विनेश विद्यार्थी डाल रहे हैं रिट, उपश्रमायुक्त की ठेकेदारी प्रथा के खिलाफ दी गई रिपोर्ट बनेगी मुसीबत, क्यों नहीं खत्म की जा रही निगम से ठेकेदारी प्रथा
मेरठ। स्थायी व नियमित प्रकृति के नगर निगम के कार्य के लिए ठेकेदारी प्रथा के जरिये कर्मचारियों को रखे जाने का मामला अब अधिकारियों के गले की फांस बनता जा रहा है। इसकी बड़ी वजह उपश्रमायुक्त की वो जांच आंख्या 3/6/2017 तथा 17 फरवरी साल 2023 है, जिसमें नगर निगम के सफाई कर्मियों की ठेकेदारी को गैर कानूनी करा दिया गया है। नगर निगम में कर्मचारियों की ठेकेदारी प्रथा खत्म किए जाने की मांग अरसे से की जा रही है। सैद्धांतिक रूप से निगम प्रशासन इसको स्वीकार भी कर चुका है और इसको लेकर शासन से निर्देश या कहें कि गाइड लाइन भी मांगी थी।
महापौर ने की थी स्वयं सीएम से पैरवी
महापौर हरिकांत अहलूवालिया स्वयं इस मामले को लेकर सीएम योगी से मिल चुके हैं। जिसके बाद शासन ने इस मुददे पर सहमति प्रदान करते हुए नगर निगम के अफसरों से प्रस्ताव भेजने को कहा, लेकिन बजाए प्रस्ताव भेजने के निगम प्रशासन ने यूटर्न ले लिया। साल २०१६ के किसी शासनादेश का हवाला देते हुए ऐसा करने में असमर्थता तक जाहिर दी। इससे सबसे ज्यादा झटका उन सफाई कर्मचारी नेताओं को लगा जो दशकों से इसकी कानूनी लड़ाई लड़ थे। हिंद मजदूर सभा मेरठ जिला काउंसिल इसको लेकर काफी प्रयास कर रही थी, लेकिन नगरायुक्त के यूटर्न के बाद अब हिंद मजदूर सभा ने इस मामले को लेकर निगम अफसरों को हाईकोर्ट में घसीटने की तैयारी कर ली है। मजदूर सभा के मंंत्री विनेश विद्यार्थी ने बताया कि इसको लेकर हाईकोर्ट में रिट याचिका डाली जा रही है।
भाजपा के मंत्री व सांसद के सामने प्रस्ताव
संविदा सफाई कर्मचारियों की ठेकेदारी प्रथा के खिलाफ नगर निगम में प्रस्ताव २० जून २०२३ को उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री डा. सोमेन्द्र तोमर, तत्कालीन लोकसभा सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, कैंट विधायक अमित अग्रवाल, एमएलसी धर्मेन्द्र भारद्वाज व निगम बोर्ड की मौजूदगी में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि निगम से ठेकेदारी प्रथा खत्म करने की अब केवल औपचारिकता मात्र रह गई है। इस प्रस्ताव को शासन की मंजूरी के लिए नगर आयुक्त नगर निगम मेरठ द्वारा उ प्र शासन को पत्र और अनुस्मारक लिखें गए, लेकिन जब शासन ने प्रस्ताव मांगा गया तो यूटर्न ले लिया गया। विनेश विद्यार्थी का कहना है कि हिंद मजदृर सभा निगम अफसरों के रवैये से आवाक है।
निगम अफसरों की हीलाहवाली
उन्होंने बताया कि प्रश्नगत प्रस्ताव को लागू कराने में नगर निगम और उ प्र शासन पटल पर लगातार हीलाहवाली की जा रही है। इस संबंध में कमिश्नर के पत्र के बाद भी नगर निगम प्रशासन सफाई कर्मियों की समस्याओं के निस्तारण के लिए लिखें गए पत्र पर कार्रवाई न करने की शिकायत तमाम स्तरों पर की जा चुकी है। विनेश विद्याथी व दूसरे कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि यह खुली तौर पर श्रम कानूनों का उल्लंघन है। हैरानी इस बात की है कि उपश्रमायुक्त की रिपोर्ट के बाद भी निगम से ठेकेदारी प्रथा का खत्म ना किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। विनेष विद्यार्थी का कहना है कि निगम अफसरों के रवैये के चलते ही हाईकोर्ट में रिट डाली जा रही है।