व्यापार संगठन ने दिया ज्ञापन

व्यापार संगठन ने दिया ज्ञापन
Share

व्यापार संगठन ने दिया ज्ञापन, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन के अध्यक्ष विपुल सिंघल व महामंत्री नवीन अग्रवाल ने प्रदेश भाजपाध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी को विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि मेरठ विकास प्राधिकरण के मास्टर प्लान के अंतर्गत जन साधारण के लिए संचालित मण्डपों/ टेंट हाउस/ बैंक्वेट हॉल के मानचित्र पास कराये जाने हेतु बनाई गयी नियमावली के अंतर्गत सूत्र स्थापित किया गया है जिसके अनुसार मण्डपों / टेंट हाउस / बैंक्वेट हॉल के क्षेत्रफल का ध्यान नहीं दिया गया है जबकि इसके क्षेत्रफल के आधार पर मानचित्र पास कराये जाने की आव्यशकता है कारण कि 200 वर्ग मीटर हो या 20000 वर्ग मीटर हो क्षेत्र फल के हिसाब से एवं उसमे आने वाले ग्राहक जो कि क्षेत्र के हिसाब से माने जाएं इनको आधार मानते हुए मानचित्र पास किये जाने के मानक निर्धारित किये जाए। प्रस्तावित महायोजना 2031 में कुछ सड़क की दी गई रोड वाइड़निंग पर आपत्ती है क्योंकि इससे मेरठ का विकास रुकता नजर आ रहा है। मेरठ की मूल भाग की प्रस्तावित रोड वाइडनिंग जैसे बागपत रोड, दिल्ली रोड, हापुर रोड, गढ़ रोड जो मेरठ का दिल भी कहा जा सकता है वहां 45 मीटर ,45 मीटर, 30 मीटर तथा 45 मीटर दर्शाई गई है। सड़क की इतनी चौड़ाई शहर के बीचोबीच घनी आबादी वाले क्षेत्र में वास्तविकता में किया जाना नामुमकिन ही नहीं असंभव सा प्रतीत होता है। इतनी अधिक रोड वाइडनिंग मौजूदा बने पक्के मकानों एवं दुकानों पर एक तलवार की भांति लटकी रहेगी। यह रोड वाइंडिंग महायोजना 2021 में भी दर्शाई गई थी और 20 साल बीत जाने के बाद भी आज तक विभाग द्वारा किसी भी स्थान पर रोड वाइड़निंग इतना किया जाना संभव नहीं हो पाया है, और ना ही आगे कभी भविष्य में हो पाएगा। प्रस्तावित महायोजना में दर्शाई गई रोड वाइडनिंग से वहां पर बने व्यवसायिक, रिहायशी व पुराने मकानों में बसे व्यापारियों व आम जनता को कैंसर की भांति लाइलाज समस्या देने का काम करेगी। दर्शाई गई रोड वाइडनिंग के कारण विभाग को इन सड़कों पर पड़ने वाले सभी मकान, दुकान व पुराने निर्माणों को तोड़ना पड़ेगा जो संभव नहीं होगा। संस्था सदस्यों का आपसे निवेदन है कि मेरठ शहर के इस भाग में जो मेरठ की रिंग रोड के अंदर आता है वहां पर रोड वाइडनिंग को 30 मीटर से कम अथवा जहां पर जितनी मौके पर उपलब्ध है उतना किया जाना आवश्यक है। मौके पर मौजूद सड़क को ही उस स्थल की रोड वाइडनिंग माना जाए।
