
चीन ने जतायी नाराजगी, दलाल लामा को बताया अलगावादी, बीजिंग की तीखी प्रतिक्रिया, कहा इस प्रकार के कृत्यों की मंशा हैँ समझते
नई दिल्ली/धर्मशाला/लाॅस एजलिस। धार्मिक व आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा को जर्मनी अवार्ड पर चीन ने आंखें लाल की हैं। तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलालई लाला को उनके एल्बम “मेडिटेशन” के लिए प्रतिष्ठित ग्रैमी अवॉर्ड मिलने पर चीन ने कड़ी नाराजगी जताई है। चीनी विदेश मंत्रालय ने इसे “चीन-विरोधी गतिविधियों” के लिए पुरस्कार का इस्तेमाल बताया है। दलाई लामा को यह सम्मान ‘सर्वश्रेष्ठ ऑडियो बुक’ श्रेणी में मिला है। बीजिंग दलाई लामा को एक अलगाववादी मानता है। यह आयोजन लॉस एजलिस में हुआ।
मेरा नहीं सबका है अवार्ड
ग्रेमी अवार्ड पर प्रतिक्रिया देते हुए दलाल लामा ने कहा कि यह मेरा नहीं सबका है। धार्मिक गुरू ने कहा कि मैं इस सम्मान को आभार और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। मैं इसे कुछ व्यक्तिगत नहीं मानता, बल्कि इसे हमारी साझा यूनिवर्सल ज़िम्मेदारी की पहचान मानता हूं। मेरा सच में मानना है कि शांति, दया, हमारे पर्यावरण की देखभाल और इंसानियत की एकता की समझ सभी आठ अरब इंसानों की सामूहिक भलाई के लिए जरूरी है। इसलिए मैं शुक्रगुजार हूं कि यह ग्रैमी सम्मान इन संदेशों को और ज़्यादा लोगों तक फैलाने में मदद कर सकता है।
चीन ने की आंखें लाल
धार्मिक व आध्यात्मिक गुरू दलाल लामा को ग्रेमी अवार्ड पर लाल सेना के मालिक चीन ने आंखें लाल की हैं। बीजिंग ने इसे “चीन-विरोधी राजनीतिक हेरफेर” बताते हुए कहा कि यह पुरस्कारों का गलत इस्तेमाल है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दलाई लामा को “धार्मिक भेष में अलगाववादी” करार दिया और कला पुरस्कारों को राजनीतिक हथियारों के रूप में उपयोग करने का कड़ा विरोध किया। बीजिंग ने यह भी कहा कि वह इस प्रकार के कृत्यों के पीछे की मंशा को भली भांति समझता है। दलाई लामा 1959 से भारत के धर्मशाला में निर्वासित जीवन जी रहे हैं। दलाई लामा 1959 से भारत के धर्मशाला में निर्वासित जीवन जी रहे हैं। चीन उन पर तिब्बत में अशांति फैलाने का आरोप लगाता है।