मेरठ। सुभारती सनातन संगम न्यास के अंतर्गत योग एवं ध्यान समन्वय का भव्य आयोजन स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ में किया गया। इस कार्यक्रम का प्रारंभ मुख्य अतिथि डॉ. लक्ष्मीकान्त वाजपेयी,विशिष्ट अतिथि अजय गुप्ता, डॉ. अतुल कृष्णा,संस्थापक सनातन संगम न्यास एवं सुभारती समूह, डॉ. शल्या राज,मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, डॉ. प्रमोद कुमार शर्मा,कुलपति,स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय एवं मेज.जन.(डॉ.) जी.के.थपलियाल, एसएम(से.नि.), महानिदेशक स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय द्वारा सनातन दीप प्रज्ज्वलन कर के किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. लक्ष्मीकान्त वाजपेयी ने कहा कि आज सनातन पर चारों ओर से हमले हो रहे हैं। भारतीय सनातन पद्धतियों में कहीं भी दूसरे धर्म को नीचा दिखाने अथवा जबरदस्ती किसी को अपनी पूजा पद्धति अथवा उपासना को अपनाने के लिए विवश नहीं करती हैं। उन्होंने सनातन संगम न्यास की स्थापना एवं इसके उद्देश्यों के बारे में बोलते हुए कहा कि डॉ. अतुल कृष्णा का यह विचार और प्रयास आज समय की मांग है। आज इस सनातन संगम न्यास जैसे मंचों की जरुरत है जहां हम आपसी वैर-भाव को समाप्त कर मां भारती को अक्षुण्ण बनाने के लिए कार्य करें।
सुभारती सनातन संगम न्यास के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्णा ने कहा कि भारतीय संस्कृति ही सनातन संस्कृति है। सनातन संस्कृति में प्रेम, करुणा, मैत्री, समानता सद्भावना एवं समन्व्य के भाव से परिपूर्ण है। सनातन संगम न्यास का प्रयास है राष्ट्र के सभी लोगों को अपनी धार्मिक आस्था से ऊपर उठकर एकजूट होकर रहना होगा ताकि देश पुनः अखंड राष्ट्र बन सके क्योंकि जब जब हम आपस में बंटे तब तब देश विभक्त हुआ । इसके अतिरिक्त हमें अपने गुरुओं का सम्मान करते हुए उनके बताए हुए प्रेम, करुणा, मैत्री, समानता सद्भावना एवं समन्व्य के भाव के मार्ग पर चलते हुए अपने आपको एकजूट करना होगा। इस दौरान डॉ. अतुल ने अमरीका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ पर बोलते हुए कहा कि हमें अपने देश को आत्म-निर्भर बनाने के लिए विदेशी विशेषकर अमरीकी वस्तुओं का प्रयोग बंद करके स्वदेशी वस्तुओं का उत्पादन एवं उपभोग बढाना चाहिए जिससे की हम अमरीका और अन्य विदेशी शक्तियों को मुँहतोड़ जवाब दे सकेंगे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मेरठ के प्रसिद्ध समाजसेवी अजय गुप्ता ने सांख्ययोग एवं कर्मयोग पर बोलते हुए कहा कि भारतीय ग्रंथों में समानता , सद्भाव एवं करुणा तथा मैत्री का भाव ही बताया गया है। सनातन संगम न्यास का यह प्रयास सराहनिय है कि इस न्यास के द्वारा भारतीय संस्कृति के मूल तत्व को पुनःस्थापित किया जा रहा है।
सनातन संगम न्यास मेरठ इकाई के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप राघव ने न्यास की ओर से अतिथियों का स्वागत करते हुए इससे सभी को परिचित करवाया। उन्होंने अपने संबोधन में धर्म के दस लक्षण, जो मनुस्मृति में बताए गए हैं धैर्य, क्षमा, संयम (दम), चोरी न करना (अस्तेय), स्वच्छता (शौच), इन्द्रियों पर निग्रह (इन्द्रियनिग्रह), बुद्धि, विद्या, सत्य और क्रोध न करना (अक्रोध) के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि धर्म के इन्हीं गुणोंके पालन के द्वारा मनुष्य को आदर्श जीवन जीने और आध्यात्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के महानिदेशक मेज.जन.(डॉ.) जी.के.थपलियाल, एसएम(से.नि.) ने मोक्ष के विषय में बात करते हुए कहा कि ईश्वर को प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम तरीका है ध्यान। जब तक हम अपने मन को शांत नहीं करते हैं तब तक हम अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते हैं। एकाग्रचित्त होना सबसे जरुरी है, क्योकिं इससे ही महासागर रुपी मन को हम नियंत्रित कर सकते हैं।
