
जगह-जगह करा दिए अवैध कब्जे, अफसरों को नहीं ऑफिस से निकलने की फुर्सत, चल रहा है ठेकेदार के कारिंदों का समानांतर कैंट बोर्ड
मेरठ। छावनी इलाके में कैंट बोर्ड के तहबाजारी ठेकेदार के कारिंदे अपना समानांतर कैंट बोर्ड चला रहे हैं। इन्होंने पूरे छावनी इलाके में जगह-जगह अवैध कब्जे करा दिए हैं। ठेकेदार के कारिंदों ने छावनी के उन इलाकों को भी नहीं छोड़ा जो इलाके के सेना के ए-वन लैंड इलाके हैं। इन इलाकों में भी अवैध कब्जे करा दिए गए हैं। इससे सेना की गोपनीयता को गंभीर खतरे की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। सेना की गोपनीयता को इतना गंभीर खतरा होने के बाद भी कैंट बोर्ड के अफसरों को तहबाजारी के ठेकेदार के कर्मचारियों की जो जगह-जगह पर्चिंयां काटते हैं उनकी कारगुजारी देखने की फुर्सत तक नहीं। दरअसल इसके लिए कैंट बोर्ड के जिन अफसरों की जिम्मेदारी बनती है, उन्हें ऑफिस से बाहर निकल कर यह देखने की फुर्सत नहीं कि तहबाजारी की पर्ची काटे जाने के नाम पर ठेकेदार के लोग क्या गुल खिला रहे हैं। पूरे कैंट में इन्होंने कहां-कहां कब्जे करा दिए हैं। जिनको कब्जे कराए हैं वो कौन लोग हैं। महज थोड़े से पैसों के लालच में तहबाजारी के ठेकेदार के कारिंदे जो करा रहे हैं वो ठेके की नियम व शर्तों के भी विरूद्ध तो है ही साथ ही सेना की गोपनीयता व सुरक्षा को इससे कभी भी गंभीर खतरे की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
केवल तहबाजारी की पर्ची
जानकारों की मानें तो तहबाजारी के ठेके की शर्तों में साफ कहा गया है कि ठेकेदार केवल घूमते फिरते ठेले व रहड़ी व हॉकरों की तहबाजारी की पर्ची काट सकता है। इसके अलावा किसी को भी वह स्थायी रूप से किसी भी जगह खड़े होने की अनुमति नहीं दे सकता। पूरे छावनी इलाके में कहीं भी कोई भी स्थायी तौर पर ठीया नहीं जमा सकता। केवल चलते फिरते सामान बेच सकते हैं, लेकिन चंद सिक्कों के लालच में ठेकेदार के लोगों ने तमाम कायदे कानून ताक पर रख दिए हैं। तहबाजारी के ठेकेदार के काम की निगरानी की जिनकी जिम्मेदारी है, लगता है कि उन्हें कैंट बोर्ड ऑफिस से बाहर निकलने की ही फुर्सत नहींं है। माना जा रहा है कि इसी के चलते छावनी क्षेत्र में जगह-जगह ठेकेदार के कारिंदों ने अवैध कब्जे करा दिए हैं। जानकारों का कहना है कि जो कुछ चल रहा है उससे जितने गुनाहगार ठेकेदार के लोग हैं उससे ज्यादा कसूर रेवेन्यू सेक्शन का है।
भारत सरकार की जमीन पर कब्जे
तहबाजारी के ठेकेदार की कारगुजारियों की लंबी फेरिस्त है। छावनी के तमाम इलाकों में तहबाजारी के ठेकेदार के लोगों ने पक्के कब्जे करा दिए हैं। सुनने में आया है कि इसके लिए मोटी रकम ली गयी है। पक्के कब्जे कराने के नाम पर जिस रकम को लेने की बात कही जा रही है वो केवल ठेकेदार के कारिंदों की जेब में गई है या फिर ठेकेदार और रेवेन्यू सेक्शन के स्टाफ को भी उसमें हिस्सा मिला है, यह तो जांच के बाद ही पता चल कसता है, लेकिन इतना पक्का है कि खोखे रखवा कर सरकारी जमीनों पर कब्जे जरूर करा दिए हैं। आबूलेन आरके मोटर के पीछे फ्लेवर रेस्टोरेंट वाली रोड पर पार्किंग वाली साइड पर खोखे रखवा कर वहां सरकारी जमीन पर ठेकेदार के कारिंदों ने पक्का कब्जा कर दिया है। इसके अलावा पूरे छावनी इलाके में जितने भी फूड ट्रक खड़े होते हैं, बताया गया है कि उनकी बजाए तहबाजारी की पर्ची के महीना बांध लिया गया है। छावनी इलाके में आबूलेन हनुमान चौक सरीखे कई इलाकों में इस प्रकार के फूड ट्रक देखे जा सकते हैं जिनके बारे में कहा जा रहा है कि उनकी तहबाजारी की पर्ची के बजाए महीना वसूला जाता है।
महीने की वसूली के आरोप
काली पलटन बाबा औघड़नाथ मंदिर से मंदिर मार्ग की ओर जाने वाले रास्ते पर भी इसी प्रकार की एक टी ट्रक लगवा दिया गया है। इनसे महीना बाधा बताया जाता है। इससे सटे सरकुलर रोड पर हनुमान चौक से लेकर पंजाब सेंटर चौराहे तक एक साइड में ठेकेदार के कारिंदों ने अवैध मार्केट बसवा दिया है। यह इलाका सेना का ए-1 लैंड का इलाका कहलाता है। यहां सेना की गोपनीयता व सुरक्षा बेहद संवेदनशील मानी जाती है, लेकिन छोटे से लालच के लिए ठेकेदार के लोग बड़े खतरे को न्यौता देने पर अमादा हैं। जिस जगह की बात की जा रही है, वह जगह सेना के आफिसर्स की कालोनी मल्होत्रा एन्क्लेव से सटी है। इस अवैध बाजार की आड़ लेकर कोई भी देशद्रोही मल्होत्रा एन्क्लेव में जिन फौजी अफसरों के आवास हैं, उन पर आसानी से नजर रख सकता है। आबूलेन पर दास मोटर्स चौराहे के आसपास इसी प्रकार के फूड वैन देखे जा सकते हैं। अब तो तमाम लोग कहने लगे हैं कि छावनी इलाके में सरकारी जमीन की लूट और कब्जे की जो स्थिति अब नजर आती है, पहले कभी ऐसा नहीं देखा गया। यह तो ठेकेदार के लोगों की मानमानी और कैंट बोर्ड के इसके लिए जिम्मेदार स्टाफ की अकर्मणयता की पराकाष्ठा है। इसको लेकर कैंट बोर्ड के ओएस व प्रवक्ता जयपाल तोमर से जानकारी मांगी गयी लेकिन रिप्लाई नहीं मिला।