पार्षदों के सवालों पर चीफ की चुप्पी

kabir Sharma
5 Min Read
WhatsApp Channel Join Now

बगैर किसी टेंडर और अनुमति के करोड़ों का खर्चा क्यों, 17-6-बी केवल आपात हालात में लागू, शहर की कई कालोनियों में जल भराव

मेरठ। महानगर की कई कालोनियों जिनमें मलियाना की गंगा और शिव गंगा कालोनी भी शामिल हैं उन समेत कई दूसरी कालोनियों में जलभराव है। लोग घरों में बंधक हैं, उनमें काम ना कराके नगरायुक्त के कैंप कार्यालय के बराबर वाले बंगलों में करोड़ों का खर्च कराया जा रहा है, इसका काम का ना कोई टेंडर है और ना खर्च करने की कोई अनुमति। नगर निगम पार्षदों के इन चुभते हुए सवालों को चीफ इंजीनियर प्रमोद सिसौदिया के पास कोई उत्तर नहीं था। चीफ के रवैये से खिन्न ये पार्षद अब मंडलायुक्त से मिलकर उन्हें हालात से अवगत कराएंगे। साथ यह भी पूछेंगे कि सीएम योगी के आदेश हैं कि तमाम अफसर सुबह दस बजे से दोपहर 12 बजे तक कार्यालय में मौजूद रहेंगे, तो क्या मुख्यमंत्री के आदेश नगर निगम के अफसरों पर लागू नहीं होते हैं, जो कोई भी अफसर नगरायुक्त समेत सुबह दस बजे से दोपहर 12 बजे तक दफ्तर में मौजूद नहीं रहता।

किस के लिए तैयार हो रहा बंगला

सिविल लाइन स्थत नगरायुक्त के कैंप कार्याल के बराबर वाला बंगला जिसमें पूर्व में निगम के अफसर ही रहा करते थे, इन दिनों इसको पूरी तरह से डेमेज कर नए सिरे से इसमें काम कराया जा रहा है। बंगला किसी महल की मानिंद तैयार हो रह है। इसी को लेकर निगम के संजय सैनी समेत कई पार्षद जिसमें बड़ी संख्या भाजपाई पार्षदों की भी है, इस बंगले पर किए जा रहे खर्च को लेकर चीफ इंजीनियर प्रमोद सिसौदिया से बात करना चाहते थे। एक दिन पहले यानि सोमवार को सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक यानि नगर निगम के दफ्तर बंद होने तक तमाम पार्षद चीफ के कक्ष में बैठे रहे। बाद में उन्होंने धरने का एलान कर दिया, लेकिन पांच बजे तक भी चीफ इंजीनियर निगम नहीं पहुंचे। संजय सैनी ने बताया कि जब चीफ नहीं आए तो वो पांच बजे निगम से निकल गए।

आज सुबह फिर जा पहुंचे

सोमवार को जब चीफ नहीं मिले तो तमाम पर्षद जिनमें संजय सैनी,फजल करीम, पवन चैधरी, गंगा प्रसाद आदि भी शामिल थे, ये सुबह दस बजते ही दोबारा निगम आ अए। हालांकि तब तक चीफ नहीं आए थे। करीब 11 बजे जब चीफ प्रमोद सिसौदिया पहुंचे तो पार्षदों का नजला झड़ता तय माना जा रहा था और हुआ भी वैसा ही। चीफ पर पार्षदों के तीखे और चुभते सवालों की बारिश होने लगी। संजय सैनी ने पूछा कि किसी निधि से इस बंगले में काम कराए जा रहे हैं। क्या इसका कोई टेंडर हुआ है, क्या बोर्ड से इसकी अनुमति ली गयी है। क्या जिलाधिकारी से पुराने भवन को ध्वसत किए जाने की अनुमति लग ली गयी है। नगरायुक्त के अधिकार में केवल 10 लाख तक के काम कराए जाने का अधिकार है फिर किस अधिकार से निगम के चीफ इंजीनियर करोड़ों की कीमत से यह बंगला तैयार करा रहे हैं। इस बीच चीफ बोल उठे कि ये तमाम काम धारा 17-6-बी के प्रावधानों के आधीन कराए जा रहे हैं।

कब प्रयोग किए जा सकते हैं धारा 17-6-बी के प्रावधान

इस पर पार्षदों ने चीफ को बताया कि नगर निगम एक्ट में धारा 17-6-बी के प्रावधानों का इस्तेमाल केवल आपात कालीन हालात में किया जा सकता है। जिस बंगले को करोड‍़ों रुपए खर्च कर तैयार किया जा रहा है वहां कौन सी आपात कालीन हालात बने थे। ऐसा क्या हो गया था जो बैगर डीएम की अनुमति लिए बंगला का पुराना भवन तोड़कर वहां काम शुरू करा दिया गया। संजय सैनी ने चीफ को बताया कि तमाम ऐसी कालोनियां हैं जहां पानी भरा हुआ है। नाले नालियों का पानी सड़क और गलियों में फैला हुआ है। घरों में भर गया है। वहां यदि धारा 17-6-बी के प्रावधानों के तहत काम कराया जाता तो बात समझ में आती है, जिस बंगले में काम कराया जा रहा है वहां कौन से आपातकालीन हालात पैदा हो गए थे। पार्षदों की बात का चीफ पर कोई उत्तर नहीं था। उनका रवैया देखकर बाद में तमाम पार्षद वहां से उठाकर आ गए। संजय सैनी ने बताया कि बुधवार को अब मंडलायुक्त से इस संबंध में मुलाकात की जाएगी।

- Advertisement -
WhatsApp Channel Join Now
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *