
हाईकोर्ट बैंच की मांग पचास साल पुरानी अब तो सुनो सरकार, वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बैंच की मांग, शिक्षक व राजनीतिक संगठन आए एक साथ,
मेरठ। वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बैंच की मांग सत्तर साल पुरानी है। उत्तर प्रदेश और केंद्र में कई सरकारें आयीं और चली गयीं, लेकिन वेस्ट यूपी वालों के हिस्से में अभी तक अन्याय ही आया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश (वेस्ट यूपी) में इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थायी बेंच स्थापित करने की करीब पांच दशकों पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। 22 जिलों के लाखों लोगों और अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रयागराज (इलाहाबाद) हाईकोर्ट की दूरी 700-800 किलोमीटर होने से न्याय प्राप्त करना महंगा और समय लेने वाला हो जाता है। इस साल 2025 में आंदोलन ने नया जोर पकड़ा है, जिसमें हड़तालें, प्रदर्शन, सांसदों का घेराव और लोकसभा में मुद्दा उठाना शामिल है। हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार से अभी तक कोई ठोस आश्वासन या फैसला नहीं आया है। वहीं दूसरी ओर बैंच के लिए आंदोलनरत वकीलों की कचहरी स्थित पंड़ित नानक चंदसभागार में एक बैठक हुई। इसमें बार अध्यक्ष संजय शर्मा भी मौजूद रहे। संबोधित करने वालों में रामकुमार शर्मा एडवाेकेट भी शामिल थे।
इसलिए चाहिए हाईकोर्ट बैंच
वेस्ट यूपी के 22 जिलों (मेरठ, सहारनपुर, गाजियाबाद, आगरा, मुरादाबाद आदि) की आबादी करीब 10 करोड़ से अधिक है। मेरठ की यदि बात करें तो पाकिस्तान का लाहौर पास है और इलाहाबाद दूर है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुल पेंडिंग केसों में से 54% से ज्यादा वेस्ट यूपी से संबंधित हैं। इलाहाबाद जाने में जाने में रात भर का सफर और हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। अन्य राज्यों जैसे महाराष्ट्र में 5 बेंच (हालिया कोल्हापुर में पांचवीं बेंच शुरू हुई), जबकि यूपी में सिर्फ लखनऊ में एक बेंच है। जसवंत सिंह कमीशन (1980s) ने वेस्ट यूपी में बेंच की सिफारिश की थी, लेकिन लागू नहीं हुई।पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने भी इस मांग को पूरी तरह जायज बताया है।
पूरा शहर बैंच के लिए बंद को तैयार
हाईकोर्ट बैंच के लिए 17 दिसंबर के प्रस्तावित बंद को पूरा शहर समर्थन दे रहा है। बंद के समर्थन में तमाम दलों के नेताओं ने समर्थन की बात कही है। व्यापारी एसोसिएशन भी इसके साथ हैं। बंद को समर्थन दिए जाने का सिलसिला लगातार जारी है। माना जा रहा है कि बंद अभूतपूर्व होगा।
सांसदों का किया घेराव
हाईकोर्ट बैंच के लिए आंदोलन कर रहे वकीलों की तमाम संस्थाओं ने एक जुट होकर पिछले दिनों विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होने बागपत लाेकसभा से सांसद राजकुमार सांगवान और राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत वाजपेयी का घेराव भी किया था। हालांकि अच्छी बात यह रही कि दोनों ही सांसदों ने बताया कि वो खुद चाहते हैं कि हाईकोर्ट की बैंच मिले।
यह बोले नेता
राज्य सभा सदस्य व भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बताया कि उन्होंने शून्य काल के दौरान सदन में बैंच का मुद्दा उठाया और सरकार से बैंच की पैरवी की।
लोकसभा सदस्य अरुण गोविल ने बताया कि वह लोकसभा में यह मामला पुरजोर तरीके से उठा चुके हैं और आगे भी इस मामले को उठाते रहेंगे। वेस्ट यूपी के लिए यह न्यायिक मांग है।
मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि इस बार का बंद अभूतपूर्व होगा। उन्होंने जानकारी दी कि तमाम संगठन, राजनीतिक दल और व्यापारी संगइन बंद के साथ हैं। छात्र और शिक्षक संगठनों ने भी बंद के लिए समर्थन पत्र सौंपे हैं। यह बंद केवल वकीलों का बंद नहीं है यह हर उस आम और खास का बंद है जिसको न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है और ज्यदा पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
पूर्व विधायक राजेन्द्र शर्मा ने बताया कि उन्होंने इस मुददे पर सोमवार को एक बैठक की इस बैठक में बेगमपुल व्यापार संघ के अध्यक्ष पुनीत शर्मा, छात्र नेता विजय तालियान, मेरठ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ मूठा के सचिन कुमार शर्मा, पूर्व पार्षद अब्दुल गफ्फार के अलावा निजी विद्यालय संचालक, सामाजिक संगठनों से अमित कुमार आदि शामिल हुए। वहीं दूसरी ओर सोमवार को नानक चंद सभागार में भी बंद को लेकर वकीलों ने एक सभा की जिसको राम कुमार शर्मा ने संबोधित किया।