कीमतों में पचास फीसदी का इजाफा, हाेटल ढावे और ठेलों पर भी सामान महंगा, दुकानदार बोले सिलेंडर की किल्लत, सबसे ज्यादा रोजेदार परेशान
मेरठ। एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत और महंगे होने के साइड इफैक्ट अब बाजार पर भी नजर आने लगे हैं। जिन्हें बाजार में खाने का शौक है उन्हें अब जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है। वैसे केवल बाजार ही नहीं घर का भी बजट महंगे सिलेंडर ने बिगाड़ कर रख दिया है। जो लोग ब्लैक में सिलेंडर लेकर गुजारा करते हैं उन्हें दो हजार तक खर्च करना पड़ रहा है और जो पर्ची का सिलेंडर यूज करते हैं उनका पूरा दिन लाइन में निकल जाता है। लाइन में लगने के बाद भी सिलेंडर मिलने की कोई गारंटी नहीं। सिलेंडर की किल्लत ने रमजान को भी महंगा कर दिया है।
इफ्तार और सहरी के लिए रोजाना के मिलने वाले सामान के दाम गैस की किल्लत के वजह से आसमान छूने लगे हैं। हालांकि ऐसा कोई करना नहीं चाहता था, लेकिन सिलेंडर की किल्लत की वजह से रोजेदार जो खाने का सामान लेकर जाते हैं उसको महंगा कर दिया गया है। दुकानदारों ने इसकी वजह सिलेंडर का ना मिलना व बहुत ज्यादा महंगा हो जाना बताया है।
रोजे ही नहीं नवरात्र भी महंगे
केवल रोजे ही नहीं यदि हालात में सुधार नहीं हुआ तो इस साल नवरात्री के ब्रत भी महंगे ही पड़ेंगे। नवरात्र में यदि बाजार से भी ब्रत के खाने का सामान लाते हैं तो वो भी महंगा और घर में यदि बनाया जाता है तो भी वो महंगा ही पड़ेगा। अभी भी जब ब्लैक में सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है तो भी खाना महंगा ही पड़ रहा है। खाने के सामान पर महंगाई का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दस रुपए वाली चाय अब बीस रुपए की हो गयी है।
होटलों में तंदूर और घर में इंडेक्शन
पिछले कुछ सालों में शहर में कोयले को होटलों, ढाबों और रेस्टोरेंट्स से लगभग बाहर कर दिया गया। बार-बार पॉल्यूशन के चलते ग्रैप लगने की वजह से ज्यादातर लोगों ने गैसे के चूल्हों और तंदूरों का इस्तेमाल शुरू कर दिया। लेकिन इस बार गैस की मार ऐसे पड़ी कि लोगों को इन ‘एनवायरनमेंट फ्रेंडली’ चूल्हों को बंद करके फिर से लकड़ी और कोयले का सहारा लेना पड़ा। इसी के चलते 30 से 50 फीसदी चीजों के दाम बढ़ गए हैं।