नाराजगी उड़ा ना दे फ्यूज

kabir Sharma
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अंधाधुंध बिजली कटौती से नाराज लोगों ने खोला मोर्चा, सबसे ज्यादा कटौती घनी आबादी वाले मुस्लिम इलाकों में

मेरठ। तमाम कोशिश के बाद भी बिजली संकट दूर नहीं हो रहा है। शहर के कई इलाकों में कई बार फ्यूज उड़ा, जिस कारण लोगों को घंटों बिजली संकट से जूझना पड़ा। उमस भरी गर्मी में बत्ती गुल होने से लोग बेहाल हो गए। बिजली आपूर्ति सुधारने के नाम पर जितने दावे और छापे व मुकदमे सरीखी कार्रवाइयों की जा रही हैं बिजली सप्लाई की हालत उतनी ही खराब होती जा रही है। बीते तीन दिनों में शहर के अलग-अलग स्थानों पर बिजली को लेकर बवाल हो चुका है, लेकिन बिजली है कि नॉन स्टॉप आने को ही तैयार नहीं है। जिस तरह से अंधाधुंध बिजली कटौती की जा रही है उससे कभी भी लोगों की नाराजगी बिजली वालों का फ्यूज उड़ा सकती है। रिपोर्ट की मानें तो इस बार यदि कानून व्यवस्था की स्थिति खराब हुई तो वह बिजली आपूर्ति के मुद्दे पर होगी, क्योंकि गर्मी और उमस भरे इस मौसम में लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। सप्लाई में लंबी कटौती के चलते किसी एक इलाके में नहीं बल्कि शहर के तमाम इलाकों में सप्लाई ना आने की वजह से लोगों के घरों में इन्वर्टरों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। ईश्वर पुरी निवासी कांग्रेस के नेता खेमचंद पहलवान ने बताया कि जब पूरी रात बिजली नहीं आएगी तो इन्वर्टर चार्ज कहां से हो जाएंगे। ऊंचा सद्दीक नगर निवासी कारोबारी सलीम बताते हैं कि बिजली सप्लाई की जो हालत इस वक्त है, वैसी बुरी तो कभी भी नहीं रही। यह दशा तो तब है जब ऊर्जा मंत्री का यह गृह जनपद है। अब तक सपा और बसपा सरकार को बिजली संकट के लिए कोसा करते थे, लेकिन अब तक योगी राज में भी बिजली के झटके मिलने लगे हैं। लोग परेशान हैं। सबसे ज्यादा मुसीबत तो बच्चों की है। इस्माइल नगर निवासी डब्बू जो दूध की डेयरी चलाते हैं, उनका कहना है कि इन दिनों वायरल का प्रकोप है, घर-घर बच्चे बीमार हैं, ऐसे में बिजली संकट की वजह से बीमार बच्चे और भी ज्यादा चिड़चिड़े हो रहे हैं। इन्वर्टर चार्ज नहीं हो पा रहे हैं। हाथ पंखा कब तक झला जाएगा। कोतवाली के खारी कुंआ निवासी अरविंद कोशिक गुडडू का कहना है कि बिजली संकट के चलते ना तो घर पर चैन है और ना ही दुकान पर रूका जाता है। उन्होंने बताया कि सुभाष बाजार में उनकी स्टेशनी की दुकान है, वहां भी सप्लाई ना आने की वजह से हालत बद से बदत्तर बनी हुई है। मछेरान में रहने वाले खलील का कहना है कि सबसे बुरा हाल तो मुस्लिम बस्तियों का है। वहां सबसे ज्यादा कटौती की जा रही है। मुस्लिम इलाकों में कटौती के विरोध में हंगामा प्रदर्शन करते हुए भी डर लगता है क्योंकि पुलिस वाले तुरंत मुकदमे ठोक देंगे, इसलिए चुप रहना ही बेहतर समझते हैं। जो सब के साथ वो हमारे साथ। वो एक शेर सुनाते हैं: लगेगी आग तो आएंगे सब घर जद में यहां सिर्फ हमारा मकान थोड़े है।

लगातार हंगामा व प्रदर्शन

बिजली संकट से नाराज लोगों का लगातार हंगामा और प्रदर्शन चल रहा है। सबसे पहले ईश्वरपुरी के लोगों ने हंगामा किया। वहां पूरी रात लाइट गायब रही। अगले दिन करीब दस बजे कहीं जाकर सप्लाई चालू की गयी, लेकिन उसके भी वोल्टेज इतने डाउन थे कि पंखें सिर्फ घुम रहे थे, उनसे हवा नहीं आ रही थी। इसके बाद दिल्ली रोड स्टेशन के शारदा रोड बिजलीघर से जुड़े इलाकों में सप्लाई नहीं आयी तो वहां के लोगों ने हंगामा व प्रदर्शन किया। इस बिजलीघर से शहर के कई बड़े इलाके जुड़े हुए हैं। इसके बाद शहर घंटाघर से जुड़े रेलवे रोड व दूसरे इलाकों के लोगों ने बिजलीघर पर पहुंचकर हंगामा किया। रेलवे रोड पर बिजली आ रही थी, लेकिन वोल्टेज इतना नहीं था कि पंखे भी चल सकें। वहां कई घंटे तक हंगामा चला। उसी दौरान मेनका के समीप अचानक हाईटेंशन लाइन से चिंगारी निकलने से तीन लोग जो नीचे से गुजर रहे थे बुरी तरह झूलसे गए। इसके बावजूद कहीं अगले दिन जाकर सप्लाई आ सकी। अगले दिन एक बार फिर शारदा रोड बिजलीघर पर लोगों का हंगामा हुआ। बीते शुक्रवार को वैली बाजार के व्यापारी सड़कों पर उतर आए। उनका कहना था कि इस मौसम में बगैर लाइट के दुकान में बैठना तक मुश्किल हो रहा है। कारोबार तो वैसे ही नहीं है। यदि एक दो ग्राहक आ भी जाते है तो गर्मी बहुत है कहकर निकल जाते हैं। पूरे शहर में कई अन्य स्थानों पर ऐसे ही बवाल चल रहे हैं।

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