ईरान या रूस किस का सता रहा था डर, ऐन अल-असद एयर बेस अब इराकियों के कब्जे में, आईएसआईएस की जीत के रूप में है देखा जा रहा
नई दिल्ली/बगदाद। ईरान के चल रही तनातनी के बीच यूएस ने इराक से अपना बोरिया बिस्तर समेट लिया है। ईरान समर्थक इसको यूएस का इराक से भाग जाना बता रहे हैं। यूएस ने इराक का ऐन अल-असद एयर बेस (Ain al-Asad Airbase) को पूरी तरह से छोड़ दिया है। कर दिया है। यह सिलसिला 17-18 जनवरी 2026 में हुआ, जब इराकी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि अमेरिकी सेना ने बेस से पूरी तरह वापसी कर ली है और इराकी सेना ने इसका पूर्ण नियंत्रण संभाल लिया है। इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी और रक्षा मंत्रालय ने इसे सफल बापसी बताया है।
2003 से था कब्जा
यूएस का इराक के इस बेस पर साल 2003 से कब्जा था। आम इराकी इसको अपना अपमान मानता था और इराकी चाहते थे भी कि यूएस उनके देश से चला जाए। हालांकि शुरुआत में सितंबर 2025 तक पूर्ण वापसी का प्लान था, लेकिन सीरिया में हालात (असद शासन के पतन के बाद) के कारण 250-350 अमेरिकी सलाहकार और सपोर्ट स्टाफ बने रहे। अब वे भी चले गए हैं। इराक के फेडरल टेरिटरी (केंद्रीय क्षेत्र) से US-लीड कोलिशन की सभी सैन्य मौजूदगी खत्म हो गई है। हालांकि, उत्तरी इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र (एरबिल प्रांत में हरिर एयर बेस) में अमेरिकी सैनिक अभी भी मौजूद हैं, क्योंकि कुर्दिस्तान स्वायत्त है और इराकी केंद्र सरकार का पूरा नियंत्रण नहीं है।
ईरान या रूस किससे डरा ट्रंप
ऐन अल-असद एयर बेस से यूएस फोर्स की बापसी के बाद सवाल उठ रहा है कि ट्रंप ईरान से डरा या फिर रूस का डर उसको सता रहा था। काफी हद तक ईरान-समर्थित मिलिशिया (जैसे कताइब हिजबुल्लाह) के हमलों का इतिहास रहा है। 2020 में कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान ने इसी बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल हमला किया था। हाल के वर्षों में भी कई हमले हुए। लेकिन सरकारी स्तर पर वापसी को ईरान के डर से नहीं, बल्कि समझौते और आईएसआईएस पर जीत के रूप में पेश किया जा रहा है। हालांकि अमेरिकी अधिकारी इसे सफलता बता रहे हैं कि आईएसआईएस अब इराक में बड़ा खतरा नहीं है। ईरान-समर्थित समूहों ने वापसी की मांग की थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन इसे रणनीतिक समेकन (consolidation) कह रहा है, न कि डर। कुछ विश्लेषक इसे ईरान के साथ तनाव (हालिया प्रदर्शनों और धमकियों) से जोड़ते हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर नहीं।