

तीसरी पढ़ी अब कहते हैं करो खाली, मलियाना फ्लाई ओवर के नीचे के व्यापारी आंदोलित, बाजार बंद कर किया प्रदर्शन, व्यापारी बोले कहां जाएं
मेरठ। टीपीनगर के मलियाना फ्लाई ओवर के नीचे छोटा मोटा कारोबार कर परिवार का गुजर बसर करने वाले करीब ढाई सौ व्यापारियों पर नगर निगम कहर बनकर टूटने पर अमादा है। इन परिवारों का यदि जनता के नुमाइंदों ने साथ नहीं दिया तो इन ढाई सौ परिवारों का चुल्हा हमेशा के लिए बुझ जाएगा। मलियाना फ्लाई ओवर के नीचे जिन लोगों का काम धंधा व कारोबार है, उनकी इस वक्त तीसरी पीढ़ी यहां काम कर रही है। ये सभी व्यापारी काम धंधा और कारोबार की बात को भूलकर अब आंदोलित हैं। ऐसा करना इनकी मजबूरी भी है। हैरानी तो इस बात की है कि शहर की घनी आबादी के बीच कारोबार कर रहे ढाई सौ व्यापारियों के कारोबार पर संकट अमादा है और जो जन प्रतिनिधि चुनाव में इनसे तमाम लुभावने वादे करते हैं उनमें से कोई भी आकर झांकने को तैयार नहीं। यह पूछने को तैयार नहीं कि इन पर ऐसी क्या गुजर रही है जो ये आंदोलन पर अमादा हैं। ये अपनी लड़ाई खुद लड़ने और अपनी आवाज खुद उठाने को मजबूर हैं। नेताओं के नाम पर इनके पास उत्तर प्रदेश भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विनीत अग्रवाल शारदा तो जरूर पहुंचे हैं, लेकिन उनके आने को यदि अपवाद मान लिया जाए इन करीब ढाई सौ व्यापारियों का हाल लेने के लिए अभी तक कोई नेता नहीं पहुंचा है।
मौत के अलावा नहीं कोई दूसरा रास्ता
टीपीनगर के मलियाना पुल को बने करीब चार दशक यानि चालिस साल हो चुके हैं। इस पुल के नीचे कुछ लोग छोटा मोटा व्यवसाय कर किसी तरह अपने परिवार की गुजर बसर कर रहे हैं। ऐसा करने वालों की यह तीसरी पढ़ी है। इनकी पहचान साबुन गोदाम किशनपुर खोखा पट्टी व्यापार संघ के रूप में की जाती है, लेकिन लगता है कि नगर निगम प्रशासन काे यह सब रास नहीं आ रहा है। सहायक नगरायुक्त के साइन किए गए नोटिस बीती 25 दिसंबर को इन सभी व्यापारियों को भेजे गए हैं। इन नोटिसों में इन पर अवैध रूप से काविज होने के आरोप लगा दिए गए हैं। साथ ही यह भी कह दिया गया है कि इस जगह को पंद्रह दिन के भीतर खाली कर दिया जाए नहीं तो नगर निगम प्रशासन कठोर कार्रवाई के लिए बाध्य होगा। निगम के इन नोटिसों से यहां कारोबार करने वाले ढाई सौ व्यापारियों की रातों की नींद उड़ गयी है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि किस गलती की सजा नगर निगम देने पर उतारू है। फिर सबसे बड़ा सवाल कि यदि यहां से उजड़ जाएंगे तो फिर जाएंगे कहा। इन व्यापारियों ने बताया कि निगम के नोटिस के बाद उनका सूख चैन छिन गया है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि किससे जाकर फरियाद करें। कहां जाएं औंर यदि यहां से उजाड़ दिया गया तो फिर परिवार की गुजर बसर कैसे होगी। कैसे बहन बेटियों की शादी, बच्चों की पढ़ाई, मकान का किराया, घर परिवार के सदस्य की बीमारी में डाक्टर व दवा का खर्चा ये सब कैसे वहन करेंगे। ऐसे में तो उनके सामने एक ही रास्ता दिखाई देता है वो है मौत। नगर निगम यदि उन्हें उजाड़ने के नाम पर इन ढाई सौ व्यापारियों को मौत देने पर अमादा है तो फिर यही ठीक है।
चालिस साल में नजर नहीं आए अवैध कब्जे
नगर निगम के जो अधिकारी इन ढाई सौ व्यापारियों को आज उजाड़ने पर अमादा हैं क्या उनके पास इन व्यापारियों के इस सवाल का कोई जवाब है कि चालिस सालों के दौरान नगर निगम के अधिकारियों को यहां अवैध कब्जे या नाले नाली की पटरी पर कब्जे की बात नजर नहीं आयी। चालिस साल बाद अब ऐसा क्या हो गया जो निगम के अफसर ढाई सौ परिवारों को सड़क पर लाने पर अमादा हैं। कुछ व्यापारियों ने आशंका व्यक्त की है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी बड़े व्यापारी के इशारे पर इन ढाई सौ छोटे व्यापारियों को उजाड़ने का खेल खेला जा रहा है। व्यापारियों ने दो टूक कह दिया है कि जान देना मंजूर है, लेकिन यह जगह छोड़ना मंजूर नहीं है। यहां पर कारोबार कर उनकी रोटी रोजी चलती है। उनकी रोटी रोजी पर यदि किसी ने बुरी नजर डाली तो वो अच्छा नहीं होगा। इसलिए बेहतर तो यही होगा कि जनप्रतिनिधि खुद आगे आकर इस मामले को सुलटा लें।
विरोध स्वरूप बाजार बंद
मलियाना पुल के नीचे कारोबार करने वाले व्यापारियों ने विरोध स्वरूप अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। बीती 23 जनवरी को उन्होंने प्रतिष्ठान बंद कर सभा की। इस सभा में भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विनित अग्रवाल शारदा पहुंचे थे। उन्होंने इन व्यापारियों को इस लड़ाई में साथ देने और उजाड़ने ना देने का आश्वासन दिया है, लेकिन इन व्यापारियों को ये आश्वासन नगरायुक्त और महापौर से चाहिए। इस संबंध में महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने बताया कि उनकी जानकारी में यह मामला नहीं है। वह अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी लेंगे। जो चालिस साल से व्यापार कर रहा है उसको ऐसे ही नहीं उजाड़ा जा सकता है।