दुनिया के कई देशों ने बताया गलत, अमेरिका में भी हो रही ट्रंप की फजीहत, सीज फायर के लिए है गिड़गिड़ा रहा US
नई दिल्ली/वाशिंगटन।ईरान से लड़ाई मोल लेकर अमेरिका बुरी तरह से फंस गया है। वह घड़ी की चौथाई में सीज फायर चाहता है, लेकिन ईरानी सीजफायर को तैयार नहीं। अमेरिका खुद तो फंसा उसने इजरायल को भी फंसा दिया। इजरायल के तमाम एंटी मिसाइल सिस्टम धर के धरे रह गए हैं। इजरायल के अलावा गल्फ में जहां-जहां अमेरिका ने फौजी बेस बनाए थे वो मुल्क भी खुद को मुसीबत में फंसा मान रहे हैं और इसके लिए डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया जा रह है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका के भीतर भी ट्रंप की विदेश और युद्ध नीति की कठोर शब्दों में आलाेचना की जा रही है।
US के सामने ईरान में चुनौतियां अपार
ईरान को जमीनी जंग की धमकी दे रहे अमेरिका के सामने ईरान में चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। भले ही अमेरिकी आर्मी सुपीरियरिटी है, लेकिन ग्राउंड इनवेजन नहीं, लंबे युद्ध में फंसने का खतरा। ट्रंप की “no clear plan” वाली आलोचना हो रही है। अब इस लड़ाई में अमेरिका और उसके साथी जबरदस्त नुकसान उठा चुके हैं। उन्हें भारी मुसीबत अपने देश में भी उठानी पड़ रही है। लड़ाई 28 फरवरी को शुरू हुई थी। उससे पहले ओमान की मध्यस्थता में अच्छी बातचीत चल रही थी, लेकिन अमेरिका व इजरायल ने एयर स्ट्राइक कर दी। उसकी भी आलोचना की जा रही है। जब US और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले शुरू किए, मुख्य रूप से ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को नष्ट करने और रिजीम चेंज के लक्ष्य से। अब यह युद्ध दूसरी हफ्ते में प्रवेश कर चुका है।
US को सीज फायर की दरकार
ईरान को सीज फायर के लिए धमकाने वाले अमेरिका को इस वक्त खुद सीज फायर की दरकार है, लेकिन यह बात वह कह नहीं सकता। वह सीज फायर के लिए बुरी तरह परेशान है। ईरान की नयी-नयी मिसाइलें उसके लिए मुसीबत बनी हैं। हालांकि US-इज़राइल की तरफ से तेहरान समेत ईरान के कई इलाकों पर लगातार भारी बमबारी हो रही है। मीडिया रिपोर्ट बता रही हैं कि 7वें-8वें दिन भी तेहरान में बड़े विस्फोट हुए, धुआं उठ रहा है, और हमले तेज हो गए हैं। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इज़राइल, US बेस (गल्फ देशों में), और अमेरिकी कंपनियों पर ड्रोन-मिसाइल अटैक किए हैं। इराक के बसरा में US तेल कंपनी Halliburton पर ड्रोन अटैक, अबू धाबी में US एयर सेंटर पर हमला। अमेरिका और इजरायल को इस तरह से ईरान से करारे जबाव की उम्मीद नहीं थी।
कुटनीतिक चालें
ईरान और अमेरिका दोनों ही एक दूसरे को मात देने के लिए अब कूटनीतिक चालों पर उतर आए हैं। दोनों एक दूसरे की चालाें को समझ भी रहे हैं। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने पड़ोसी देशों से माफी मांगी है और कहा है कि अब उनके क्षेत्र से हमला नहीं होगा, जब तक वहां से ईरान पर अटैक न हो। लेकिन US ने इसे डी-एस्केलेशन नहीं माना, बल्कि ट्रंप ने इसे सरेंडर जैसा बताया और “unconditional surrender” की मांग की। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह अभियान 4-6 हफ्ते चलेगा। ट्रंप ने कहा है कि आज (7 मार्च) ईरान को “very hard” मारा जाएगा, और कुछ नए क्षेत्रों/ग्रुप्स को टारगेट करने पर विचार हो रहा है। दरअसल दोनों ही देश एक दूसरे पर अब मनोवैज्ञानिक तरीके से काबू पाना चाहते हैं। ईरान के हौसले कम होते नजर नहीं आ रहे हैं। चीन और रूस से मदद जगजाहिर है। हालांकि अमेरिकी हमले में ईरान में मासूम बच्चों के मारे जाने का सिलसिला जारी है।