3. मेरठ की प्रस्तावित महायोजना 2031 में व्यवसायिक भूमि का क्षेत्रफल नहीं बढ़ाया गया है। मेरठ के अनेकों भागों में समय के चलते कई स्थानों पर व्यवसायिक कार्य होने लगे हैं | पिछले 20 सालों में किसी भी सड़क पर व्यवसायिक स्थलों को बंद कराकर रिहायशी बनाने की कोई मुहिम नहीं चलाई गई है और ना ही चलाई जा सकती है | मेरठ के मुख्य मार्ग जैसे बागपत रोड, दिल्ली रोड, हापुड़ रोड, गढ़ रोड, रुड़की रोड अथवा अन्य जितने भी मुख्य मार्ग मेरठ को दूसरे शहरों से जोड़ते हैं उन मुख्य मार्गों पर व्यवसायिक कार्य हो रहे हैं तथा उनका होना स्वाभाविक भी है | मुख्य मार्गों पर व्यवसायिक कार्य होने से शहर का विकास भी होता है और लोगों को रोजगार भी मिलता है | मेरठ के सभी मुख्य मार्गों को निर्मित अथवा रिहायशी दर्शाया गया है | संस्था सदस्य आपसे निवेदन करते है कि मेरठ के जीरो माइल स्टोन बेगमपुल से लेकर अन्य शहरों को जोड़ने वाले मार्ग जैसे दिल्ली रोड, गढ़ रोड, बागपत रोड, रुड़की रोड, मवाना रोड, किला रोड तथा अन्य सड़कों को मेरठ की आउटर रिंग रोड तक अथवा मेरठ के जीरो माइल स्टोन से 15 किलोमीटर की दूरी तक सड़क के दोनो ओर व्यवसायिक भू-उपयोग किया जाना अनिवार्य है।  शहर के अंदरुनी प्रमुख बाजार जैसे सर्राफा बाजार, खेरनगर दवा बाजार, खंदक, बजाजा स्थित कपड़ा बाजार, हार्डवेयर, किराना बाजार, अनाज मंडी, कबाड़ी बाजार, जत्तीवाडा एवं बुढ़ाना गेट पेपर मार्किट आदि में खुदरा व थोक बाजार संचालित हो रहा है जिनको नियमित किया जाना अति आवश्यक है। इंडस्ट्रियल क्षेत्र कम होने के कारण पिछले 20 वर्षों में छोटे-छोटे इंडस्ट्रियल एरिया विकसित हो गए हैं, उदाहरण के तौर पर साईं पुरम इंडस्ट्रियल एरिया दिल्ली रोड, राजवंश विहार इत्यादि। इन सभी इंडस्ट्रियल एरिया का भू-उपयोग प्रस्तावित महायोजना 2031 में रिहायशी रखा गया है। निवेदन किया कि जिस स्थिति में यह इंडस्ट्रियल क्षेत्र मेरठ के लिए आय का सोत्र तथा शहरवासियों के रोजगार का माध्यम बने हुए हैं उनका स्थानंतरण / हटाया जाना लगभग असंभव है। इन परिस्थितियों को देखते हुए मेरठ में बने / विकसित हुए इंडस्ट्रियल एरिया जितने भी जहां पर भी हैं उन्हें चिन्हित कर इंडस्ट्रियल एरिया घोषित कर नियमित किया जाना चाहिए ।
महायोजना में आवासीय अथवा निर्मित भू-उपयोग दर्शाए जाने पर विभाग के कर्मियों द्वारा वहाँ पर बने व्यवसायिक स्थलों का उत्पीड़न होता है | शिकायतकर्ताओं द्वारा इस विभागीय त्रुटि का लाभ उठाया जाता है और वह उनकी विभाग में शिकायत करके भ्रष्टाचार एवं उगाई को बढ़ावा देते हैं | निर्माण जो व्यवसायिक हैं ना ही बंद कराए जा सकते हैं ना ही ध्वस्तीकरण किये जा सकते हैं | ऐसे में मेरठ की जनता एवं व्यापारियों को डर की स्थिति में रखना न्याय संगत नहीं है | नियमों में महायोजना के अन्तर्गत प्रत्येक 10 साल में बदलाव लाना इसीलिए आवश्यक है कि जो निर्माण पुराने हैं और तोड़े नहीं जा सकते तथा वहाँ पर किसी प्रकार का बदलाव लाना संभव प्रतीत नहीं होता है उनको न्याय संगत उनका नियमित करना न्याय उचित होगा | मानचित्र भवन अनुसार पास न होने की स्थिति में अधिकांश भवनों को अग्नि शमन प्रमाण पत्र नहीं मिल पाता है | निवेदन किया गया है की उपरोक्त बिन्दुओं के सुझाव को महायोजना 2031 में सम्मलित हो। इस मौके पर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन के अध्यक्ष विपुल सिंघल व महामंत्री नवीन अग्रवाल मौजूद रहे।


Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *