कौन हैं वो जिन्होंने डाला है आशियाना में डेरा, बोर्ड के पूर्व CEO और डोर टू डोर के ठेकेदार क्यों हैं इतने परेशान, ऑडिट में CDA की सख्ती क्यों
मेरठ। कैंट बोर्ड में जबरदस्त अफरा-तफरी का आलम है। ये अफरा-तफरी CDA का ऑडिट शुरू होने के बाद नजर आ रही है। इसके अलावा वो कौन-कौन हैं जिनके माल रोड स्थित आशियाना गेस्ट हाउस में डेरा डाल दिए जाने की चर्चा है। इन दोनों की ऐसी भी क्या मजबूरी है जो ऑडिट शुरू होने के बाद दोनों को यहां आना पड़ गया। वजह जो भी हो, लेकिन वजह खास है और बड़ी भी है जो दोनों बड़े लोगों को ऑडिट के दौरान यहां आना पड़ गया।
ये तीन फाइलें बनी है मुसीबत
CDA के ऑडिट को लेकर अफरा-तफरी की वजह तीन फाइलें सुनने में आयी हैं। ये वो फाइलें बतायी जा रही हैं जिनका ऑडिट करीब पिछले पांच सालों से नहीं कराया जा सका। फिर ऐसा क्या है इन फाइलों में जो इतने सालों से इनको CDA की ऑडिट टीम की नजरों से दूर ही रखा गया, लेकिन किसी एक शिकायत के बाद ऑडिट टीम की नजरें जब इन तीनों फाइलों पर पड़ी तो उन्होंने तलब कर लीं। हालांकि यह भी पता चला है कि CDA की ऑडिट टीम तक ये तीनों फाइलें अभी तक पहुंची नहीं हैं। इन तीन फाइलों में डोर टू डोर ठेके की फाइल, इसके अलावा डोर टू डोर ठेकेदार को करीब एक साल पहले किए गए लगभग डेढ़ करोड़ के पेमेंट की फाइल ओर सबसे बड़ी मुसीबत जिस फाइल को माना जा रहा है वो है मैनफोर्स ठेकेदार को किए गए एक करोड़ के पेमेंट और उसमें से 42 लाख रुपए की बैंक गारंटी काे ना काटे जाने की फाइल। इसके अलावा भी एक फाइल रजबन फुटबाल मैदान में बनाए गए MRF की है। इन फाइलों में जरूर ऐसा कुछ है जिसको CDA की ऑडिट टीम की नजरों से बचाए जाने की कोशिश की जा रही हैं।
क्यों नहीं याद ही CBI की हिदायत
कैंट बोर्ड के घपले घोटालों की जांच कर रही CBI की टीम ने हिदायत दी थी कि तमाम दस्तावेजों की भली प्रकार जांच किए जाने के बाद ही कोई पेमेंट किया जाए, लेकिन ठेकेदार को खुश करने की जल्दबाजी में लगता है कि CBI की नसीहत और हिदायतों को बिसरा दिया गया। बगैर तमाम दस्तावेजों को देखे उसको डेढ़ करोड़ करीब का पेमेंट कर दिया गया। अब जो पेंमेंट कर दिया गया है, वो वापस तो आने से रहा, लेकिन हां इतना जरूर है कि CBI की हिदायतों का याद ना रखकर पेमेंट का कर दिया जाना मुसीबत मोल लेना सरीखा साबित हो सकता है।
क्या होगा ऑडिट के बाद
जिन फाइलों के बेपर्दा होने के डर से अभी तो बस अफरा-तफरी मची हैं उन फाइलों के CDA की ऑडिट टीम के हाथों में पहुंचने के बाद यदि वो सब बाहर आ गया जिसको छिपाने की मारामारी है तो क्या होगा। क्या उससे कैंट बोर्ड में हंगामा बरपा हो जाएगा। वैसे सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि अब ऐसा क्या हो गया कि जिन फाइलों पर पिछले कई सालों ने नजरें इनायत थीं उन फाइलों पर अचानक आंखें लाल कर क्यों देखने लगे। खैर वजह कुछ भी हो लेकिन आने वाले दिन इन फाइलों की वजह से खैरियरत भरे ना रहें।