स्टांप घोटाले में जेल से बाहर आए आरोपियों को भेजा जेल, हाईकोर्ट से मिली जमानत के बाद इसी सप्ताह राहुल व अक्षय गुप्ता आए थे बाहर
मेरठ। स्टांप घोटाले में हाईकोर्ट से जमानत के बाद बाहर आए राहुल वर्मा और अक्षय गुप्ता को शनिवार को पुलिस ने दोबारा जेल भेज दिया। हालांकि इस बार किसी अन्य मुकदमें में उन्हें जेल भेजा गया है। परिजनों ने जानकारी दी कि हाईकोर्ट से करीब ढाई माह पूर्व जमानत मिल गई थी, लेकिन राहुल वर्मा पुत्र राजू वर्मा निवासी लोहिया नगर की ओर से जमानतियों का इंतजाम न होने की वजह से वो जेल से बाहर नहीं आ सका। बाद में हाईकोर्ट ने सिर्फ एक जमानती के ग्राउंड पर जेल से बाहर निकालने के आदेश दे दिए। राहुल वर्मा और अक्षय गुप्ता के अलावा एक विशाल वर्मा के एक तीसरे मुलाजिम राहुल पुत्र महेश निवासी माधवपुरम को भी हाईकोर्ट से जमानत मिल गयी, लेकिन माधवपुरम निवासी राहुल अभी अपने घर पर है। परिजनों ने बताया कि स्टांप घोटाले में ही पुलिस ने एक अन्य मुकदमा दर्ज कर अक्षय गुप्ता व राहुल वर्मा को शनिवार को जेल भेज दिया। सीओ सिविल लाइन ने बताया कि दोनों को एक अन्य मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया है।
ये था स्टांप घोटाला
साल 2024 में जिस स्टांप घोटाले की गूंज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही थी, उसकी आंच जब मेरठ पहुंची तो सबसे बड़ा घोटाला मेरठ में ही निकला और इसके सूत्राधार मंगलपांडे में आॅफिस चलाने वाले विशाल वर्मा निकले। उनके यहां स्टांप महकमे से जुड़े कई बड़े अफसरों का भी आना-जाना बताया जाता है। उसके यहां राहुल मुंशी का काम करते थे और अक्षय गुप्ता स्टांप वेंडर हैं। दूसरा सैकेंड गवाह के रूप में काम करता था। जब स्टांप घोटाले का खुलासा हुआ तो विशाल वर्मा के साथ-साथ राहुल वर्मा पुत्र राजू वर्मा निवासी लोहिया नगर और राहुल पुत्र महेश निवासी माधपुरम विशाल के यहां मुंशी थे। स्टांप घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने जब विशाल पर शिकंजा कसा और जांच की गई तो 997 बैनामों में विशाल वर्मा की मोहर पायी गयी। विशाल वर्मा के साथ ही राहुल, अक्षय व राहुल वर्मा को भी जेल भेज दिया गया था। करीब तीन माह पूर्व तीनों को हाईकोर्ट से जमानत मिल गयी। कागज होने में देरी की वजह से तीनों इसी सप्ताह जेल से बाहर निकल सके जिन्हें देर रात पुलिस ने उठा लिया और एक अन्य मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया। परिजनों ने बताया कि पुलिस की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
आज तक नहीं पता कहां छपे
स्टांप घोटाला सामने आने के बाद जिस एसआईटी का गठन किया वो भी आज तक यह पता नहीं कर सकी कि नकली स्टांप की कहां छपाई होती थी और कहां ये मशीन लगी थी। इसके अलावा अक्षय वर्मा जो स्टांप बेच रहा था, उसने एसआईटी को बताया कि वह सारे स्टांप ट्रेजरी से लाया करता था। यह बात लिखा पढ़ी में भी दर्ज है, इसके बाद भी ट्रेजरी के एक भी अफसर या आफिस के किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई आज तक नहीं की जा सकी है।