खेल आयोग बनाए पर दिया जोर,ताकि शोषण से बचे रहें महिला न नाबालिक एथलीट, राज्यसभा सांसद डा. वाजपेयी का एथलीट आयोग की जरूरत पर बल
नई दिल्ली । भाजपा के मुख्य सचेतक व राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने खेल आयोग की स्थापना पर बल दिया है। उन्होंने बताया कि एथलीटों खासतौर से महिला व नाबालिग एथलीटों को दुव्यवहार से बचाने के लिए खेल नीति व आयोग का गठन किया जाए। राष्ट्रीय खेल खेल प्रशासन विधेयक 2025 लाए जाने का मकसद एक ऐसा विधान लाना जो खेल निकायों में निष्पक्ष, नैतिक व पारदर्शी कार्यान्वयन सुनिश्चित करता है। खिलाड़ियों के अधिकारों व कल्याण की रक्षा करता हो। देश में खेलें का संवर्धन व विकास करता हो। खेलों में उत्पन्न विवादों और शिकायतों के समाधान के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित करता हो तथा भारतीय खेल प्रशासन को ओलंपिक व पैराचार्टर जैसे वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाता हो। इसका मकसद अध्यक्ष, महासचिव व कोषाध्यक्ष जैसे पदाधिकारियों के लिए आयु व कार्यकाल जैसी सीमाओं का निर्धारित होगा। खेल निकायों की कार्यकारी समितियों व खेल निकायों में एथलीटों का प्रतिनिधित्व सुनिनिश्चत निर्धारित होगा। वैश्विक मानदंडों के अनुरूप जैंडर समानता को बढ़ावा देते हुए महिलाओं के प्रतिनिधित्व को अनिवार्य बनाना एनएसएफ के सुचारू संचालन के लिए एक स्पष्ट विवाद समाधान तंत्र स्थापित होगा। एथलीट आयोग को अनिवार्य बनाया जाएगा। जिससे खिलाड़ियों को अपनी चिंताओं और नीतिगत सुझावों के लिए एक मंच मिल सकेगा। अधिकारियों कोच और कर्मचारियों से जुडेÞ मानकों को बनाए रखने के लिए नैतिक समितियों की आवश्यकता है। एक राष्ट्रीय खेल बोर्ड का गठन किया जाएगा जो खेल निकायों के लिए केंद्रीय खेल प्राधिकरण के रूप में कार्य करेगा। निलंबन व असंबद्धता या गैर अनुपालन के दौरान संघों के प्रबंधन के लिए तदर्थ समितियां स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव करने के लिए खेल चुनाव पैनल का गठन तीव्र, किफायती व एकीकृत विवाद समाधान के लिए राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण की स्थापना एथलीटों व विशेषकर महिलाओं व नाबालिगों को दुर्व्यवहार से बचाने के लिए एक सुरक्षित खेल नीति को प्रस्तु करना है।