एक दूसरे के खिलाफ दे रहे हैं भड़काऊ बयान, शंकराचार्य के बाद अब सीएम ने किया हमला, शंकराचार्य को मिला विपक्ष का साथ
नई दिल्ली/सोनीपत। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बड़ा हमला किया है। हालांकि उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद का नाम तो नहीं लिया, लेकिन जो कुछ कहा उसका सीधा अर्थ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर बड़ा हमला ही लगाया जा रहा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विवाद के बीच के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को सोनीपत में कहा कि ऐसे तमाम कालनेमि होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे, हमें उनसे सावधान रहना होगा। सीएम योगी ने कहा, “एक योगी, एक संत के लिए, एक संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बड़ा कुछ नहीं है। उनकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी कुछ नहीं होती, धर्म ही उनकी प्रॉपर्टी, राष्ट्र ही उनका स्वाभिमान है। धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है, ऐसे लोगों से सतर्क रहें।” सीएम योगी के इस बयान को मौनी अमावस्या के दिन से प्रयागराज में चल रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।
माघ मेले से शुरू हुआ विवाद
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ यह विवाद प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शुरू हुआ ह है। मौनी अमावस्या को संगम में शाही स्नान के लिए जाते समय प्रशासन ने उन्हें रोका, उनके साथ कथित बदसलूकी हुई और बाद में मेला प्राधिकरण ने नोटिस जारी कर उनकी ‘शंकराचार्य’ पदवी पर सवाल उठाते हुए प्रमाण मांग लिया। यह घटना भाजपा शासित उत्तर प्रदेश सरकार के लिए बड़ा झटका साबित हो रही है, क्योंकि विपक्ष इसे सनातन धर्म और हिंदू संतों के अपमान से जोड़कर जोर-शोर से हमला बोल रहा है।
विपक्ष का तीखा हमला
अखिलेश यादव (सपा अध्यक्ष) ने इसे भाजपा की “विभाजनकारी सोच” और “अहंकार” करार दिया। उन्होंने लिखा कि “क्षमा याचना से कोई छोटा नहीं होता” और “भाजपा अधर्म कर रही है”। अखिलेश ने कहा कि शंकराचार्य का पूरा सम्मान होना चाहिए, लेकिन भाजपा सरकार साधु-संतों का अपमान कर रही है। कांग्रेस ने और भी कड़ा रुख अपनाया। पार्टी ने आरोप लगाया कि जो लोग पहले मुसलमानों से “कागज दिखाओ” कहते थे, वही अब हिंदू धर्म के सर्वोच्च संत से प्रमाणपत्र मांग रहे हैं। कांग्रेस ने इसे भाजपा के “दोहरे मापदंड” और “सनातन परंपराओं के खिलाफ” बताया। पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी से हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि यह “ना काम के, ना राम के” वाली सरकार है।
राम मंदिर से विवाद की शुरूआत
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पहले भी कई मुद्दों पर भाजपा सरकार की आलोचना की है। उन्होंने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को “अधूरा” बताना शुरू कर दिया। गौ-हत्या और अन्य धार्मिक मुद्दों पर सवाल उठाए। इन कारणों से विपक्ष का दावा है कि यह नोटिस और रोक राजनीतिक बदले की कार्रवाई है, न कि महज प्रशासनिक कदम। स्वामी ने खुद कहा कि न तो मुख्यमंत्री, न राष्ट्रपति, बल्कि केवल अन्य शंकराचार्य ही यह तय कर सकते हैं कि वे शंकराचार्य हैं या नहीं। इन कारणों से विपक्ष का दावा है कि यह नोटिस और रोक राजनीतिक बदले की कार्रवाई है, न कि महज प्रशासनिक कदम। स्वामी ने खुद कहा कि न तो मुख्यमंत्री, न राष्ट्रपति, बल्कि केवल अन्य शंकराचार्य ही यह तय कर सकते हैं कि वे शंकराचार्य हैं या नहीं।