मेरठ के माल रोड स्थित इंडियन बैंक शाखा का मामला, आरबीआई गाइडलाइन की अनदेखी का आरोप, घंटों परेशान रहा ग्राहक
नई दिल्ली। एकाउंट में पर्याप्त राशि होने के बाद भी इंडियन बैंक के एक ग्राहक के चैक का पेमेंट नहीं किया गया। मामला मेरठ के माल रोड स्थित इंडियन बैंक ब्रांच से जुड़ा है। बताया गया है कि मेरठ कैंट क्षेत्र की मॉल रोड पर स्थित इंडियन बैंक की शाखा में बैंकिंग नियमों को ताक पर रखे जाने का मामला सामने आया है। खाते में पर्याप्त धनराशि होने के बावजूद एक ग्राहक को वैध चेक का भुगतान नहीं किया गया। बैंक कर्मियों ने “बैंक में धनराशि उपलब्ध नहीं होने” का हवाला देकर भुगतान से इनकार कर दिया।
17 जनवरी का प्रकरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार चालू खाते से जुड़े खाता धारक 17 जनवरी 2026 को चेक देकर उसके चैक माध्यम से ₹25,000 की राशि निकालने के लिए दोपहर लगभग 12:45 बजे इंडियन बैंक, मॉल रोड, मेरठ कैंट शाखा पहुंचे। बताया गया कि खाता धारक लगभग 1:15 बजे तक भुगतान काउंटर पर खड़ा रहा, लेकिन मौजूद कैशियर/क्लर्क ने यह कहते हुए भुगतान नहीं किया कि बैंक में नकदी उपलब्ध नहीं है।
कैश शाखा में नहीं था
इस पर खाता धारक ने तत्काल शाखा की मुख्य प्रबंधक अरबीला से शिकायत की, किंतु उन्होंने भी यही कारण बताते हुए भुगतान कराने में असमर्थता जताई। इसके बाद प्रार्थी द्वारा करीब 30 मिनट तक इंतजार कर दोबारा कैशियर व मुख्य प्रबंधक से संपर्क किया गया, परंतु फिर भी चेक का भुगतान नहीं हो सका। बताया जाता है की लगभग 12:30 बजे से 4:00 बजे तक बैंक मै रूपये की कमी रही जिस कारण काफ़ी बैंक के उपभोक्ता परेशान रहे।
आरबीआई की गाइड लाइन का उल्लंघन
बैंकिंग जानकारों का कहना है कि यदि चेक वैध हो और खाते में पर्याप्त धनराशि मौजूद हो, तो बैंक द्वारा भुगतान रोकना भारतीय रिज़र्व बैंक (आर बी आई) की गाइडलाइनों के विरुद्ध है। बैंक की आंतरिक नकदी व्यवस्था की कमी का खामियाजा ग्राहक पर नहीं डाला जा सकता।
Deficiency in Service
ऐसे मामलों को “सेवा में कमी” (Deficiency in Service) की श्रेणी में माना जाता है।
घटना से यह सवाल भी उठ रहा है कि मेरठ कैंट जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र की शाखा में समय पर नकदी उपलब्ध न होना कहीं न कहीं बैंक प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। प्रार्थी का कहना है कि इस संबंध में उच्च अधिकारियों एवं RBI से शिकायत की जाएगी, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सके।
अब देखना यह होगा कि बैंक प्रबंधन/ आर बी आई इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए कोई ठोस कार्रवाई की जाती है यहां नहीं यह देखना बाकि है