सुप्रीमकोर्ट के सभी निर्माण ध्वस्त करने के आदेश, आदेशों के बाद भी हो गए निर्माण, कौन है कांग्रेस नेता जो करा रहा प्लाटिंग
मेरठ। छावनी के बोम्बे बाजार शिव चौक के सामने स्थित बहुचर्चित बंगला 210-बी जिसके सभी अवैध निर्माण ध्वस्त किए जाने के सुप्रीमकोर्ट के आदेश हैं, लेकिन इसके बाद भी वहां जो अवैध निर्माण ध्वस्त किए जाने से एक हादसे के बाद बाकि रह गए उनको शोरूम में ना केवल तब्दील कर दिया गया, बल्कि उनसे हर माह लाखों का किराया भी वसूला जा रहा है, लेकिनद स्थिति इससे भी ज्यादा खराब है। इस बंगले में अब प्लाटिंग की जा रही है। और यह प्लाटिंग कांग्रेस का एक हाशिये पर पड़ा रजबन निवासी नेता कुछ बिल्डरों के साथ मिलकर करा रहा है। इस सब से कैंट अफसर या तो बेखबर हैं या फिर नीचे का स्टाफ उन तक यह खबर नहीं पहुंचने दे रहा है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इस बंगले में कई गैराज मालिकों ने पीछे तक की जमीन घेर ली है। इसी तर्ज पर जो होटल चला रहे हैं उन्होंने भी जमीन घेर ली है। उन्होंने तो घर को ही होटल में तब्दील कर दिया है।
सुप्रीमकोर्ट की अवमानना में फंसेंगे अफसर
दरअसल इस बंगले के सभी अवैध निर्माण ध्वस्त किए जाने के आदेश सुप्रीमकोर्ट के हैं, लेकिन बजाए ध्वस्तीकरण करने के 210-बी में कुछ लोगों के द्वारा बड़े स्तर पर निर्माण भी किए गए और वहां पर अब प्लाटिंग की जा रही है। यह तमाम बातें सुप्रीमकोर्ट की लिहाज से अवमानना के दायरे में आती हैं। सुप्रीमकोर्ट के आदेश की अवमानना में जो भी अफसर जब भी फंसे हैं उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है।
डीईओ बड़ी कार्रवाई की तैयारी में
210-बी में जो कुछ चल रहा है उसकी रिपोर्ट स्टॉफ ने डीईओ को दी है। जानकारों की मानें तो डीईओ इस बंगले में बड़ी कार्रवाई कराने जा रहे हैं। कुछ दिन पहले भी डीईओ के कहने पर कैंट बोर्ड ने बंगले में कुछ भूमाफियाओं द्वारा तामीर किए गए पिलर गिरा दिए थे। कैंट बोर्ड की वो कार्रवाई भूमाफियाओं के लिए किसी झटके से कम नहीं थी। माना जा रहा है कि एक बार फिर उसी तर्ज पर यहां कार्रवाई की तैयारी है।
210-बी के बारे में कब क्या हुआ
बंगला 210-बी ओल्ड ग्रांट का आवासीय बंगला है। जीएलओ में यह पुष्पादेवी आदि के नाम दर्ज है। इस बंगले में 96 कोठियां हैं इसके अलावा भी कई अन्य अवैध निर्माण हैं जिनमें 210-बी के साउथ, सैंटर व पूर्वी साइड में निर्माण कोर्ट ने माने। पूर्व का निर्माण साल 2016 में ध्वस्त किया जा चुका है। साल 1994 में इस बंगले में बड़े स्तर पर अवैध निर्माण कराए गए। बताया जाता है कि उसी दौरान आनंद प्रकाश अग्रवाल ने पुष्पा देवी से अपनी पत्नी मीनू अग्रवाल ने नाम पावर ऑफ अर्टानी करा ली थी। आरोप है कि आनंद प्रकाश अग्रवाल ने 210-बी का स्टेट फ्री होल्ड बताकर वहां प्लाटिंग शुरू कर दी। तमाम लोगों ने मौके की जगह जानकार वहां प्लाट खरीदे और बाद में पक्के अवैध निर्माण भी किए। अदालत ने सभी निर्माण अवैध माने। साल 1994 में कैंट बोर्ड ने नोटिस दिए। नोटिस के खिलाफ आनंद प्रकाश अग्रवाल ने लोअर कोर्ट से स्टे हासिल कर लिया। इसके खिलाफ कैंट बोर्ड हाईकोर्ट चला गया। 19 अप्रैल 1995 में हाईकोर्ट ने कैंट बोर्ड और आनंद प्रकाश अग्रवाल को यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी कर दिए, लेकिन आरोप है कि आनंद प्रकाश अग्रवाल ने हाईकोर्ट के स्टे के खिलाफ जाकर बड़े स्तर पर अवैध निर्माण कराए। साल 1995 में डीईओ ने एक मुदकमा भारत सरकार के बिहाफ पर करा दिया यह बात अलग है कि उसकी पैरवी करना बाद के डीईओ अफसर भूले रहे। हालांकि इस दौरान कैंट अफसर अवैध निर्माणों को लेकर लगातार नोटिस देते रहे। बाद में जब यह मामला सुप्रीमकोर्ट में पहुंच गया और जो एसएलपी दायर की गई थी वो भी खारिज हो गयी और ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए, जिसके बाद साल 2016 में कैंट अफसरों की संयुक्त कार्रवाई में 210-बी पर बड़ी कार्रवाई कैंट प्रशासन ने की थी। जो अवैध निर्माण बाकि रह गए थे, उन पर अभी जेसीबी चलनी बाकि है, लेकिन जेसीबी जहां चलनी चाहिए वहां यदि दुकानों पर शटर लग जाते हैं। कच्चे निर्माण पक्के हो जाते हैं तो सवाल डीईओ और सीईओ दोनों से सप्रीमकोर्ट पूछ सकता है।
वर्जन
इसको लेकर सीईओ कैंट व डीईओ के अलावा कैंट बोर्ड के ओएस व डीईओ आफिस के एसएसओ से उनका पक्ष जानना चाहा, लेकिन अभी कोई उत्तर नहीं मिला। यदि वो अपनी बात कहते हैं तो इतनी ही प्रमुखता से उनकी बात को स्थान दिया जाएगा।