कोरोना की भूली दास्तां क्यों फिर याद दिलायी, क्या फिर होगा लॉक डाउन, घरों में कैद होंगे लोग
नई दिल्ली। जो भूली दास्तां वो फिर याद आ गयी.. किसी दास्तां से कम नहीं वो मंजर जिसमें लोग ऑक्सीजन को तरसते थे, कोरोनो होने पर अपने भी अस्पताल में फैंक कर भाग जाते थे, कोई अंतिम संस्कार करने वालों नहीं मिलता था, यहां तक कि कब्रिस्तान और शमशान में मुर्दों को भी वेटिंग करनी पड़ती थी.. क्या जरूरत थी उस डरावने मंजर को याद दिलाने की..
संसद में पीएम मोदी ने मिडिल ईस्ट के तनाव की चर्चा करते हुए देशवासियों को आने वाले संकट से या कहे आसन्न संकट से आगाह किया है। उन्होंने इस दौरान कोरोना और लॉक डाउन की याद दिलायी। ऐसा क्यों कर हुआ जो पीएम ने लॉक डाउन की याद दिलायी। पीएम के भाषण के निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं क्या मिडिल ईस्ट में जो कुछ चल रहा है उसके चलते लॉक डाउन संभव है, या फिर कोरोना के दौरान जैसा सहयोग पीएम ने देश से मांगा था वैसा सहयोग एक बार फिर देशवासियों से मांगा जा सकता है। या गो कोरोना गो और थाली का बजावाना वो आज भी लोगों को याद है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या थाली बजाकर कम सिलेंडर कम बुलवाया जाएगा। नहीं ऐसा तो शायद कुछ ना हो लेकिनहां हो सकता है कि एनर्जी पर कुछ रोका टोकी हो जाए। मसलन इसको राशनिंग भी कहा जा सकता है।
सरकार की तैयारियों पर चुप्पी
सदन में पीएम के भाषण के बाद लोग यह भी पूछ रहे हैं कि जो मिडिल ईस्ट संकट के चलते जो कुछ करना है देश के लोगों को ही करना है, फिर सरकार की तैयारियां क्या है। जब सब कुछ देशवासियों को करना है तो फिर सरकार क्यों कर है। सीएम योगी हों या पीएम मोदी सभी पर्याप्त गैस की बात भी कहते हैं और फिर दूसरी ओर पीएनजी पर निर्भरता बढाए जाने की बात कही जाती है। लोगों को अपनी रसोई में केवल गैस चाहिए वो पीएनजी हो या एलपीजी। लेकिन जो हालात है उसके चलते जो कुछ सदन में कहा गया उससे तो यही लगता है कि सरकार ने हाथ खड़े कर दिए हैं। मिडिल ईस्ट के संकट से देश के लोगों को ही निपटना होगा।
पर्याप्त गैस तो लंबी लाइन क्यों
बार-बार कहा जा रहा है कि देश में पर्याप्त गैस है। यदि पर्याप्त गैस है तो फिर लंबी लाइनें क्यों है। अखवारों की सूर्खियां गैस के लिए लंबी कतारों से भरी पड़ी हैं। फिर हर किसी के पास तो पर्ची वाली गैस नहीं है, जिनके पास पर्ची वाली गैस की व्यवस्था नहीं वो क्या करेंगे। उन्हें तो ब्लैक में ही सिलेंडर भराना होगा चाहे तीन हजार का मिले या छह हजार का। सरकार ने तो कह दिया है कि जैसा सहयोग कोरोनो में किया वैसा ही सहयोग अब देश के लोग करें।