मनसबिया की राजनीति में ‘भूचाल’ की आहट!, बाकर ज़ैदी v/s दानिश जाफरी …किंग कौन, पूर्व मुतवल्ली पहुंचे हाई कोर्ट, बाकर ज़ैदी का चार्ज हास्यास्पद

नई दिल्ली। यूपी के लखनऊ के बाद प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी मेरठ की वक्फ मनसबिया की राजनीति में भूचाल की आहट अब साफ सुनाई देने लगी है। भूचाल की आहट को वक्फ मनसबिया की आबोहवा में भी महसूस किया जा रहा है। कभी भी कुछ भी हो सकता है। यह बात वो भी कह रहे हैं जो जो वक्फ मनसबिया को करीब से जानते हैं और वास्ता रखते हैं।
बाकर ज़ैदी बनाम दानिश जाफरी आमने सामने
बाकर ज़ैदी द्वारा वक्फ मनसबिया के कंट्रोलर का चार्ज संभालते ही दोनों पक्ष खुलकर आमने सामने आ गए हैं। पूर्व मुतवल्ली दानिश जाफरी पक्ष ने बाकर ज़ैदी द्वारा चार्ज ग्रहण करने को दुर्भाग्यपूर्ण और हास्यास्पद बताया है। इस संवाददाता से बातचीत में दानिश जाफरी पक्ष ने आरोप लगाया कि बाकर ज़ैदी को चार्ज स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया गैर कानूनी है तथा पूरी तरह से ‘बकवास’ है।
रिन्यूअल अर्जी लंबित

पूर्व मुतवल्ली पक्ष का मानना है कि जब उनके रिन्यूअल की एप्लीकेशन बोर्ड में लंबित है और शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के 17 नवंबर 2025 के धारा 65 के तहत मनसबिया पर बोर्ड के नियंत्रण संबंधी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है और मामला कोर्ट में विचाराधीन है तो ऐसे में कंट्रोलर की नियुक्ति का क्या औचित्य है। दानिश जाफरी पक्ष ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा करके हुए आरोप लगाया है कि प्रशासक और कंट्रोलर दोनों की नियुक्ति ही अनुचित है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय का पत्र
पूर्व मुतवल्ली पक्ष ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय के एक पत्र का हवाला देते हुए यह भी दावा किया है कि उक्त आदेशों का मुख्य कार्यपालक अधिकारी जीशान रिज़वी द्वारा भी खंडन किया जा चुका है। यह भी दावा किया गया है कि जब बोर्ड द्वारा प्रशासक की नियुक्ति ही हाई कोर्ट में विचाराधीन है तब ऐसे में प्रशासक द्वारा प्रबंधक (कंट्रोलर) की नियुक्ति कहां तक उचित है। दानिश जाफरी पक्ष के अनुसार पूरा प्रकरण मानहानि की श्रेणी में आता है और इस प्रकरण पर सुसंगत कानूनी कार्यवाही की जाएगी। दानिश जाफरी ने दावा किया है कि यह वक्फ अलल औलाद है और वह ही उसके मुतवल्ली हैं।