निगम उपाध्यक्ष चुनाव से हैं कतरा रहे

kabir Sharma
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निगम कार्यकारिणी के चुनाव में किरकिरी, उपाध्यक्ष का चुनाव कराने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे भाजपाई, संजय सैनी का उपाध्यक्ष चुनाव लड़ने का एलान

मेरठ। नगर निगम कार्यकारिणी के चुनाव में बागी पार्षद संजय सैनी के हाथों किरकिरी के बाद भारतीय जनता पार्टी अब उपाध्यक्ष का चुनाव कराने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। वहीं दूसरी ओर कार्यकारिणी के चुनाव में भाजपा के मंसूबों पर पानी फेरने वाले संजय सैनी ने निगम उपाध्यक्ष का चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। बकौल संजय सैनी उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर उनकी सभी तैयारियां पूरी हैं। जब चाहें तब उपाध्यक्ष का चुनाव करा लें।

उपाध्यक्ष चुनाव पर सस्पेंस

इस घटना के बाद अब नगर निगम के उपाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि संजय सैनी की जीत और क्रॉस वोटिंग के डर से ही पार्टी उपाध्यक्ष चुनाव कराने से बच रही है। अभी तक इस चुनाव को टाला जा रहा है, जिससे विपक्षी दलों को भाजपा पर निशाना साधने का मौका मिल रहा है।

यह घटना मेरठ में भाजपा की महानगर इकाई की कमजोरियों को उजागर करती है, जहां टिकट वितरण और आंतरिक कलह ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया है। संजय सैनी ने अपनी जीत के बाद कहा है कि यह उनकी मान-सम्मान की लड़ाई थी, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या पार्टी इस बगावत को संभाल पाएगी या आगे और बड़े उलटफेर होंगे? पार्टी के जानकारों का मानना है कि यदि उपाध्यक्ष चुनाव जल्द नहीं कराया गया, तो यह संगठन की छवि पर और असर डाल सकता है। नगर निगम में भाजपा की यह अंदरूनी लड़ाई गैर भाजपा दलों में भी चर्चा बनी हुई है। हालांकि यह भी याद रखा जाए कि संजय जैनी अब भाजपा के नहीं हैं।

संजय सैनी को 18 वोट में कौन कौन शामिल

नगर निगम में कार्यकारिणी चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। भाजपा के बागी पार्षद संजय सैनी ने बड़ा उलटफेर करते हुए 18 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जिसे भाजपा के लिए करारा झटका माना जा रहा है। लेकिन सवाल पूछा जा रहा है कि संजय सैनी के मिले 18 वोटों में किस किस के वोट शामिल हैं। यह संजय सैनी की जीत ही नहीं बल्कि सबसे ज्यादा वोट हासिल कर जीतने वाले प्रत्याशी भी बने। अब सवाल उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर है। निगम उपाध्यक्ष के चुनाव में हो रही देरी को लेकर तमाम ऊंगलियां भाजपा की ओर उठ रही हैं। आमतौर पर कार्यकारिणी चुनाव के सप्ताह भर के भीतर उपाध्यक्ष का चुनाव करा लिय जाना चाहिए था।

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