तकनीकि समस्याओं के चलते मंत्री, विधायक व सांसद भी भी टेके घुटने, आसान नहीं हवाई पट्टी से 70 सीटर की भी उड़ान, परतापुर से ज्यादा आसान जेबर
नई दिल्ली / मेरठ। बीते करीब 26 साल से परतापुर की आंबेडकर हवाई पट्टी से हवाई उड़ान का इंतजार मेरठ के वाशिंदों को है, लेकिन फिलहाल इसको लेकर मुश्किलें अपार और खामियां बेशुमार नजर आ रही हैं। पहले बात मुश्किलों कर लेते हैं। तो मुश्किलों की फेरिस्त में जिस सत्तर सीटर छोटे विमान की बात मंत्री सांसद, विधायक कर रहे हैं वो तकनीकि रूप से कसौटी पर खरा नहीं उतरता बताया जाता है। जो लोग महीने में बीस दिन से ज्यादा हवाई उड़ान में रहते हैं, उनका तर्जुबा कहता है कि सत्तर सीटर हवाई उड़ान की जो बात कर रहे हैं, वो यह नहीं जानते कि सत्तर सीटर विमान अब आउट डेटेड हो चुके हैं। इससे सफर करना अब पंसद नहीं किया जाता। पॉलटिकली प्रेशर के चलते यदि इन विमानों से उड़ान शुरू भी कर दी गई, तो यात्रियों का भारी टोटा होगा, बजाए परतापुर हवाई पट्टी जाने के हवाई यात्री जेबर के इंटरनेशनल एयरपोर्ट जाना बेहतर समझेंगे। इसकी वो बड़ी वजह भी बताते हैं। उनका कहना है कि शहर की जो भौगोलिक स्थिति है, उसको देखते हुए उन्हें जेबर एयरपोर्ट पहुंचना आसान लगता है। किसी भी एरिया से निकलें वहां रास्ते में बेहताशा ट्रेफिक जाम, टूटी फूटी सड़कें और यदि कोई झगड़ा फसाद या जुलूस सरीखा कोई आयोजन हो तो जिसको फ्लाईट पकड़नी है वो तो रास्ते में फंस कर ही रह जाऐगा, जबकि जेवर एयरपोर्ट पहुंचने के लिए ऐसी किसी मुसीबत से होकर नहीं गुजरना पड़ता। जेबर एयरपोर्ट पहुंचने के लिए बेहतर साफ सुथरे हाइवे की कनेक्टिविटी मुहैय्या कराई गई है। इसके अलावा ऐसे तमाम सत्तर सीटर विमानों से सफर में जो अपार मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं, वैसा भी कुछ नहीं होता, वहां यात्री कम होने की वजह से कोई फ्लाई भी कैंसिल नहीं होती, आमतौर पर जैसा कि सत्तर सीटर विमानों की उड़ान में देखने में आ रहा है।
केंद्र सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ के तहत परतापुर हवाई पट्टी को विकसित कर हवाई सेवा से जोड़ने का प्रयास है। इस योजना का मकसद छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़कर आम जनता के लिए सस्ती हवाई यात्रा सुलभ कराना है, जिससे इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों और पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। इसी क्रम में, उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2014 में परतापुर हवाई पट्टी एएआई को सौंप दी थी ताकि इसका विस्तार किया जा सके और यहां से वाणिज्यिक उड़ानें शुरू हो सकें।
अभी सपना साकार होना है बाकि
साल 1987 में कांग्रेस नेता शांति त्यागी ने मेरठ में हवाई पट्टी की मांग उठाई थी। स्थानीय नेताओं के तमाम प्रयास के बाद वर्ष 2013 में परतापुर में हवाई पट्टी बनी। इसके बाद हवाई पट्टी के विस्तारीकरण और हवाई उड़ान शुरू करने की मांग उठती रही।
राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक के समक्ष हवाई उड़ान का प्रस्ताव रखा। इसके बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारी और उनकी तकनीकी टीम ने हवाई पट्टी का मुआयना किया। मौजूदा जमीन पर 2280 मीटर लंबा और 220 मीटर चौड़ा रनवे बन सकता है। इस पर 72 सीटर विमान के उड़ान की स्वीकृति एयरपोर्ट अथॉरिटी ने दे दी है, लेकिन फिर भी हवाई जहाज हैं कि उड़ने का नाम नहीं ले रहे हैं, उडेÞ तो भी कैसे क्योंकि मुश्किलें अपार और खामियां हैं बेशुमार