एमईएस ने शुरू की रिपेयर

kabir Sharma
5 Min Read
WhatsApp Channel Join Now

मेरठ। आर्मी स्कूल के सामने स्टेशन रोड की टूटी पुलिया की सोमवार को एमईएस ने मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। करीब दो सौ साल पुरानी यह पुलिया रविवार को अचानक धस गयी थी। उसके बाद आर्मी ने यहां से आने वाले वाले वाहनों पर सख्ती कर दी। सोमवार सुबह से यहां रोड के दोनों ओर आर्मी के जवानों ने माेर्चा संभाल लिया। आर्मी के जवानों के अलावा वहां सीएमपी भी तैनात कर दी गयी। स्टेशन रोउ के जिस हिस्से में पुलिया धंसी वहां दोनों ओर से आने जाने वाले वाहनों का रूट डायर्वट कर दिया गया। यहां तक कि पैदल भी किसी को आने जाने नहीं दिया जा रहा था। सुबह करीब नौ बजे एमईएस (मिल्ट्री इंजीनियरिंग सर्विस ) का स्टाफ पूरे तामझाम के साथ मौके पर पहुंच गया और स्टेशन रोड का डेमेज हुए पार्ट को तोड़कर उसकी मरम्मत का काम शुरू किया। हालांकि वहां किसी को भी आने जाने की इजाजत नहीं थी। लेकिन बताया गया है जहां से पुलिया डेमेज हुई और जिसकी वजह से वहां रोड बैठ गई, उस हिस्से को तोड़कर पहले पुलिया की मरम्मत की जाएगी। जहां से मिट्टी सरक गई है, पहले वहां मरम्मत की जाएगी। मिट्टी के बाहर एक मोटी कंकरीट की दीवार बनायी जा रही है ताकि भविष्य में इस प्रकार की कोई घटना ना हो, तब पुलिया यदि यूज के लायक नहीं हुई तो उसको भी नए सिरे से बनाया जाएगा। जब तक यहां का काम पूरा नहीं हो जाता, तब किसी को भी वहां से जाने की अनुमति नहीं होगी।

इन रास्तों ने निकले वाहन वाया पाइन कैंटीन माल रोड से चलकर कैंट स्टेशन की ओर जाने वाले वाहनों को आर्मी स्कूल के बराबर से 510 से होकर कैंट स्टेशन या कंकरखेड़ा की ओर भेजा गया। जो गाड़िया कंकरखेड़ा से आ रही थीं, उन्हें एनएच-58 वापस भेजा गया। जिनको कैंट स्टेशन जाना था केवल उन वाहनों को ही आने जाने की अनुमति थी। जहां रोड डेमेज हुई है वहां कोई आए जाए इसके लिए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। स्कूटी बाइक सवार कुछ ऐसे भी थे जो जवानों से उलझ रहे थे, लेकिन जब उनसे सख्ती से बात की गई उसके बाद उन्होंने डेमेज रोड की ओर जाने का इरादा बदल दिया। जवानों कहना था कि रोड डेमेज हुआ है आप लोग उसकी रिपेयरिंग करने दोगे या नहीं। रूट डायवर्ट किए जाने की वजह से आमतौर पर जिस ओर से कोई आता जाता नहीं था, 510 वाले इस रास्ते पर अचानक ही भारी ट्रेफिक पास होने लगा। वहां भी सीएमपी लगायी गयी थी। दरअसल सीएमपी 510 की सिक्योरिटी के मद्दे नजर तैनात की गयी थी। यहां यह भी बता दें कि इस रोड को जीई साउथ ( ग्रासिम इंजीनियरिंग साउथ ) भी बोला जाता है, लेकिन बोलचाल की भाष में एमईएस ही आमतौर पर कहा जाता है। वहीं दूसरी ओर पता चला है कि रविवार को जीई साउथ की जो टीम मौके पर मुआयना करने को आयी थी उसने अपनी रिपोर्ट सीडब्लूई कर्नल नीलकंदन बी को दी। माना जा रहा है कि काम निपटने के बाद वह मौके पर आ सकते हैं।

इतना पुराना है यह पुल

बताया जाता है कि साल 1803 में ब्रिटिश हुकूमत का आधिपत्य कायम करने के लिए अंग्रेजों ने मेरठ छावनी को बसाया था। यहां यह भी याद दिला दे कि मेरठ छावनी देश की टॉप टेन छावनियों में शुमार की जाती है। उस दौर में मेरठ छावनी बंगाल आर्मी का हिस्सा थी जिसका प्रांत बंगाल प्रेसीडेंसी के साथ ही पूरा उत्तर भारत था। सामरिक तौर पर मेरठ छावनी दिल्ली में बरतानिया हुकूमत के लिए मुफीद साबित भी हुई। इसके बाद ही ब्रिटिश ने पहाड़ों पर गोरखा और पंजाब में सिखों की बढ़ने का रास्ता भी बनाया। कुछ वक्त के बाद में मेरठ छावनी महत्वपूर्ण ब्रिटिश मिलिट्री स्टेशन बना और भारतीय उप-महाद्वीप में सबसे बड़े मिलिट्री स्टेशन के तौर पर भूमिका निभाई। हालांकि साल 1857 की क्रांति में अंग्रेजों उस वक्त मेरठ छावनी में थे उन्हें भारी नुकसान भी उठाना पड़ा था। मेरठ छावनी का काफी सृमद्ध इतिहास है, जिसका जिक्र फिर कभी।

- Advertisement -

WhatsApp Channel Join Now
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *