मालिकाना हक डिसाइड नहीं, हजारों करोड़ किया जा रहा है खर्च, तो क्या स्थानीय अफसर लखनऊ को कर रहे हैं गुमराह
मेरठ। गढ़ रोड के नई सड़क स्थित खसरा संख्या 6041 को लेकर अभी मालिकाना हक तय नहीं है और नगर निगम तथा स्थानीय प्रशासन के अफसर इस जमीन पर हजारों करोड़ खर्च करने पर उतारू हैं। इस जमीन के असली मालिक अलीगढ़ के रूप किशोर माथुर के नाम से यह जमीन अभी किसी अन्य या नगर निगम के नाम पर नहीं चढ़ी है, उसके बाद भी निगम व स्थानीय प्रशासन के अफसर इस पर अंधाधुंध खर्च करने पर अमादा हैं। यह मामला एसडीएम मेरठ की कोर्ट में केस नंबर 6831/2021 लंबित है और हाईकोर्ट ने एसडीएम की कोर्ट को यह आदेश दिया है कि मामले का शीघ्र से शीघ्र निपटारा किया जाना चाहिए।
मरने से पहले वसीयत
अलीगढ़ निवासी रूप किशोर माथुर का निधन साल साल 2021 में निधन हुआ है। मरने से पहले उन्होंने मुकेश माथुर व दो अन्य के नाम वसीयत कर दी बतायी जाती है। जिनके नाम वसीयत की गयी है वो सभी हाईकोर्ट में इस आश्य से गए कि जमीन को लेकर जो केस एसडीएम मेरठ की कोर्ट में चल रहा है उसको जल्द डिसाइड किया जाए और उनका नाम खसरा खतौनी में चढ़ाया जाना चाहिए। दरअसल एसडीएम की कोर्ट में इस जमीन का केस अरसे से लंबित है। जिनके नाम वसीयत बतायी जा रही है उनका कहना है कि ना जाने किन कारणों से यह केस डिसाइड नहीं किया जा रहा है। जब तक केस डिसाइड नहीं हो जाता तब तक खसरा खतौनी में नाम नहीं चढ़ सकता।
यह है पूरा मामला
नई सड़क स्थित खसरा संख्या 6041 अरसे से खाली पड़ा था। इस जमीन को लेकर तमाम तरह की बातें की जाती रही हैं। कई बार इसको लेकर आवास विकास ने भी मालिकाना हक जताए जाने की बात सामने आती रही है। इसके बड़े हिस्से पर अवैध कब्जे तक कर लिए गए। कुछ प्रभावशाली लोगों ने वहां दुकान व मकान तक बना लिए। अरसे पहले यहां नगर निगम ने अभियान चलाकर अवैध कब्जों को हटवा दिया था। और चाराओं टीन की चादरें लगा दी थीं। उसके बाद यहां नगर निगम का शहर घंटाघर स्थित ऑफिस शिफ्ट किए जाने की बातें सुनने में आयी और इस पर काम भी शुरू करा दिया गया। यह बात अलग है कि जिस भवन का निर्माण किया जा रहा है उसका मानचित्र तक स्वीकृत नहीं कराया गया है। इस मामले में अब तक आवास विकास परिषद की ओर से भी नोटिस दिया जा चुका है। लेकिन इन तमाम बातों से तब तक कोई सरकार नहीं जब तक नगर निगम को इस जमीन का मालिकाना हक तक नहीं मिल जाता। जब नगर निगम के पास जमीन का मालिकाना हक नहीं है और मामला कोर्ट में लंबित है तो फिर किस बूते निगम के अफसर यहां हजारों करोड़ खर्च कर रहे हैं। या फिर यह मान लिया जाए कि लखनऊ में बैठे अधिकारियों को गुमराह किया जा रहा है। वजह चाहे कुछ भी हो, लेकिन जो हो रहा है उसको सही नहीं ठहराया जा सकता है।
आवास विकास परिषद भी रूकवा चुका है काम
मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित नई सड़क पर नगर निगम के निर्माणाधीन नए कार्यालय भवन के कार्य को आवास विकास परिषद ने रोक दिया है। परिषद की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध रूप से किए जा रहे निर्माण को रुकवाया, क्योंकि इस निर्माण के लिए पूर्व अनुमति या उचित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था। नवंबर 2023 के आसपास आवास विकास की टीम ने शास्त्रीनगर नई सड़क पर नगर निगम के भवन निर्माण स्थल पर पहुंचकर काम रुकवाया। तब बताया गया था कि उक्त स्थान पर हो रहे निर्माण को लेकर तकनीकी या अनुमति संबंधी मुद्दे थे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि सुप्रीमकोर्ट के साफ निर्देश हैं कि इस क्षेत्र के पास शास्त्रीनगर में 1468 अवैध निर्माणों को चिन्हित किया गया है, और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार अवैध निर्माणों को चरणबद्ध तरीके से ध्वस्त करने का अभियान भी चल रहा है।