सवाल बना हुआ है। विदेश विभाग ने सभी अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को आपातकालीन कार्रवाई समितियों का गठन करके अपनी सुरक्षा व्यवस्था का तत्काल मूल्यांकन करने का आदेश दिया है।

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