वहीं विपश्यना ध्यान साधना के बारे में बताते हुए तथागत बुद्ध सुभारती शोधपीठ के समन्व्यक भन्ते डॉ. चन्द्रकीर्ति ने कहा कि विपश्यना में शरीर की वेदना, हलचल, मनोभाव, विचार आदि को देखा जाता है। विपश्यना का अर्थ है अपने विचारों को विशेष दृष्टि से देखना। उन्होंने उपस्थित लोगों को विपश्यना का एक सुक्ष्म अभ्यास भी कराया।
अष्टांग योग के बारे में बताते हुए डॉ. अभयशंकर गौड़ा ने कहा कि साधनपाद में महर्षि पतंजलि के द्वारा अष्टपद बताये गए हैं। इनके द्वारा ही हम अष्टांग योग को निष्पादित कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त उन्होनें अष्टांग योग के द्वारा प्राप्त होने वाले विभिन्न लाभों को भी बताया एवं सभी को अष्टांग योग का अभ्यास करवाया। केरल वर्मा सुभारती विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष डॉ. रविंद्र जैन ने प्रेक्षा ध्यान के बारें चर्चा करते हुए कहा कि यह जैन धर्म की वह ध्यान विधि है जिसमें आत्म-साक्षात्कार और व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास को प्राप्त किया जा सके। प्रेक्षा ध्यान में वितरागी भाव से किसी भी वस्तु या व्यक्ति को देखने से हम उसके वास्तविक गुणों को जान पाते हैं। इसके द्वारा हम सदविचारों का उत्पादन कर सकते हैं और मानसिक शांति को प्राप्त करके अपना सर्वांगीण विकास कर पाते हैं। इस दौरान उन्होंने प्रेक्षा ध्यान का अभ्यास भी कराया। उन्होंने कहा कि प्रेक्षा ध्यान के द्वारा हम अपने जीवन को आनंदमय एवं आत्मप्रकाशित तथा संतुलित बना सकते हैं।
सिख पंथ में ध्यान की विधि नाम सिमरन के बारे में बताते हुए जुगल किशोर ने कहा कि सिख धर्म के सभी गुरुओं की वाणी और गुरुग्रंथ साहिब के मार्गदर्शन में ही सिमरन किया जाता है। उन्होंने कहा कि गुरुग्रंथ साहिब के अनुसार सभी मनुष्य एक परमात्मा की संतान हैं। हम सभी परमात्मा की परम ज्योत का ही हिस्सा हैं और एक दिन हमें उसी ज्योत में विलीन होना है, इसलिए हम सभी जो मानव रुप में इस धरती पर जन्मे हैं, हमें अपने भीतरी परम ज्योत को नाम सिमरन के द्वारा शुद्ध रखना है। सिख पंथ में दो विधियों से सिमरन किया जाता है जिसमें एक बीज मंत्र या दूसरा गुरुमंत्र के द्वारा किया जाता है। इस कार्यक्रम में सुभारती समूह एवं सुभारती सनातन संगम न्यास के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्णा की पुस्तक जीवन तरंगिणी मेरी जीवन यात्रा भाग-तीन का लोकार्पण उपस्थित गण्यमान्य अतिथियों के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के समापन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.(डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा कि हमें निजि स्वार्थ को ना देखते हुए यह देखने और सोचने की आवश्यकता है कि हम अपने किसी कार्य से अन्य व्यक्तियों को क्या लाभ या दुख पहुंचा रहे हैं। यदि हम इन भावों को अपने अंदर जागृत कर लेते हैं तो हमारे अंदर स्वयमेव ही करुणा का भाव आ जाता है जोकि सनातन का मूल भाव है। हम सभी को यह प्रण लेना चाहिए कि अगर हम किसी के प्रति द्वेष नहीं रखते हैं और प्रेम का भाव रखते हैं तो हमारे अंदर स्वयं ही प्रेम, करुणा और मैत्री का भाव उत्पन्न हो जाएगा।
कार्यक्रम का समापन वंदेमातरम के साथ हुआ। वहीं इस कार्यक्रम का मंच संचालन विश्वविद्यालय के लिबरल आर्टस एवं मानविकी विभाग की आचार्य डॉ. मोनिका मेहरोत्रा ने किया । इस दौरान दिव्यांग खेल अकादमी के संचालक एवं राष्ट्रीय तीरंदाजी कोच पैरालंपिक्स टीम कुलदीप वेदवान को मुख्य अतिथि के द्वारा शॉल ओढाकर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ. पिंटू मिश्रा, डॉ. वैभव गोयल भारतीय, डॉ. निखिल श्रीवास्तव, आर पी सिंह, डॉ. रितेश चौधरी, डॉ. गीता परंवदा, डॉ. संदीप चौधरी, डॉ. जैसमीन आनंदाबाई, डॉ. मुकेश मित्तल, डॉ. सत्यम खरे, कर्नल राजेश त्यागी, डॉ. अनोज राज, डॉ. मुनीश रेड्डी, पराग गुप्ता, राजकुमार सागर आदि विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों के साथ उपस्थित रहे।