

डोरली स्टेशन में आने जाने तक का रास्ता नहीं, डिवाइडर भी अभी अधूरे रैपिड से कैसे करें यात्रा, रखरखाव के बिन सूख गए पेड़ पौधे
दिल्ली/मेरठ। मेरठ टू दिल्ली सरायकालेखा स्टेशन तक रैपिड रेल का धमाकेदार उद्घाटन कराने वाली एनसीआरटीसी के स्तर से काफी काम अधूरा पड़ा है जिसके चलते कहा जा सकता है कि एनसीआरटीसी के अधिकारियों ने उद्घाटन काम तो धमाकेदार करा लिया है, लेकिन सबसे बड़ी मुसीबत जब स्टेशनों का काम ही अधूरा पड़ा है तो फिर यात्री रैपिड रेल से सुगम सफर भला कैसे कर पाएंगे। यहां तक कि बेगमपुल स्टेशन जो इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा स्टेशन एनसीआरटीसी अधिकारी बताते हैं, उसका भी अभी पूरी तरह से पूरा नहीं किया जा सका है। बेगमपुल के अलावा डोरली का स्टेशन भी ऐसा ही है जहां स्टेशन के एक तरफ का काम सारा का सारा अधूरा पड़ा है। जिसके चलते सवाल पूछा जा रहा है कि जब स्टेशन ही अधूरा हैं तो फिर यात्रा कैसे की जाए सकेगी।
साल 2024 तक किया जाना था पूरा
रैपिड प्रोजेक्ट का काम साल २०२४ तक पूरा किया जाना था। उसके बाद से इस प्रोजेक्ट यानि रैपिड रेल शुरू करने की मियाद बार-बार बढ़ायी जाती रही। पिछले साल कांवड़ यात्रा से पहले रैपिड/नमो भारत रेल का काम पूरा करा दिए जाने का दावा एनसीआरटीसी के अफसरों द्वारा किया गया था, लेकिन कांवड़ तो दूर की बात है महाशिवरात्री भी आकर चली गयी तब कहीं जाकर इस साल 22 फरवरी को रैपिड रेल का उद्घाटन कराया जा सका।
उद्घाटन पूरा काम अधूरा
रैपिड/नमो भारत रेल का उद्धघाटन तो एनसीआरटीसी अफसरों ने धमाकेदार करा दिया, लेकिन जितनी तवज्जो प्रोजेक्ट के उद्धघाटन पर दी गयी, उतना ध्यान प्रोजेक्ट का काम खासतौर से रैपिड के स्टेशनों का काम पूरा कराए जाने की ओर नहीं दिया गया। अब कहा जा रहा है कि बेगमपुल स्टेशन काफी बड़ा है इसकी वजह से इसका काम अभी रह गया है। बेगमपुल स्टेशन का लालकुर्ती वाले हिस्से पर अभी भी काम जारी है। बेगमपुल के अलावा रूड़की रोड स्थित डोरली स्टेशन लगभग आधा काम रूका पड़ा है। स्टेशन के प्रवेश और निकास दो हिस्से हैं, निकास वाले हिस्से का पूरा काम अभी अधूरा है।
कैसे बाहर तक आएंगे यात्री
डोरली स्टेशन की यदि बात करें तो निकास द्वार की स्थिति देखकर नहीं लगता कि वहां यात्री निकलकर सड़क तक आ पाएंगे। निकास द्वार के बाहर जहां सड़क तक जाने के लिए सीढ़ियां लगायी गयी हैं, वहां पर सीढ़ियों से आगे अभी तक सारा काम अधूरा है। वहां की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि पैदल निकला भी मुश्किल है। इस स्टेशन के निकास द्वार के बाहर नाले की खुदाई की वजह से पानी भर गया था। पानी भर जाने की वजह से वहां दलदल हो गयी। हालांकि दलदल अब सूख गयी है, लेकिन इसके सूखने के कारण अब और भी बुरी स्थिति हो गयी। काम की गति कितनी है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सड़क से लेकिन निकास द्वार की सीढ़ियों तक मिट्टी को समतल करने के लिए अभी जेसीबी से रास्ते को समतल किया जा रहा है। निकास द्वारा की सीढ़ियों से आगे सड़क तक पहुंचने के लिए पैदल के दो रास्ते हैं इनमें से एक रास्ते पर कबाड़ का काम करने वालों का कब्जा था, हालांकि रैपिड के शुरू होने के बाद उन्होंने कब्जे हटा लिए हैं, लेकिन कब्जे हटाने भर से बात नहीं बनने वाली, जब तक कि निकास की सीढ़ियों से सड़क तक आने के लिए पक्का यानि टाइल का रास्ता नहीं बना दिया जाता। आसपास के लोगों ने बताया कि जो काम की जो हालत नजर आ रही है उसको देखते हुए यही लगता है कि कम से कम आठ से दस दिन का समय पूरा काम निपटाने में लग जाएंगे। इसके इतर बेगमपुल स्टेशन पर पूरा काम कब तक निपटाया जा सकेगा, इसकी कोई मियाद अभी नहीं बतायी जा सकती।
डिवाइडर भी अधूरा
जिन स्लीपरों पर रैपिड दौड़ रही है उनके नीचे एनसीआरटीसी के लिए कार्यदायी संस्थाओं ने डिवाइडर बनाकर वहां पेड़ पौधे और पेड़ पौधों की हिफाजत के लिए डिवाइडर के दोनों ओर लोहे का मजबूत जाल लगाए जाने का काम शुरू कराया था। स्लीपरों के नीचे जो पेड़ पौधे लगाए गए हैं ना तो उनका सही से रखरखाव किया जा सका है और ना ही इनकी सुरक्षा के लिए जो लोहे का जाल लगाए जाने की बात कही गयी थी, वो काम पूरा कराया जा सका है। रखरखाव व पानी ना दिए जाने के चलते पेड़ सूख रहे हैं। जहां जालियां नहीं लगायी जा सकी हैं, वहां से आवारा पशु घुस आते हैं। स्लीपरों के नीचे डिवाइडर का काफी काफी ज्यादा अधूरा पड़ा है।
यह कहना है एनसीआरटीसी प्रवक्ता का
इस संबंध में जब एनसीआरटीसी की दिल्ली स्थित प्रवक्ता/आफिसर अर्पण दलकोटी से बात की गयी तो उन्होंने बेगमपुल और डोरली सरीखे स्टेशनों तथा पूरे रूड़की रोड से होकर गुजर रही लाइन के नीचे अधूरा पड़े काम को लेकर अनभिज्ञता जाहिर की। उन्होंने बतायाकि वह इस संबंध में जानकारी तलब कर रही हैं।