

सीवर के भीतर से जा रही हैं पानी की पाईप, पचास हजार आबादी को मानी भी मय्यसर नहीं, जयभीमनगर के लोग जाएं तो जाएं कहां
मेरठ। इंदौर में दूषित पानी से पंद्रह की मौत से लगता है सिस्टम और नगर निगम के अफसरों ने कोई सबक नहीं लिया है, शायद यही वजह है जो महानगर के जयभीमनगर वार्ड 13 की करीब पचास हजार की आबादी को शुद्ध पेयजल भी मय्यसर नहीं। यहां के लोगाें को नगर निगम के अफसर पानी के नाम पर क्या पिला रहे हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पानी की पाइप लाइन सीवर के भीतर से होकर जा रही हैं। वार्ड के पार्षद रामपाल यादव बताते हैं कि ये पाइप लाइनें करीब चालिस साल पुरानी हैं। कुछ स्थानों पर पेयजल की पाइप लाइन सीवर लाइन के भीतर से होकर जा रही हैं, हालांकि ज्यादातर स्थान पर सीवर और पेयजल की पाइप लाइन समानांतर रूप से जा रही हैं।
गल चुकी हैं पेयजल की पाइप लाइन
जयभीम नगर आबादी जब आबाद हुई थी तब जल निगम ने यहां सीवर और पेयजल की पाइप लाइनें डाली थीं, इसको करीब चार दशक बीत चुके हैं। इतने लंबे अरसे के बाद पेयजल की पाइप लाइनें जगह-जगह से गल चुकी हैं। सीवर लाइन के साथ होने की वजह से इनमें सीवर की गंदगी अक्सर बहकर पाइप लाइन से होकर घरों तक पहुंच जाती है और लोग वही दूषित पानी पीने को मजबूर होते हैं। यहां यह भी याद रखें कि इंदौर में जिस पानी को पीकर पंद्रह लोगों मरे हैं उनको लेकर रिपोर्ट बताती हैं कि वाहां मौत की वजह मल युक्त दूषित पेयजल था। लगता है कि नगर निगम अफसरों और सिस्टम चलाने वालों को इंदौर की तर्ज पर लोगों की मौत का इंतजार है। वर्ना कोई वजह नहीं जो शुद्ध पेयजल मुहैय्या नहीं कराया जा रहा है।
घर-घर में बीमारी
जय भीमनगर इलाके में ज्यादातर लोग घरों में बीमार हैं। लोग बताते हैं कि बीमारी की वजह इस इलाके में गंदगी। यहां गंदगी बजाए नाले नालियों में बहने के सड़कों पर गलियों में बह रही है। इसकी वजह से संक्रमित चर्म रोग और बुखार जैसी बीमारियां घर-घर में फैल रही हैं। लोगों ने बताया कि हालात यह हो गयी है कि यदि परिवार का सदस्य बीमार हो जाता है तो फिर उससे संक्रमित होकर बीमारी पूरे परिवार के सदस्यों को अपनी चपेट में ले लेती है। यहां के वाशिंदे बताते हैं कि इस इलाके में आमतौर में गरीब तबके के लोग रहते हैं। उनकी माली हालत ऐसी नहीं होती कि महंगे डाक्टरों से इलाज करा सकें। महंगी दवाइयां खरीद सकें। उनके पास इलाज के नाम पर ले-देकर मेडिकल के डाक्टर और वहां की दवाएं हैं। और ये दवाएं भी पूरी नहीं मिल पाती हैं। इसलिए जितनी दवाएं मिलती हैं उनसे ही गुजारा करना पड़ता है। इस इलाके की दशा नारकीय हो गयी है।
फाइलों को अफसरों के नजरे करम का इंतजार
जयभीम नगर को इन समस्याओं से निजात दिलाने के लिए पार्षद रामपाल यादव ने अपने प्रयास से कुछ कार्य योजनाएं तैयार करयी हैं, लेकिन इन कार्य योजनाओं की फाइलें नगरायुक्त की टेबल पर पड़ी हैं। ऐसी करीब तीन चार फाइलें हैं जिन पर यदि नगरायुक्त साइन कर दें तो काम शुरू हो जाए। काम शुरू होने और उसके निपटते तक भी एक लंबा अरसा चाहिए, फिर अभी तो फाइलों पर साइन ही नहीं हुए हैं। ना जाने कब साइन होंगे और कब काम शुरू होगा कब काम खत्म होगा और तब कहीं जाकर जय भीमनगर के लोगों को नारकीय जीवन से निजात मिल सकेगी।
नाप तोल हो गयी काम शुरू होने का इंतजार
कुछ दिन पहले इस इलाके में नगर निगम के जेई पदम सिंह ने नाप तोल की थी। उस मौके पर पार्षद रामपाल सिंह, सुपरवाइजर रामेन्द्रपाल आदि भी मौजूद थे। लोगों ने बताया कि नाप तोल का क्या है। बात तो तब बने जब काम की शुरूआत हो। जब तक काम की शुरूआत नहीं होती और बगैर किसी बाधा के काम खत्म नहीं करा दिया जाता तब तक इस तरह की कवायद का कोई फायदा नहीं होने वाला।
मंडलायुक्त की जानकारी में है सब कुछ
जयभीम नगर के लोग किन किन मुसीबतों को उठा रहे हैं। कैसा नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं यह सब मंडलायुक्त की जानकारी में है। पार्षद रामपाल यादव ने बताया कि उन्होंने यहां की समस्याओं को लेकर तमाम स्तर पर यहां तक कि मंडलायुक्त तक को ज्ञापन दिया हुआ है। इसलिए कोई यह नहीं कह सकता कि जयभीम नगर के लोगों के गंदा पानी पीने की जानकारी उन्हें नहीं है।
यह कहना है महापौर व अपर नगरायुक्त का
महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने बताया कि वह मौके पर मुआयना करने के लिए गए थे। वहां के हालात वाकई ठीक नहीं है। अपर नगरायुक्त पंकज कुमार सिंह ने बताया कि समस्याएं देखी गयी हैं। वहां काम शुरू करा दिया जाएगा। पार्षद रामपाल यादव का कहना है कि यहां बगैर किसी देरी के काम शुरू कराया जाना चाहिए।