बैक डोर से रूस चीन ईरान के साथ

kabir Sharma
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लंबी खींच रही लड़ाई से परेशान हैं ट्रंप, अमेरिका के लोग कर रहे आलोचना, चीन व रूस की ईरान को जबरदस्त मदद

नई दिल्ली/मास्को/बीजिंग। लंबी खींच रही लड़ाई से अमेरिका के प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप अब बुरी तरह खीज रहे हैं। उनकी मुसीबत अमेरिका के भीतर भी कम नहीं हो रही है। कांग्रेस संसद और अमेरका की जनता में उनको आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। ट्रंप करते थे कि ईरान दो दिन में उनके कदमों में होगा, लेकिन ईरान की इजरायल को मार से अमेरिका पीछे हटने को मजबूर है। अब कहा जा रह है कि इसकी वजह चीन व रूस का बैकडोर से ईरान की मदद करना है।

चीन की अरब देशों को नसीहत

ईरान पर अमेरिकी और इजरायल के हमले के बाद चीन ने अरब देशों खासतौर से जिनको अमेरिका का मित्र देश कहा जाता है उन्हें जमकर फटकार लगायी। इतना ही नहीं चीन ने हमलों को “unacceptable” कहा, खासकर सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या को। विदेश मंत्री Wang Yi ने Lavrov से बात कर तुरंत सीजफायर और डायलॉग की मांग की। चीन ने गल्फ देशों से “external interference” के खिलाफ एकजुट होने को कहा। चीन का यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है खासतौर से अमेरिका की खिलाफत के मामले में।

रूस चीन की मदद

यह साफ हो गया है कि बैकडोर से रूस व चीन ईरान की मदद कर रहे हैं। चीन ईरान का सबसे बड़ा ऑयल बायर है (2025 में 80%+ एक्सपोर्ट)। सैंक्शंस के बावजूद ईरान को रेवेन्यू दे रहा है। रूस और चीन ने मिलकर UN Security Council की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई, जहां रूस ने हमलों की कड़ी आलोचना की और तुरंत सीजफायर की मांग की। ये दोनों देश हले से BeiDou नेविगेशन, मिसाइल गाइडेंस और CM-302 एंटी-शिप मिसाइल्स जैसे डील्स पर बात चल रही है। लेकिन डायरेक्ट मिलिट्री मदद अभी नहीं। लेकिन इतना तय है कि जरूर पड़ने पर ईरान को फौजी मदद भी भेजी जाएगी। जो कुछ ईराक के साथ हुआ चीन व रूस वैसा ईरान के साथ नहीं होने देंगे।

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