
परंपरागत उत्साह व उल्लास से मनाया गणतंत्र दिवस, दुनिया ने देखी भारत की शक्ति, कर्तव्य पथ पर कई राज्यों की झांकी
नई दिल्ली। देश भर में गणतंत्र दिवस पारंपरिक उत्साह व उल्लास से मनाया गया। इस माैके पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया और सलामी ली। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यूरोपिय परिषद के एंटोनियो कास्टा व यूराेपिय आयोग की अध्यक्षा उर्सुला वॉन डेरे लेयेन रहे। देश के 77 वें गणतंत्र दिवस के मौके पर पूरे विश्व ने भारत की शक्ति को देखा और सराहना की। कर्तव्य पथ पर भारत ने अपनी सैन्य शक्ति का भी प्रदर्शन किया। इस मौके पर एनसीसी के बच्चे भी परेड में शामिल हुए और स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इसके अलावा कई राज्य की झांकियां भी कर्तव्य पथ पर नजर आयीं। इस माैके पर तमाम राजनीतिक दलों के नेता भी मौजूद रहे। खिली हुई धूप में सभी ने गणतंत्र दिवस की परेड का आनंद लिया। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्व को साथ लेकर चलने में विश्वास रखता है।
देश भर में समारोह
इस मौके पर देश भर में समारोह आयोजित किए गए। क्रांतिधरा मेरठ में भी पूरी भव्यता के साथ गणतंत्र दिवस मनाया गया। मंडलायुक्त भानु गोस्वामी कमिश्नरी में ध्वारोहण किया। पुलिस लाइन में शानदार परेड का आयोजन किया गया। दिल्ली एनसीआर में अन्य जिलों में भी गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह व उल्लास के साथ मनाया गया। देश के तमाम राज्यों में भी गणतंत्र दिवस मनाया गया। यूपी में राज्यपाल ने ध्वजारोहण किया। जम्मू कश्मीर में भी गणतंत्र दिवस मनाया गया।
राष्ट्र का पहला गणतंत्र दिवस
भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ था तथा 26 जनवरी 1950 को इसके संविधान को आत्मसात किया गया, जिसके अनुसार भारत देश एक लोकतांत्रिक, संप्रभु तथा गणतंत्र देश घोषित किया गया। 26 जनवरी 1950 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के साथ ध्वजारोहण कर भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया। यह ऐतिहासिक क्षणों में गिना जाने वाला समय था। इसके बाद से हर वर्ष इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है तथा इस दिन देशभर में राष्ट्रीय अवकाश रहता है। हमारा संविधान देश के नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी सरकार चुनने का अधिकार देता है। संविधान लागू होने के बाद डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने प्रथम राष्ट्रपति की शपथ ली थी।