बिजली चोरी बना कुटीर उद्योग

kabir Sharma
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ई-रिक्शा चार्जिंग से करोड़ों का फटका, कामर्शियल रेटों के बजाए घरेलू रेटों पर, कई इलाकों में घरों में चार्ज की जा रही है हजारों की रिक्शा

मेरठ। शहर में अवैध ई रिक्शा चार्जिंग स्टेशनों ने बिजली चोरी को कुटीर उद्योग में तब्दील कर दिया है। शहर के कई इलाकों में बिजली स्टाफ से सेटिंग गेटिंग कर घर-घर में अवैध चार्जिंग स्टेशन संचालित किए जा रहे हैं। नियमानुसार ई-रिक्शा की चार्जिंग पीवीवीएनएल से अधिकृत चार्जिंग स्टेशनों पर कामर्शियल रेटों पर होनी चाहिए, लेकिन अवैध चार्जिंग स्टेशन घरेलू रेटों से कुछ ज्यादा लेकर इ-रिक्शाओं की चार्जिंग कर रहे हैं।

बिजली चोरी का बड़ा जरिया

शहर की सड़कों पर दौड़ते ई-रिक्शा न सिर्फ ट्रैफिक जाम की वजह बन रहे हैं, बल्कि बिजली चोरी का बड़ा जरिया भी साबित हो रहे हैं। पूरे महनगर में तमाम स्थानों पर अवैध चार्जिंग स्टेशन घरेलू कनेक्शन से चोरी की बिजली चूसकर रोजाना हजारों रिक्शा चार्ज कर रहे हैं, लेकिन लगता है कि पीवीवीएनएल अफसरों को इससे कोई सरोकार नहीं रह गया है। इस कारगुजारी से डिस्कॉम को करोड़ों का फटका लग रहा है।
अवैध चार्जिंग स्टेशनों का जाल
मेरठ में अवैध चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछा हुआ है। अवैध स्टेशन घरेलू मीटरों से अवैध हुकिंग के जरिए बिजली चुराते हैं। एक ई-रिक्शा को फुल चार्ज करने में 6-8 यूनिट बिजली लगती है, जो कमर्शियल रेट पर 7-8 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से आती है। लेकिन चोरी से ये स्टेशन महज 20-30 रुपये में ही चार्जिंग सर्विस देते हैं, जिससे चालक आकर्षित होते हैं। सूत्रों की मानें तो प्रतिदिन करीब तीस हजार ई रिक्शा चोरी की बिजली से चार्ज किए जा रहे हैं। इतने बडेÞ स्तर पर चोरी की जाने वाली बिजली की रकम डिस्कॉम भर में कई करोड़ में बनती है।

हादसों को दे रहे न्यौता

अवैध चार्जिंग स्टेशनों पर रात के समय हाई वोल्टेज चार्जरों का इस्तेमाल होता है, जो तारों में ओवरलोडिंग पैदा कर आग लगने का खतरा बढ़ा देते हैं। पिछले महीने ही दिल्ली रोड पर एक स्टेशन में शॉर्ट सर्किट से आग लग चुकी है, लेकिन अफसरों ने इसे ‘घरेलू दुर्घटना’ बता टाल दिया। शहर के लिसाड़ी रोड एरिया के एक जेई ने नाम न छापे जाने की शर्त पर बताया कि इस इलाके में घर-घर में चोरी की बिजली से ई रिक्शा चार्ज की जाती हैं। लाइनलास और सप्लाई बाधित होने में बड़ी भूमिका अवैध चार्जिंग स्टेशनों की है। ऐसा नहीं कि चैकिग नहीं होती, लेकिन चैकिंग टीम के पहुंचने से पहले ही मुखबिर चौकस कर देते हैं। शहर के कई स्टेशन तो प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में चल रहे हैं।

पूर्व में हुई थी कार्रवाई

पूर्व में डिस्कॉम की तत्तकालीन एमडी ईशा दुहन ने 20 अफसरों पर कार्रवाई की थी, जिसमें अधिशासी अभियंता स्तर तक के अफसर भी शामिल थे, लेकिन ई-रिक्शा चार्जिंग पर फोकस नहीं हुआ। वहीं दूसरी ओर शहर के बडे व्यापारी नेता लोकेश अग्रवाल बताते हैं कि अवैध चार्जिंग स्टेशन बिजली अफसरों की शह पर चल रहे हैं। एक्सीयन, एसडीओ व जेई सरीखे अफसर यदि ठान लें तो एक भी अवैध चार्जिंग स्टेशन ना चले।

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