
हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान कैसे हो गई इतनी मौतें, इंदौर में दूषित पानी पीने से मचा हा-हाकार, कई की हालात नाजुक, अस्पतालों में दौड़े लोग
नई दिल्ली। देश के सबसे साफ शहर का दम भरने वाली सरकार लोगों को सबसे गंदा पानी पिला रही है। इतना ही नहीं इसको लेकर एक सवाल पर भाजपा के बड़े नेता ने ऐसा क्या कह दिया जो उन्हें बाद में सॉरी बोला पड़ा और मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से लोगों की मौत पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर रिपोर्ट तलब कर ली है। इससे पूरी सरकार में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं दूषित पानी से पूरा इंदौर त्राहि-त्राहि कर रहा है। लोग डबल इंजन की सरकार से सवाल पूछ रहे हैं और सरकार के नुमांइदे सवाल पूछने वालों से अभद्रता पर उतरे हैं। मामला इंदौर में दूषित पानी पीने से 13 की मौत से जुड़ा है। हालांकि बाद में सॉरी भी बोल रहे हैं। इंदौर-एक से विधायक और शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जब मीडिया ने मौतों की जिम्मेदारी और व्यवस्थाओं पर सवाल किए, तो वे भड़क उठे। एक सवाल पर वह बुरी तरह से भड़क गए। यहां तक ऑन कैमरा कह दिया कि “फोकट प्रश्न मत पूछो” और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद मंत्री ने खेद जताते हुए माफी मांगी। उन्होंने कहा कि गहरे दुख में उनके शब्द गलत निकल गए। कांग्रेस ने इसे अहंकार बताया और मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।
देश के सबसे स्वच्छ शहर की स्याह हकीकत
देश की रैकिंग में जो शहर सबसे स्वच्छ माना जाता है नए साल के पहले दिन उसके दावों की पोल खुल गई। इंदौर में दूषित पेयजल ने कहर बरपा दिया है। भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा जल आपूर्ति पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवेज का गंदा पानी मिल गया, जिससे उल्टी-दस्त की महामारी फैल गई। कई लोगों की मौत हो चुकी है, विपक्ष का दावा है कि मौतों की संख्या बीस तक जा सकती है। इनमें एक 6 महीने का मासूम बच्चा और कई महिलाएं शामिल हैं। बीते सप्ताह यहां दो हजार से ज्यादा लोग बीमार पड़े। शहर के तमाम अस्पताल मरीजों से भरे हुए हैं। आज लोग कांग्रेस की बघेल सरकार को याद कर रहे हैं।
जिंदगी की कीमत दो लाख
कांग्रेस के नेताओं ने राज्य की भाजपा सरकार पर बरसते हुए कहा कि यह मामला सिस्टम के फेलियर का है।सूबे के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना को गंभीर बताते हुए जांच कमेटी गठित की है और प्रभावित परिवारों को 2 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की है। कुछ अधिकारियों को निलंबित और बर्खास्त भी किया गया है। महज दो लाख रुपए को कांग्रेस ने जिदंगी की कीमत दो लाख लगाने का भी आरोप लगाया है। कांग्रेस ने प्रभावित परिवारों को बीस-बीस लाख देने की मांग की है। इस बीच, घटना पर राजनीतिक बवाल भी मच गया है। हालांकि प्रभावित इलाके में टैंकरों से पानी सप्लाई शुरू की है और लोगों को नल का पानी उबालकर पीने की सलाह दी है। हाईकोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया है और रिपोर्ट मांगी है।